Antibiotics Awareness: नियमों को दरकिनार कर बेची जा रही एंटीबायोटिक, बढ़ रहा दवा प्रतिरोध का खतरा
गोरखपुर में एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री नियमों को ताक पर रखकर की जा रही है। बिना डॉक्टर के पर्चे के ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बिना डॉक्टर के पर्चे एंटीबायोटिक बिक्री, नियमों की अनदेखी।
अनावश्यक सेवन से शरीर में बढ़ रहा एंटीबायोटिक प्रतिरोध।
गंभीर संक्रमणों में सामान्य एंटीबायोटिक अब बेअसर हो रही।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। Antibiotics Awareness: एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री को लेकर तय नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। नियमानुसार बिना पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे के एंटीबायोटिक दवाएं बेचना प्रतिबंधित है, लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई मेडिकल स्टोरों पर फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर की सलाह के धड़ल्ले से ये दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
स्थिति यह है कि हल्की सर्दी-जुकाम, बुखार या गले में खराश जैसी सामान्य बीमारियों में भी लोग सीधे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर रहे हैं। इससे शरीर में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध विकसित हो रहा है और जब एंटीबायोटिक की सचमुच जरूरत होती है तब ये दवाएं काम नहीं कर रहीं।
चिंता की बात यह है कि केवल मेडिकल स्टोर ही नहीं, बल्कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर भी अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक लिखी जा रही हैं। हाल ही में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) द्वारा किए गए एक सर्वे में सौ प्रतिशत पर्चों पर एंटीबायोटिक दवाएं लिखी मिलीं। इनमें से 72 प्रतिशत पर्चों पर एजिथ्रोमाइसीन का उल्लेख था। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जरूरत इस तरह एंटीबायोटिक लिखना और लेना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।
डाक्टरों के अनुसार एंटीबायोटिक का अनियमित और अनियंत्रित प्रयोग शरीर में दवा प्रतिरोध (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) पैदा कर देता है। इसका सीधा असर यह होता है कि जब मरीज गंभीर संक्रमण के साथ अस्पताल पहुंचता है तो सामान्य एंटीबायोटिक उस पर असर नहीं करती।
यह भी पढ़ें- Antibiotics Awareness: लापरवाही बन रही जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती, कई जगहों पर फेंका मिला बायो मेडिकल वेस्ट
बीआरडी मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग के आंकड़े इस खतरे की पुष्टि करते हैं। एक वर्ष में 11,245 रोगियों की कल्चर जांच की गई, जिनमें से 8,655 मरीजों में सामान्यतया प्रयोग की जाने वाली पेनिसिलिन और सिफैलोस्पोरिन समूह की एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध पाया गया। इसका मतलब है कि ये दवाएं अब बड़ी संख्या में मरीजों पर प्रभावी नहीं रहीं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अक्सर लोग झोलाछाप की सलाह पर या अपनी जानकारी के आधार पर एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं और कोर्स भी पूरा नहीं करते। इससे बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और एंटीबायोटिक के प्रति अपने भीतर प्रतिरोध विकिसित करते हैं। इससे वे मजबूत होकर दोबारा संक्रमण फैलाते हैं। नतीजतन मरीजों को बाद में महंगी और उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक देनी पड़ती हैं, जिससे इलाज का खर्च भी कई गुणा बढ़ जाता है।
बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक नहीं बेची जा सकती है। ऐसा करते पाए जाने पर एक साल के अंदर 22 मेडिकल स्टारों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। ग्राहक को चाहिए कि डाक्टर के पर्चे पर ही दवाएं खरीदे और दुकानदार से उसका बिल अवश्य ले। मेडिकल स्टोरों को भी नियमों का पालन करते हुए दवाएं बेची चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-पूरन चंद, सहायक आयुक्त औषधि
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।