गोरखपुर बालिका हत्याकांड में 20 अगस्त को पिता की गवाही, पाक्सो कोर्ट-2 में होगी सुनवाई
गोरखपुर बालिका दुष्कर्म-हत्या मामले में 20 अगस्त को पीड़िता के पिता की गवाही होगी। यह मुकदमा अब विशेष न्यायाधीश पॉक्सो ...और पढ़ें

12 अगस्त को अभिषेक यादव पर आरोप तय,अब गवाहों के बयान और साक्ष्य होंगे पेश। जागरण
HighLights
गोरखपुर बालिका दुष्कर्म-हत्या मामले में पिता की गवाही 20 अगस्त को।
मुकदमा पॉक्सो कोर्ट-2 में स्थानांतरित, बर्खास्त सिपाही पर आरोप तय।
पुलिस ने शीघ्र निस्तारण हेतु डे-टू-डे ट्रायल की अर्जी दी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जिला अस्पताल से अपहृत बालिका का दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के मामले में अब 20 अगस्त को मुकदमा वादी बालिका के पिता की गवाही होगी। मुकदमे की पत्रावली पाक्सो कोर्ट-1 से स्थानांतरित होकर विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट नंबर-दो शमीम अहमद अंसारी की अदालत में पहुंच गई है। मंगलवार को मुकदमा वादी बालिका के पिता निजी अधिवक्ता के साथ न्यायालय पहुंचे। अधिवक्ता ने गवाह को बयान के लिए तैयार करने के लिए समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने 20 अगस्त की तारीख तय कर दी।
मामले में 12 अगस्त को गाजीपुर जिले के रहने वाले बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव पर आरोप तय हो चुके हैं। अब अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। मुकदमे में पंचायतनामा तैयार करने वाले अधिकारी, गिरफ्तारी टीम और विवेचना से जुड़े अधिकारियों समेत कुल 16 गवाह हैं। पुलिस ने मुकदमे की रोजाना सुनवाई यानी डे-टू-डे ट्रायल के लिए भी न्यायालय में अर्जी दी है, ताकि मामले का शीघ्र निस्तारण कराया जा सके।
यह है मामला
कोतवाली क्षेत्र में परिवार के साथ किराए पर रहने वाली 10 वर्षीय बालिका 28 जुलाई की रात जिला अस्पताल में भर्ती बड़ी बहन को भोजन देने गई थी। इसी दौरान डायल-112 में तैनात रहे गाजीपुर निवासी अभिषेक यादव उसका अपहरण कर लिया।
पुलिस के अनुसार, बालिका के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को चिउटहा में रोहिन नदी के किनारे फेंक दिया गया था। 30 जुलाई को बालिका का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले में दुष्कर्म और हत्या की धाराएं बढ़ाईं। 31 जुलाई को अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद एसएसपी ने उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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पुलिस ने छह दिन में विवेचना पूरी करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। अब आरोप तय होने के बाद मुकदमा विधिवत ट्रायल के चरण में पहुंच गया है। अभियोजन की कोशिश है कि सभी गवाहों के बयान और साक्ष्यों की प्रस्तुति जल्द पूरी कराकर मुकदमे का फैसला कराया जाए।
