गोरखपुर में हर्षोल्लास के साथ जलाई गई होलिका, गूंज उठा भक्त प्रह्लाद का जयघोष
गोरखपुर में फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। मोहल्लों में सजी होलिकाएं निर्धारित समय पर जलीं, जिससे 'होली है' की ग ...और पढ़ें

पैडलेगंज में होलिका दहन। जागरण
HighLights
फाल्गुन पूर्णिमा पर गोरखपुर में होलिका दहन हुआ।
भक्त प्रह्लाद के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। फाल्गुन पूर्णिमा की रात सोमवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों में होलिका दहन परंपरागत उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। मोहल्लों में सजी होलिकाएं निर्धारित समय पर धू-धू कर जल उठीं और वातावरण में 'होली है' की गूंज सुनाई देती रही। बच्चों की किलकारियां, ढोल-मजीरों की थाप और होली गीतों की स्वर लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
होलिका दहन के पूर्व लोग अपने-अपने मोहल्लों के शिव मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर जुटने लगे। ढोल-मजीरे की संगत में पहले शिव भजनों से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे जब माहौल परवान चढ़ा तो भजनों की जगह फाग और होली गीतों की मस्ती छा गई। रंग-बिरंगे गुलाल से सजे चेहरे और पारंपरिक परिधानों में लोग झूमते-गाते लोग नजर आए। निर्धारित मुहूर्त नजदीक आते ही टोलियां समवेत स्वर में होली गीत गाते हुए होलिका दहन स्थलों की ओर बढ़ीं।
वहां पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन कराया। इसके बाद जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, सूखी लकड़ियों और उपलों से सजी होलिका धधक उठी और लोगों ने भक्त प्रह्लाद का जयघोष किया। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। जौ-तीसी की बालियां भूनीं और उसे घर में ले जाकर रखा। माना जाता है कि इससे समृद्धि आती है।
होलिका की परिक्रमा करते समय लोगों ने परंपरा अनुसार, झिल्ली (शरीर पर लगाए गए सरसों के बुकवा से निकली मैल) अग्नि में अर्पित की और प्रार्थना की कि जीवन से सभी बुराइयां दूर हों तथा सत्य, सदाचार और सद्भाव का वास बना रहे। असत्य पर सत्य की विजय के इस प्रतीक पर्व पर लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं।
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बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कहीं फुलझड़ियां चमक रही थीं तो कहीं छोटे पटाखों की आवाज गूंज रही थी। बच्चे एक-दूसरे पर रंग उड़ाते और 'कबीरा' गाते हुए अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे। कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक फाग गाए, जिससे माहौल और भी रंगीन हो गया।
होलिका दहन के बाद श्रद्धालुओं ने अग्नि की राख को माथे से लगाकर आशीर्वाद लिया। मान्यता है कि होलिका की राख शुभ और रोग-निवारक होती है। देर रात तक मोहल्लों में होली गीतों का दौर चलता रहा।