गोरखपुर में जमींदारी जमीन की बिक्री पर उठे सवाल, राजस्व परिषद में शिकायत दर्ज
गोरखपुर के पुर्दिलपुर क्षेत्र में जमींदारी संपत्ति से जुड़ी जमीन की बिक्री और नामांतरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया ...और पढ़ें

शिकायतकर्ता का आरोप- जमन-8 में दर्ज भूमि की नियमों के विरुद्ध हुई बिक्री और नामांतरण। जागरण
HighLights
पुर्दिलपुर में जमींदारी जमीन की बिक्री पर विवाद।
राजस्व परिषद में नियमों के उल्लंघन की शिकायत।
उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शहर के पुर्दिलपुर क्षेत्र में जमींदारी संपत्ति से जुड़ी जमीन की बिक्री और उसके नामांतरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता ने राजस्व परिषद में प्रकरण उठाते हुए आरोप लगाया है कि नियमों के विपरीत ऐसी भूमि का विक्रय और बाद में नामांतरण कर दिया गया, जिसकी बिक्री वैधानिक रूप से संभव नहीं थी।
मामले में अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई या नहीं।सदर तहसील अंतर्गत पुर्दिलपुर की जमीन को लेकर डा. अजय शंकर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है। उनका दावा है कि संबंधित भूमि जमन-8 श्रेणी में दर्ज है और हलका लेखपाल की रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया था।
शिकायत के अनुसार, 15 सितंबर 2025 को एसडीएम सदर न्यायालय ने खातेदार के स्थान पर क्रेता फर्म के नाम नामांतरण आदेश पारित कर दिया, जबकि इस मामले में आपत्ति भी प्रस्तुत की गई थी।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विवादित भूमि की रजिस्ट्री 19 अक्टूबर 2022 को सचल निबंधन प्रक्रिया के तहत कराई गई थी। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद विक्रेता के बताए स्थान पर जाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की, जबकि भूमि की प्रकृति को देखते हुए इसकी वैधता पर प्रश्न उठते हैं।
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डा. अजय शंकर सिंह ने मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पैतृक जमींदारी संपत्ति है, जो उत्तराधिकार में मिली है, और जमन-8 भूमि पर दर्ज व्यक्ति को बिक्री का अधिकार नहीं होता, क्योंकि स्वामित्व का अधिकार जमींदार के पास माना जाता है।
विधि विशेषज्ञ भी इस प्रकरण में प्रारंभिक स्तर पर अनियमितता की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों और जमींदारी भूमि से जुड़े नियमों की जानकारी संबंधित विभागों को होती है, ऐसे में मामले की गहन जांच आवश्यक है।
पत्रावली देखने के बाद ही इस मामले पर कोई टिप्पणी की जा सकती है। जमींदारी के मामले में पत्रावली जांचकर आती है, उसी के आधार पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही नामांतरण के मामले में निर्णय किया जाता है। फिलहाल मामला संज्ञान में नहीं है। जांच की जाएगी।
- दीपक गुप्ता, एसडीएम सदर
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