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    गोरखपुर के रामगढ़ताल में सुरक्षा नियमों की अनदेखी, रात में भी चल रही मोटरबोट

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 03:54 PM (IST)

    गोरखपुर के रामगढ़ताल में सूर्यास्त के बाद भी मोटरबोट का संचालन जारी है, जो सुरक्षा नियमों और प्रशासन के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। अधिकांश चालकों क ...और पढ़ें

    शासन ने सूर्यास्त के बाद बोटिंग पर लगाया है पूर्ण प्रतिबंध, फिर भी खुलेआम हो रहा संचालन। जागरण

    शासन ने सूर्यास्त के बाद बोटिंग पर लगाया है पूर्ण प्रतिबंध, फिर भी खुलेआम हो रहा संचालन। जागरण

    HighLights

    1. सूर्यास्त के बाद भी रामगढ़ताल में बोटिंग जारी।

    2. अधिकांश चालकों के पास वैध लाइसेंस और प्रशिक्षण नहीं।

    3. सुरक्षा उपायों, रेस्क्यू टीम की कमी से हादसे का डर।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दो माह पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में क्रूज पलटने की दर्दनाक दुर्घटना के बाद शासन की सख्ती के क्रम में जिला प्रशासन ने नौका सुरक्षा को लेकर कई निर्देश जारी किए थे। लेकिन, रामगढ़ताल में इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

    शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि सूर्यास्त के बाद किसी भी स्थिति में नाव या मोटरबोट का संचालन नहीं होगा, लेकिन रामगढ़ताल में रात तक बोटिंग जारी रहती है। इतना ही नहीं, बोट संचालन करने वाले अधिकांश चालकों के पास आवश्यक लाइसेंस और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी नहीं हैं।

    12 मई को राहत आयुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद डीएम दीपक मीणा ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सूर्यास्त के बाद नाव या मोटरबोट चलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही केवल लाइसेंसधारी चालकों से ही संचालन कराया जाए, प्रत्येक यात्री को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य हो और क्षमता से अधिक सवारी न बैठाई जाए। घाटों पर लाइफबाय, रस्सी, सर्च लाइट, प्राथमिक उपचार किट और प्रशिक्षित गोताखोरों की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    इसके विपरीत, करीब 1700 एकड़ में फैले रामगढ़ताल में प्लेटफार्म नंबर एक, चार, पांच और छह से रात के करीब आठ बजे तक मोटरबोटों का संचालन देखा जा सकता है। लौटते समय कई चालक तेज रफ्तार में नाव घुमाने और स्टंट करते नजर आते हैं। यह स्थिति तब है, जब नियमों के अनुसार सूर्यास्त होने के बाद जलयान संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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    सूत्रों के अनुसार, ताल में बोटिंग कराने वाले कई चालकों के पास जलयान संचालन का वैध लाइसेंस या निर्धारित प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं है। इसके बावजूद उनका संचालन जारी है। सुरक्षा के नाम पर यात्रियों को लाइफ जैकेट तो पहनाई जाती है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्थायी रेस्क्यू टीम, प्रशिक्षित गोताखोर या त्वरित बचाव तंत्र अभी तक मौके पर उपलब्ध नहीं है। जल पुलिस की तैनाती के निर्देश हो गए हैं लेकिन अभी इन्हें स्थान नहीं मिल सका है।

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    रामगढ़ताल पहले भी कई हादसों का गवाह बन चुका है। पिछले वर्ष दो मोटरबोटों की टक्कर में कई लोग घायल हुए थे, जबकि एक अन्य मोटरबोट फ्लोटिंग रेस्तरां के पिलर से टकरा गई थी। हाल ही में एक युवती की डूबने से मौत के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा।

    सरयू नदी में शुक्रवार को हुए हादसे ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि जल पर्यटन में नियमों की अनदेखी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल का कहना है नियमों की अनदेखी करने वाले मोटर बोट संचालकों पर सख्ती की जाएगी। सुनिश्चित कराया जाएगा कि सूर्यास्त के बाद बोट का संचालन न हो। अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी।