गोरखपुर जू में ठंड का असर: शेर-बाघ सुस्त, हिमालयन भालू की मस्ती बनी आकर्षण का केंद्र
गोरखपुर चिड़ियाघर में बढ़ती ठंड से शेर, बाघ जैसे मांसाहारी वन्यजीव सुस्त हो गए हैं और नाइट सेल में रह ...और पढ़ें

हिमालयन भालू वीरू और शालिनी इस मौसम में गुफा से बाहर निकलकर दिनभर मस्ती कर रहे हैं। जागरण
HighLights
गलन बढ़ने से गोरखपुर जू के शेर-बाघ हुए सुस्त।
हिमालयन भालू ठंड का आनंद ले रहे, पर्यटकों को लुभा रहे।
वन्यजीवों को ठंड से बचाने विशेष आहार व हीटिंग व्यवस्था।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गलन बढ़ने के साथ ही शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) के अधिकांश वन्यजीव सुस्त हो गए हैं। ठंड और तेज हवा के चलते शेर, बाघ और तेंदुआ जैसे मांसाहारी वन्यजीव खुले बाड़ों में आने से परहेज कर रहे हैं। जू कर्मी सुबह 10 बजे के बाद उन्हें सेल से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कुछ देर बाहर रहने के बाद दोबारा नाइट सेल में लौट जा रहे हैं। इसके विपरीत हिमालयन भालू ठंड का भरपूर आनंद ले रहा है और उसकी चंचल गतिविधियां पर्यटकों को खूब लुभा रही हैं।
बीते दो दिनों से बढ़ी गलन के कारण चिड़ियाघर प्रबंधन ने शेर-बाघ के नाइट सेल को ही पर्यटकों के लिए खोल दिया है, ताकि वे सेल के भीतर बैठे इन वन्यजीवों को देख सकें। नाइट सेल में लगे ब्लोअर और हीटर से इन वन्यजीवों को पर्याप्त गर्मी मिल रही है। वहीं अलग-अलग प्रजाति के हिरनों को ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़ों में अलाव जलाने और पुआल बिछाने की व्यवस्था की गई है।

ठंड से बचाव को लेकर प्राणी उद्यान के वन्यजीवों को लेकर की गई व्यवस्था।
चिड़ियाघर में रह रहे दोनों प्रजाति के भालुओं के स्वभाव में भी मौसम का अंतर साफ नजर आ रहा है। एक बाड़े में रह रहे देसी भालू नीतीश और रानी ठंड के कारण अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं। वहीं पास के बाड़े में हिमालयन भालू वीरू और शालिनी इस मौसम में गुफा से बाहर निकलकर दिनभर मस्ती कर रहे हैं। वे मचान पर चढ़ते, शहद चाटते और अठखेलियां करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे पर्यटकों का खास मनोरंजन हो रहा है।

ठंड से बचाव को लेकर प्राणी उद्यान के वन्यजीवों को लेकर की गई व्यवस्था।
वन्यजीव चिकित्सक डा. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि हिमालयन भालुओं को ठंड का मौसम पसंद है, जबकि गर्मी में इन्हें अधिक परेशानी होती है। कोहरे के कारण बाड़ों की जमीन में नमी और घास-फूस के भीगने से शेर, बाघ और तेंदुआ बाहर बैठना नहीं चाहते।
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इस वजह से वे थोड़ी देर खुले बाड़े में आने के बाद फिर सेल में चले जाते हैं। ठंड को देखते हुए भालुओं के आहार में बदलाव किया गया है। उन्हें नारियल, केला, संतरा, सेब, पपीता के साथ पनीर और खीर दी जा रही है।

ठंड से बचाव को लेकर प्राणी उद्यान के वन्यजीवों को लेकर की गई व्यवस्था।
अतिरिक्त ऊर्जा के लिए प्रतिदिन 150 से 200 ग्राम शहद भी दिया जा रहा है। अन्य वन्यजीवों के आहार में भी बदलाव किए गए हैं। ठंड से बचाव के लिए शेर, बाघ और तेंदुए के नाइट सेल में ब्लोअर लगाए गए हैं, जबकि लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, बंदर और भालू के बाड़ों में हीटर चलाए जा रहे हैं। जलीय जीवों के तालाब का पानी रोज बदला जा रहा है, जिससे उन्हें ठंड से राहत मिल सके।
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