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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    AYUSH University: दिया योग का ज्ञान, अब आयुष का वरदान; मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

    Updated: Wed, 02 Jul 2025 03:26 PM (IST)

    गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का लोकार्पण किया गया। यह प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय है जहाँ आयुर्वेद यूनानी होम्योपैथी प्रा ...और पढ़ें

    महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विवि के अत्याधुनिक पंचकर्म काटेजl जागरण
    महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विवि के अत्याधुनिक पंचकर्म काटेजl जागरण

    HighLights

    1. गोरक्षनगरी को नई पहचान देगा महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय
    2. आयुष विश्वविद्यालय का गोरखपुर में लोकार्पण
    3. सभी आयुष विधाओं की शिक्षा, चिकित्सा

    आशुतोष मिश्र, जागरण गोरखपुर। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और सिद्धा। एक परिसर में इन सभी पद्धतियों की शिक्षा संग उपचार की व्यवस्था। आयुष की सभी विधाओं का यह संगम गोरक्षनगरी को नई पहचान देगा। गुरु गोरखनाथ और योगानंद की जिस धरा ने दुनिया को योग का ज्ञान दिया, वह अब आयुष का वरदान देगी।

    मंगलवार को भटहट के पिपरी में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय लोक को समर्पित करते हुए महामहिम द्रौपदी मुर्मु ने असीम संभावनाओं वाले इस संस्थान को लेकर ऐसी ही आशा जताई। विश्व समुदाय के लिए इसे भारत की सौगात बताकर उन्होंने इस राज्य विश्वविद्यालय को क्यों वैश्विक फलक पर उभारा, वह इसकी भव्यता और विशेषता पर दृष्टिपात कर समझा जा सकता है।

    इसे प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय होने का गौरव तो इसकी स्थापना के साथ ही प्राप्त हो गया, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना ही कुछ ऐसी थी जिसने इसे राष्ट्रीय परिदृश्य में विशिष्ट बना दिया। यहां के कुलपति डा. केआर रेड्डी के मुताबिक, आयुष की विभिन्न विधाओं को समर्पित देश भर में दूसरा अन्य कोई विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जहां सभी पद्धतियों की पढ़ाई और उनसे उपचार की व्यवस्था हो।

    आयुष की परिभाषा के अनुरूप यहां उसकी हर विधा में पढ़ाई, अनुसंधान से लेकर उपचार की व्यवस्था मुख्यमंत्री की अभिनव सोच और उनकी दूरदृष्टि से ही संभव हुई। राज्य में आयुष की अलग-अलग विधाओं से जुड़े कालेजों के नियमन की व्यवस्था पहले उस विधा के विश्वविद्यालयों के पास थी। लेकिन, राज्य के इस पहले आयुष विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के बाद प्रदेश के सभी राजकीय और निजी आयुष कालेजों (वर्तमान में 98) का नियमन अब यहीं से ही होता है।

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    यहां आयुष की सभी विधाओं की ओपीडी का संचालन हो रहा है। अब अस्पताल (आइपीडी, ओटी) शुरू होने से आयुष पद्धति से उपचार की बेहतरीन सुविधा भी उपलब्ध होगी। समग्रता में देखें तो यह अपनी तरह का इकलौता चिकित्सा विश्वविद्यालय कहा जा सकता है।

    मेडिकल टूरिज्म के खुलेंगे द्वार

    आयुष विश्वविद्यालय के शांत वातावरण में 28 लग्जरी काटेज दूर से ही आकर्षित करते हैं। लोकार्पण के बाद अब यहां लोगों को पंचकर्म चिकित्सा की भी सुविधा मिलने लगेगी। बेहद कम शुल्क पर लोग इसका लाभ उठा सकेंगे। राष्ट्रपति ने इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए अपने संबोधन में आशा जताई थी कि यह क्षेत्र मेडिकल टूरिज्म के नए द्वार खोलेगा।

    नंबर गेम

    • 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की आयुष विश्वविद्यालय की परिकल्पना
    • 28 अगस्त, 2021 को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने शिलान्यास किया
    • 52 एकड़ क्षेत्रफल में 267.50 करोड़ रुपये इसके निर्माण के लिए स्वीकृत हुए
    • 15 फरवरी, 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओपीडी का शुभारंभ किया
    • 01 जुलाई, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसे लोक को समर्पित किया

    ग्रामीण अर्थव्यस्था को बूस्टर डोज

    आयुष विश्वविद्यालय के पूर्ण रूप से क्रियाशील होने से आसपास के गांवों की आर्थिकी में बड़ा बदलाव आएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन न सिर्फ आसपास के गांवों के लोगों द्वारा जुटाई गई जड़ी-बूटियों को खरीदेगा, बल्कि वह किसानों के लिए औषधीय खेती के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। इस दिशा में कई गांवों के किसानों से करार भी हो चुका है।