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नेपाल में रसोई ठंडी, खेत सूखे, भारत से सप्लाई कट के बीच सरकार की कूटनीतिक परीक्षा

Updated: Thu, 27 Aug 2026 08:06 AM (IST)

नेपाल में भारत द्वारा एलपीजी आपूर्ति में कटौती और खाद की कमी से आम जनता परेशान है, जिससे रसोई गैस ...और पढ़ें

आमजन को रसोई गैस सिलिंडर के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। जागरण

आमजन को रसोई गैस सिलिंडर के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। जागरण

HighLights

  1. भारत ने नेपाल को एलपीजी आपूर्ति 25% घटाई।

  2. खाद की कमी से किसान धान की फसल को लेकर चिंतित।

  3. नेपाली जनता इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता मान रही।

आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। नेपाल में इन दिनों हिंदू राष्ट्र और रोहिंग्या घुसपैठ को लेकर हंगामा मचा हुआ है। इस माहौल में आमजन रसोई गैस की किल्लत और खाद की कमी से जूझ रहा है। नेपाल के लोगों का कहना है कि जब भारत में रसोई गैस की किल्लत थी तब भी मित्र राष्ट्र को वहां से भरपूर एलपीजी दी जाती रही।

इधर अचानक से भारत ने एलपीजी आपूर्ति में 25 प्रतिशत कटौती कर दी है। इससे आमजन को सिलिंडर के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। लोगों को गैस नहीं मिल पा रही है। इसी तरह खाद का संकट भी किसानों को परेशान कर रहा है।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर द्विपक्षीय संबंधों में ऐसा क्या हुआ कि मित्र राष्ट्र ने उनकी चिंता कम कर दी। नेपाली लोग इस संकट को नेपाल सरकार के लिए कूटनीतिक परीक्षा की घड़ी बता रहे हैं।

तौलियहवां, नेपाल के हृदयराम यादव धान की फसल को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि गांव की समिति पर मुश्किल से 10 बोरी खाद आ रही है। वहां से एक किसान को पांच किलो खाद भी सुलभ नहीं हो पा रही। तराई में कई बड़े काश्तकार है, लेकिन खाद की कमी से उनकी किसानी भगवान भरोसे हो गई है।

कपिलवस्तु जिले के अभिरांव निवासी गिरीश कुमार के अनुसार नेपाल में यूरिया भारतीय मुद्रा में 1250 रुपये में बिकती है, लेकिन समिति या बाजार में यह उपलब्ध ही नहीं हो रही। भारतीय मुद्रा में 2500 रुपये में पहले मिल जाने वाली डीएपी भी बाजार से गायब है। इसी जिले के मनखोरिया निवासी तौलन प्रसाद पखवारे भर से रसोई गैस सिलिंडर के लिए रोज गैस एजेंसी का चक्कर काट रहे हैं। नेपाली मुद्रा में 2050 रुपये में मिलने वाला सिलिंडर 2000 रुपये भारतीय मुद्रा में देने पर भी नहीं मिल पा रहा है।

सिद्धार्थ नगर पालिका स्थित स्टार होली डे होटल के संचालक एवं होटल एसोसिएशन के एडवाइजर रसोई गैस और खाद संकट को नेपाल सरकार के लिए कूटनीतिक परीक्षा की घड़ी बताते हैं। वह कहते हैं- हमारी इन जरूरतों को हमेशा से मित्र राष्ट्र भारत प्राथमिकता पर पूरा करता रहा। अब जब संकट गहराया है तो आम नेपाली कहीं न कहीं इसे नई सरकार की विदेश नीति की विफलता मान रहा है।

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सिद्धार्थ नगर पालिका के मेयर इश्तियाक अहमद खान भारत-नेपाल के बीच के रोटी-बेटी के संबंधों को रेखांकित करते हैं। कहते हैं- दोनों देशों के लोगों के बीच का यह रिश्ता बहुत ही मजबूत है, जो किसी राजनीतिक चाल से दरकने वाला नहीं है। वह रसोई गैस संकट के पीछे पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को अहम वजह मानते हैं, लेकिन लिपुलेख और कालापानी जैसे विवादित मुद्दों पर दोनों सरकारों के बीच मतभेद का मुद्दा भी उठाते हैं। यहीं के रामचंद्र उपाध्याय खाद-गैस संकट को लेकर नेपाल सरकार से भारत के प्रति विदेश नीति की समीक्षा का सुझाव देते हैं।