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नेपाल बाढ़ के बाद दुर्गम रास्तों पर हौसलों की उड़ान, मलबे और तबाही के बीच युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन

Updated: Tue, 01 Sep 2026 06:03 AM (IST)

नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे और टूटे रास्तों के बीच युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी है। सेना और पुलिस ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मलबे और टूटे रास्तों पर बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी।

  2. जहरे विद्युत उपकेंद्र की बिजली बहाली प्राथमिकता पर।

  3. भारत से मिले रेस्क्यू उपकरण कार्य में सहायक।

विश्वदीपक त्रिपाठी, नुवाकोट, (नेपाल)। मलबे के ढेर, टूटे रास्ते और तेज बहाव के बीच छह दिन से लगातार रेस्क्यू में जुटे जवानों के चेहरों पर थकान जरूर है, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ है। अगली सूचना मिलते ही कंधे पर उपकरण उठाते हैं और प्रभावित इलाके की ओर बढ़ जाते हैं।

सामने रास्ता नहीं है तो मशीन से मलबा हटाकर रास्ता बनाया जा रहा है, जहां मशीन पहुंच नहीं पा रही वहां जवान हाथों से तलाश कर रहे हैं। कहीं रस्सी के सहारे नीचे उतरना पड़ रहा है तो कहीं नाव से नदी पार कर प्रभावित बस्तियों तक पहुंच रहे हैं।

धादिंग जिले के जहरे विद्युत उपकेंद्र को चालू कराने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। सेना के कैप्टन अर्जुन सुबेदी व नेपाल प्रहरी दल गजुरी के प्रभारी निरीक्षक बीबी आर्याल के नेतृत्व में सोमवार को उपकेंद्र परिसर में जमा सिल्ट हटाकर उसे साफ कराया गया। उपकेंद्र का संचालन सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यहां से धादिंग, गोरखा, चितवन व नुवाकोट में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

26 अगस्त को सुबह 10 बजे के करीब जब इस उपकेंद्र तक बाढ़ का पानी पहुंचा तो इससे जुड़े 20 हजार उपभोक्ताओं के घरों की बिजली गुल हो गई। उपकेंद्र के प्रविधिक सहायक रमेश अगस्ते बताते हैं कि जितनी जल्दी हो सके उपकेंद्र को चालू कराना प्राथमिकता है। नेपाली सेना के आ जाने से कार्य में तेजी आई है।

सेना की मदद से मुग्लिन-काठमांडू मार्ग पर जगह-जगह अवरुद्ध रास्तों को भी सही कराया जा रहा है। विद्युत पोल व मोबाइल टावरों को सही कराया जा रहा है। गल्छी से रसुवा जाने वाला मुख्य मार्ग पुल टूटने से बंद है। रसुवा के बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए सोमवार को वैकल्पिक मार्ग को सही कराकर भारी वाहनों के चलने योग्य बनाया गया।

भारी उपकरणों को दुर्गम रास्तों से कंधे पर ले जाया जा रहा है। मौके पर जवानों का कहना है, 'रास्ता जैसा भी हो, हमें वहां पहुंचना है जहां कोई फंसा है या किसी अपने की तलाश कर रहा है।' स्थानीय लोग भी रेस्क्यू टीम को बाढ़ से पहले के रास्ते, घरों की स्थिति और पानी के बहाव की दिशा बता रहे हैं।

जवानों के मुताबिक, स्थानीय लोगों की जानकारी से उन जगहों तक पहुंचने में मदद मिल रही है जहां मलबे और पानी ने पूरा भूगोल बदल दिया है। भारत से मिले रेस्क्यू उपकरण भी कई जगह काम आसान कर रहे हैं । पानी तथा बिजली की परेशानी के बीच अभियान जारी रखने में मदद मिल रही है।

रेस्क्यू टीम को देखते ही लोग उन्हें घेर लेते हैं। कोई पानी और भोजन की गुहार लगाता है, कोई दवा मांगता है तो कोई हाथ जोड़कर लापता स्वजन के बारे में पूछता है। जवान उनकी बात सुनते हैं और जवाब देते हैं, 'जब तक तलाश पूरी नहीं होगी, हम यहां से नहीं जाएंगे।'

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