गोरखपुर में रसखान सी सीरत सजा रही भगवान की मूरत, 13 साल से पूजा पंडाल की जिम्मेदारी संभाल रहे शाहरुख
गोरखपुर के पुर्दिलपुर में शाहरुख नामक एक मुस्लिम व्यक्ति पिछले 13 सालों से गणेश और दुर्गा पूजा पंडालों का आयोजन ...और पढ़ें

पुर्दिलपुर स्थित शायर माता मंदिर परिसर में आयोजित गणेश प्रतिमा के साथ दाएं शाहरूख और बाएं अंकुर। जागरण
HighLights
शाहरुख 13 साल से गणेश पूजा पंडाल की जिम्मेदारी निभा रहे।
मूर्ति स्थापना से विसर्जन तक शाकाहार का पालन करते हैं।
यह पहल सांप्रदायिक सद्भाव और साझा संस्कृति दर्शाती है।
संगम दूबे, गोरखपुर। 'भजन गाने कभी मंदिर में जब रसखान आते हैं, मंजर देखने ऐसा वहां भगवान आते हैं। फिरकापरस्ती उस गांव को छू नहीं सकती, सजाने राम की मूरत जहां रहमान आते हैं।' यह शेर पुर्दिलपुर की शायर माता समिति के गणेश पूजा पंडाल पर चरितार्थ हो रहा है। बप्पा की प्रतिमा स्थापना हो या नवरात्र पर सजने वाला श्रीदुर्गा पूजा पंडाल, 13 वर्ष से शाहरुख पूरे मनोयोग से इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
प्रतिमा की स्थापना से विसर्जन तक शाकाहार अपनाकर वह उत्सवी रंग में पगे रहते हैं। रसखान सी सीरत लिए वह इन दिनों पंडाल में भगवान की मूरत सजा रहे हैं। विघ्नहर्ता गणेश की प्रतिमा सामने है और शाहरुख की नजर उनके चेहरे पर। फिर मुकुट, वस्त्र और रंगों पर चर्चा होती है तो समिति के अन्य सदस्य अपनी राय देते हैं, लेकिन शाहरुख की नजर उन बारीकियों पर होती है, जिन्हें अक्सर लोग देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। इसीलिए डेकोरेशन का पूरा काम समिति ने उनके जिम्मे कर रखा है।
समिति अध्यक्ष अंकुर बताते हैं कि 13 साल पहले पंडाल सजाने की योजना बनी तो दोस्त शाहरुख ने भाई की तरह साथ दिया। अब गणेश पूजा हो या दुर्गा प्रतिमा की स्थापना, उत्सव की तैयारी उनके बिना अधूरी-सी लगती हैं। प्रतिमा कहां से आएगी, कैसी होगी, उसके रंग कैसे होंगे, वस्त्र क्या होंगे-हर छोटी-बड़ी चर्चा में उनकी मौजूदगी रहती है। पंडाल की सजावट की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास रहती है।

विसर्जन के समय भी वह सबसे आगे रहते हैं और आरती कराते हुए प्रतिमा को विदाई देते हैं। अलग-अलग पहचान और आस्था से आगे बढ़कर साथ मिलकर त्योहार मनाने की यह तस्वीर शहर की उस साझी संस्कृति को सामने लाती है, जिसमें पर्व खुशियां बांटने का माध्यम बनते हैं।
शाहरुख के साथ परिवार भी जुड़ा
तीन भाइयों और दो बहनों में चौथे नंबर के शाहरुख के पिता निजी वाहन चालक हैं और मां गृहिणी हैं। उत्सव के प्रति उनकी लगन को देखकर परिवार के सदस्य भी आयोजन में सहयोग करते हैं। गणपति पूजा की तैयारी अब केवल शाहरुख की नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए खुशी का अवसर बन चुकी है।
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शाहरुख कहते हैं कि उन्हें त्योहार अच्छे लगते हैं और वह पूरे मनोयोग से उत्सव में शामिल होते हैं। उनके लिए त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों को करीब लाने और खुशियां बांटने का अवसर हैं।
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