जेल से निकले शशांक ने पूर्वांचल में खड़ा किया बिश्नोई गैंग का नेटवर्क, इंस्टाग्राम के जरिए बेचीं 150 पिस्तौलें
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि जेल से छूटने के बाद शशांक पांडेय ने गोरखपुर और पूर्वांचल में ...और पढ़ें

बाएं से सूरज यादव, प्रमोद यादव, राजू यादव और शशांक। सौ. इंटरनेट मीडिया
HighLights
शशांक पांडेय ने पूर्वांचल में बिश्नोई गैंग का नेटवर्क बनाया।
इंस्टाग्राम के जरिए 100-150 अवैध पिस्टल बेची गईं।
राजकुमार चौहान हत्याकांड में भी इसी गिरोह का असलहा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शशांक पांडेय है। एसटीएफ के अनुसार पश्चिमी चंपारण, बिहार का रहने वाला शशांक गोरखपुर में रहकर अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़े लोगों को लारेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई गैंग से जोड़ने का काम करता है।
गोरखपुर के साथ ही आसपास के जिलों में उसने ही बिश्नोई गैंग का नेटवर्क खड़ा किया है। पंजाब पुलिस असलहा सप्लाई करने के मामले में उसे जेल भेज चुकी है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में पता चला कि शशांक व उसके साथी गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गैंग से संपर्क में भी हैं।
एसटीएफ के मुताबिक शशांक ने श्रेयांश यादव उर्फ बबलू को असलहा तस्करी की दुनिया में आगे बढ़ाया। दोनों के बीच पुराने संबंध हैं और शशांक को श्रेयांश का आपराधिक गुरु और साथी बताया गया है। इसके बाद श्रेयांश मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक फैले हथियारों के नेटवर्क से जुड़ गया।
लारेंस बिश्नोई से जुड़े आरोपित मध्य प्रदेश के बड़वानी के सेंधवा और हरियाणा के सोनीपत से हथियारों की खरीद और पूर्वांचल में सप्लाई करते हैं। एसटीएफ अब यह पता लगा रही है कि शशांक के संपर्क में पूर्वांचल के कितने लोग आए। कितने लोगों ने उनसे हथियार खरीदा है। गैंग से जुड़े लोगों के साथ उसका संपर्क किस स्तर तक था।
पंजाब में दर्ज पुराने मामले से लेकर गोरखपुर में सक्रिय नेटवर्क तक की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच में श्रेयांश यादव के महाराष्ट्र कनेक्शन का भी पता चला है। वहां साथियों के साथ सात पिस्टल और 21 कारतूस के साथ पकड़ा गया था। बड़वानी में भी असलहा तस्करी के मामले में उसके जेल जाने की बात सामने आई है। एसटीएफ अब शशांक के साथ ही उसके साथियों के संपर्कों, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
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इंस्टाग्राम के जरिए ढूंढते थे ग्राहक,गाेरखपुर को बनाया था तस्करी का सेंटर
अवैध असलहा तस्करी के इस नेटवर्क ने हथियारों की सप्लाई के लिए एक व्यवस्थित तरीका अपनाया था। हथियार बनाने या सीधे ग्राहक तक पहुंचने के बजाय बाहर से पिस्टल मंगाकर स्थानीय तस्करों के जरिये उन्हें अलग-अलग जिलों में पहुंचाया जाता था। एसटीएफ के अनुसार इस नेटवर्क की एक कड़ी मध्य प्रदेश के बड़वानी स्थित सेंधवा और दूसरी हरियाणा के सोनीपत में थी। इन्हीं स्थानों से पिस्टल खरीदकर गोरखपुर और आसपास के जिलों में भेजी जाती थीं। गिरोह के सदस्य इंस्टाग्राम के जरिए ग्राहक ढूंढकर बेचते थे।
पिस्टल की कीमत उसके बोर और गुणवत्ता के हिसाब से तय होती थी। 15 से 20 हजार रुपये में हथियार खरीदने के बाद उसे पूर्वांचल में 30 से 40 हजार रुपये में मुनाफा लेकर श्रेयांश व उसके साथी बेचते थे। इस तरह हर हथियार के साथ तस्करों के लिए मोटा मुनाफा भी जुड़ा था। एसटीएफ के अनुसार इंस्टाग्राम के माध्यम से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 100 से 150 पिस्टल की बिक्री की गई।
जांच में यह बात सामने आने के बाद आरोपितोें के इंटरनेट मीडिया खातों और संपर्कों की पड़ताल कर रही है। तस्करों ने गोरखपुर को सेंटर बनाया था । यहां से कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज और संतकबीरनगर समेत अन्य जिलों तक हथियार पहुंचाए जाते थे। स्थानीय तस्कर इस सिंडिकेट की निचली कड़ी के रूप में काम करते थे।
बाहर से आने वाली पिस्टल इन्हीं के जरिये आगे ग्राहकों तक पहुंचती थी। अब जांच का दायरा खरीदारों तक पहुंच गया है। पिछले तीन वर्षों में जिन 100 से 150 पिस्टल की आपूर्ति का दावा किया गया है, उनकी सूची तैयार की जा रही है।
राजकुमार चौहान हत्याकांड में इसी सिंडिकेट ने मुहैया कराया था असलहा
अवैध असलहों के जिस नेटवर्क की कड़ियां गोरखपुर में खुली हैं, उसकी गंभीरता हथियारों की बरामदगी से कहीं आगे जाती दिखाई दे रही है। पकड़े आरोपितों से खरीदी गई पिस्टल कई आपराधिक घटनाओं में इस्तेमाल हुई। चिलुआताल के बरगदवा में चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड में इस्तेमाल असलहा भी इसी गिरोह ने उपलब्ध कराए थें। इसके अलावा पीएसी जवान की ओर से खरीदी गई पिस्टल का इस्तेमाल भविष्य में युवक की हत्या करने में की जानी थी।
बांसगांव क्षेत्र के उनौला खास निवासी प्रमोद यादव को इसी नेटवर्क से 40 हजार रुपये में पिस्टल बेचने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार प्रमोद की एक युवक से दुश्मनी थी और उसने हत्या के लिए पीएसी के जवान सूरज यादव की मदद से हथियार खरीदा था। उसके पास पिस्टल लेकर आदर्श यादव नाम का युवक आया था।
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क्राइम ब्रांच व एसटीएफ की जांच में पता चला कि आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई में युवक की हत्या की योजना थी। पिस्टल खरीदने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये देने की जानकारी मिली थी। इससे पहले भी इस नेटवर्क की पिस्टल के अलग-अलग मुकदमों में सामने आने की जानकारी मिली है।
कैंपियरगंज थाने के आर्म्स एक्ट के मुकदमे में बरामद एक पिस्टल तथा संतकबीरनगर के खलीलाबाद थाने के मुकदमे में बरामद दो पिस्टल की सप्लाई इसी गिरोह ने की थी। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हथियारों से कितनी वारदातें हुईं।
