Teachers Day Special: यूपी में यहां हैं रेलगाड़ी वाला स्कूल, कोच में बैठकर बच्चे सीख रहे ककहरा
Teachers Day Special: हमीरपुर के सरीला ब्लॉक के ममना गांव में एक सरकारी स्कूल को शिक्षक रविंद्र कुमार सिंह ने ...और पढ़ें

सरीला ब्लाक के ममना गांव स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय को दिया गया रेलगाड़ी का रूप। जागरण
HighLights
ममना गांव का स्कूल रेलगाड़ी के रूप में बदला गया
शिक्षक रविंद्र कुमार सिंह ने डेढ़ लाख रुपये खर्च किए
दीवारों पर पेंटिंग से बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ा
अनुराग मिश्रा, हमीरपुर। Teachers Day Special: कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने और नामांकन बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के नवाचार किए जा रहे हैं। इसी नवाचार के बीच विकासखंड सरीला के कन्या प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक रहे रविंद्र कुमार सिंह ने भी एक अनोखी पहल बच्चों के नामांकन बढ़ाने के लिए की, जिसमें करीब दो लाख रुपये का खर्च आया।
शिक्षक के द्वारा विद्यालय की दीवारों को रेलगाड़ी का रूप दिया गया है और कक्षाओं को कोच बनाया गया है। जिसमें बैठकर बच्चे ककहरा सीख रहे हैं। इसके अलावा कक्षों के अंदर भी की गई पेटिंग बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है और सामान्य ज्ञान सिखा रही है। शिक्षक का यह नवाचार इंटरनेट मीडिया से लेकर सरकारी अभिलेखों में मेहनत की को बयां कर रहा है।

विद्यालय में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक रवींद्र कुमार सिंह। सौजन्य स्वयं
छात्रांकन कम होने के साथ अपनी बदहाली में आंसू बहाने वाला सरीला ब्लाक के ममना गांव स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय आज जिले के अन्य स्कूलों के लिए माडल के रुप में साबित हो रहा है। एक समय था, जब इस विद्यालय में बच्चे नहीं आते थे, ग्रामीणों से कहकर शिक्षक भी थक गए थे। लेकिन बच्चों की संख्या नहीं बढ़ रही थी। जिसके बाद विद्यालय के तत्कालीन इंचार्ज प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार सिंह ने कुछ अलग करने की सोची और उन्होंने पूरे विद्यालय की तस्वीर ही बदल डाली।
इन्होंने विद्यालय को रेलगाड़ी का रूप दिया और दीवारों में विभिन्न प्रकार की पेटिंग बनवाई जो गांव के बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करने लगी और धीरे धीरे विद्यालय में छात्रांकन बढ़ना शुरू हो गया। मौजूदा समय में रवींद्र कुमार सिंह उसी विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

शिक्षक रवींद्र कुमार सिंह। स्वयं
शिक्षक रवींद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में स्कूल में कुल 140 बच्चे हैं जो विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कभी कहते कहते जो बच्चे विद्यालय नहीं आ रहे थे वह आज विद्यालय की तस्वीर को देख खुद ब खुद चलकर स्कूल पहुंच रहे हैं और शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षक के इस नवाचार ने स्कूल ही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को भी संवारने का काम किया है। वहीं बीएसए मुकेश खरवार ने भी विद्यालय की इस तस्वीर को देख प्रशन्नता व्यक्त की है।
विद्यालय की तस्वीर बदलने में खर्च हुए दो लाख, डेढ़ लाख शिक्षक ने स्वयं लगाए
शिक्षक रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय की तस्वीर को बदलने में कुल दो लाख रुपये का खर्च आया था। जिसमें से उन्होंने करीब पचास हजार रुपये विद्यालय की ग्रांट से खर्च किए थे और डेढ़ लाख रुपये खुद की जेब से खर्च करके विद्यालय को संवारने का काम किया। आज यह विद्यालय क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूूरे जिले के लिए माडल साबित हो रहा है।

विद्यालय परिसर में कराई गई पेटिंग जो बच्चों को सिखा रही साामान्य ज्ञान। स्वयं
स्कूल की दीवारें बच्चों का बढ़ा रहीं सामान्य ज्ञान, माइक से होती है प्रार्थना
स्कूल की दीवारें बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ा रही है। विद्यालय की ऐसी कोई दीवार नहीं है, जिसमें शिक्षा से संबंधित जानकारी न लिखी हो। कक्षाओं में पढ़ने के साथ साथ बच्चे खेल खेल भी शिक्षा प्राप्त करके अपना भविष्य संवार रहे हैं। वहीं विद्यालय में माइक से बच्चों को प्रार्थना कराई जाती है। जिससे बच्चों को एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने की अनुभूति होती है। वहीं ग्रामीणों में भी अब इस विद्यालय को लेकर खुशी दिखाई दे रही है।
विद्यालय को संवारने में करीब दो लाख रुपये का खर्च आया था, विद्यालय की दीवारों को रेलगाड़ी का रुप दिया गया है। इसके अलावा अन्य दीवारों में भी सामान्य ज्ञान से जुड़ी चीजें लिखी हुई हैं। बच्चों को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के साथ साथ खेलकूद की भी अच्छी सुविधा दी जा रही है। ताकि बच्चे पढ़े और आगे बढ़े।
- रवींद्र कुमार सिंह, शिक्षक, कन्या प्राथमिक विद्यालय ममना।
