15 जुलाई से शुरू हो रहे गुप्त नवरात्र, 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास
आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुरू हो रहे हैं, जिसमें देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु ...और पढ़ें

गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई दिन बुधवार से प्रारंभ हो रहे हैं।
HighLights
गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से देवी उपासना के लिए शुरू।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ।
चातुर्मास में शुभ कार्य स्थगित, 20 नवंबर को समाप्त।
संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर। वर्ष में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्र इस बार आषाण मास में 15 जुलाई यानि प्रतिपदा तिथि के साथ शुरू हो रहे हैं। ऐसे में देवी की अराधना करने वाले भक्तों के लिए यह शुभ संयोग शुरू होने जा रहा है। इसी के साथ 25 जुलाई देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाएंगे।
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई दिन बुधवार से प्रारंभ हो रहे हैं। गुप्त नवरात्र वर्ष में दो बार आते हैं। माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह नवरात्र होते हैं। यह दिन विशेष रूप से मंत्र जाप, देवी उपासना और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते है।
कलश स्थापना प्रात 05:33 मिनट से लेकर 10:09 मिनट तक शुभमुहूर्त
इस दौरान विशेष रूप से दशमहाविद्याओं जैसे काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की पूजा की जाती है। प्रातः स्नान करके कलश स्थापना करें। कलश स्थापना प्रात 05 :33 मिनट से लेकर 10:09 मिनट तक शुभमुहूर्त हैं। मां दुर्गा या अपनी इष्ट देवी की पूजा करें।
दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, या ''ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'' मंत्र का जाप करें, सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। कन्या पूजन नवमी के दिन करें। 25 जुलाई दिन शनिवार को देवशयनी एकादशी व्रत हैं। इसी दिन से भगवान विष्णु चारमाह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा की अवस्था में शेषनाग की शय्या पर लक्ष्मी माता के साथ विराजमान रहते हैं। इन चार माह में वैवाहिक आदि मंगल कार्य पूर्ण रूप से बंद हो जाते हैं।
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20 नवंबर देवउत्थान एकादशी से विवाह कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे
25 जुलाई से ही चातुर्मास प्रारंभ हो रहा हैं। इन चार महीनों में सृस्टि का संचारण भगवान शिव करते हैं। चातुर्मास में व्रत, हवन, जाप, दान आदि करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होता हैं। चातुर्मास 20 नवंबर दिन शुक्रवार कार्तिक शुक्ल देवउत्थान एकादशी तक रहेगा। 20 नवंबर देवउत्थान एकादशी से विवाह कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे।