हापुड़ में 15000 महिलाओं की बल्ले-बल्ले, मुख्यमंत्री योगी ने रक्षाबंधन से पहले दिया था तोहफा
हापुड़ में रक्षाबंधन पर 15 हजार से अधिक बहनों ने नि:शुल्क रोडवेज बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे उन्हें मायके ...और पढ़ें
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AI जनरेटेड।
संवाद सहयोगी, हापुड़। भाई की कलाई सूनी न रह जाए इसी भाव ने बहनों को घर की चौखट से निकलकर बस अड्डे तक पहुंचा दिया। किसी के हाथ में राखी थी तो, किसी की गोद में बच्चा।
कंधे पर सामान और आंखों में मायके पहुंचने की बेचैनी। बसों में भीड़ मिली, सीट के लिए धक्कामुक्की हुई और कई बार अगली बस का इंतजार करना पड़ा, लेकिन भाई को राखी बांधने की खुशी के आगे सफर की मुश्किलें छोटी पड़ गईं।
रक्षाबंधन पर प्रदेश सरकार की निश्शुल्क रोडवेज यात्रा का तोहफा बहनों के लिए बड़ा सहारा बना। हापुड़ डिपो से 27 और 28 अगस्त की रात तक करीब 15 हजार बहनों ने रोडवेज बसों से सफर कर मायके की राह पकड़ी।
प्रदेश सरकार ने 27 की सुबह छह बजे से 29 अगस्त की रात 12 बजे तक बहनों के लिए रोडवेज बसों में यात्रा निश्शुल्क की। इतना ही नहीं बहनों के साथ एक सहयोगी भी निश्शुल्क था। निश्शुल्क सफर की घोषणा के साथ ही बस अड्डे पर भीड़ बढ़ गई।
रक्षाबंधन से एक दिन पहले और पर्व के दिन बसों में सबसे अधिक भीड़ रही। हापुड़ से मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, मोदीनगर, बुलंदशहर समेत आसपास के जिलों के लिए जाने वाली बसों में बहनों की संख्या लगातार बढ़ती रही।
बस अड्डे पर कई बार ऐसी स्थिति बनी कि बस आते ही बहनें सवार होने के लिए दौड़ पड़ीं। सीट पाने के लिए आपाधापी हुई तो, कई बहनों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। बस पूरी भरने के बाद पीछे रह गई बहनों को अगली बस का इंतजार करना पड़ा। बच्चों और सामान के साथ घंटों इंतजार करना भी आसान नहीं था, लेकिन किसी के कदम पीछे नहीं हटे।
किराये की चिंता खत्म अपनों से मिलने की खुशी
निश्शुल्क यात्रा ने बहनों के लिए आर्थिक राहत भी दी। दूर-दराज के मायके जाने वाली बहनों को आने-जाने के किराये की चिंता नहीं रही। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में बहनों ने रोडवेज बसों का सहारा लिया। बस में जगह मिली या नहीं, सफर आरामदायक रहा या मुश्किल। इन सब पर राखी का उत्साह भारी रहा।
रोडवेज बसों ने दूरी की कम
रक्षाबंधन के इस सफर में रोडवेज की बसें केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जा रही थीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते के बीच बनी दूरी को भी पाट रही थीं। हजारों बहनों के हाथों में सजी राखियां और आंखों में मायके पहुंचने की चमक इस सफर की सबसे खूबसूरत तस्वीर बनी।
मेरठ रहा सबसे ज्यादा व्यस्त रूट
हापुड़ से मेरठ के लिए सफर करने वाली बहनों की संख्या सबसे ज्यादा रही है। करीब छह हजार से अधिक बहनों ने केवल मेरठ का सफर तय किया। इस रूट पर सबसे ज्यादा बसों का संचालन हुआ, जिससे बहनें अपने भाई के पास समय से पहुंच गईं और उनकी कलाई पर प्यार की डोर बांधी।
महिलाओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसको लेकर बसों के अतिरिक्त फेरे भी बढ़ाए गए थे। 15 हजार महिलाओं ने निश्शुल्क बस सेवा का अब तक लाभ लिया है। - लक्ष्मण सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
