हापुड़ बदनौली गोलीकांड: जन्माष्टमी पर हुए खूनी संघर्ष में दलित युवक की मौत, गांव में नहीं थमा आक्रोश; Inside Story
हापुड़ के बदनौली गांव में जन्माष्टमी पर हुए खूनी संघर्ष में दीपक की मौत के बाद भी आक्रोश बरकरार है, ...और पढ़ें
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गांव में पुलिस फोर्स तैनात। जागरण
HighLights
जन्माष्टमी पर बदनौली में दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ।
दीपक की मौत के बाद भी गांव में तनाव बरकरार है।
पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई और पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। हापुड़ में जिला मुख्यालय से मात्र तीन किमी की दूरी पर बसा संपन्न गांव बदनौली आजकल प्रदेशभर में चर्चाओं में है। जब लोग जन्माष्टमी की खुशियां मना रहे थे, तब यहां पर दो पक्षों में पथराव और फायरिंग हो रही थी। इसमें दोनों पक्षों के 5 लोग घायल हुए, जिनमें से तीन को गोली लगी।
वहीं, अधिकारियों का अमला गांव में पहुंचा, विवाद का कारण तलाशने में जुटा, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। पुलिस की जांच में यह तो सामने आया कि दो साल में दोनों पक्षों में तीन बार मारपीट और पथराव हो चुका है। दो बार आमने-सामने आकर जमकर गाली-गलौंच हुई है, उसके बावजूद विवाद का गंभीर कारण पता नहीं चल सका।
टशनबाजी को लेकर टकराव
दरअसल, दोनों पक्ष के युवाओं में टशनबाजी को लेकर टकराव है। इनमें कबुतर उड़ाने की स्पर्धा, जिम में मशल्स दिखाने और फुटबाल मैच में अपने साथियों को प्रोत्साहित करने जैसी मामूली बातों को लेकर मारपीट और पथराव होते रहे हैं।
युवाओं के मध्य छोटी-छोटी बातों को लेकर होते रहे विवाद को ग्राम प्रधान व ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों ने और हवा दे रखी है। अभी तक होती रही मारपीट और पथराव की घटनाओं के साथ ही इस बार दीपक ने मौत ने विवाद की खाई को गहरा कर दिया है।
अब बड़ी चिंता यह है कि 33 लाेगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने और पांच की गिरफ्तारी के बाद भी आक्रोश थमने की बजाय बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के जिम्मेदारों के सामने हालात सामान्य करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
खाकी पर एक पक्ष को संरक्षण देने के आरोप
बदनौली के खूनी संघर्ष से पहले पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की राजनीति में पुलिस का एक पक्ष के प्रति झुकाव रहा और इसी वजह से विवाद लगातार बढ़ता गया। समय रहते दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को गंभीरता से नहीं लिया गया। दो महीने पहले दोनों पक्षों में पथराव तक को पुलिस ने बिना कार्रवाई के ही दबा लिया था।
यही कारण रहा कि शुक्रवार को विवाद ने हिंसक रूप लिया और गोलीबारी व पथराव में सात लोग घायल हो गए। अब दीपक की मौत के बाद यही सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस पहले ही निष्पक्ष और सख्त हस्तक्षेप करती तो क्या हालात इतने बिगड़ते? हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष दिखेगी, तभी सुधरेंगे हालात
बदनौली में गोलीकांड के बाद उपजे तनाव को खत्म करने के लिए पुलिस की कार्रवाई का निष्पक्ष दिखना सबसे अहम है। पुलिस को नामजद और फरार आरोपितों पर समान रूप से कार्रवाई होने का भरोसा कायम करना होगा।
किसी एक पक्ष को कार्रवाई में राहत या दूसरे पर अधिक सख्ती का संदेश गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। दीपक की मौत के बाद बढ़े आक्रोश के बीच पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था के साथ अपनी कार्रवाई की पारदर्शिता साबित करने की भी चुनौती है।
गांव के जिम्मेदारों को भी आना होगा आगे
बदनौली में बिगड़े माहौल को सामान्य करने की जिम्मेदारी केवल पुलिस-प्रशासन की ही नहीं है। गांव के प्रधान, पूर्व प्रधान, जनप्रतिनिधि और दोनों समाजों के जिम्मेदार लोगों को भी आगे आकर पहल करनी होगी। उन्हें लोगों के बीच बैठकर गलतफहमियां दूर करने और आपसी विवाद को बढ़ने से रोकने का प्रयास करना होगा।
एक पक्ष के समर्थन में खड़े होने के बजाय दोनों पक्षों को शांत कराने की पहल ही गांव में भरोसा बहाल कर सकती है। पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर होने वाली पहल ही बदनौली में लंबे समय से बने तनाव को खत्म करने में मददगार साबित होगी।
पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी है। दोषियों को पहचान करके कार्रवाई की जा रही है। पर्दे के पीछे रहकर जो आग को हवा दे रहे हैं, हमारी उन पर भी नजर है। हम गांव के जिम्मेदार लोगों को साथ लेकर हालात सामान्य करा रहे हैं। हम हालात सौहार्दपूर्ण बनाने को प्रयासरत हैं। - विनीत भटनागर, अपर पुलिस अधीक्षक
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