हापुड़ में गन्ने पर गहराया संकट, सिंभावली और ब्रजनाथपुर के 136 क्रय केंद्र छिने; 140 करोड़ का बकाया भी अटका
हापुड़ की सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों के 136 क्रय केंद्र दूसरे जिलों को आवंटित होने से किसानों में बेचैनी है।

HighLights
सिंभावली, ब्रजनाथपुर चीनी मिलों के 136 क्रय केंद्र अन्यत्र आवंटित।
किसानों का 140 करोड़ रुपये गन्ना बकाया भुगतान लंबित।
पेराई सत्र देरी से हजारों किसान गन्ने की बिक्री को लेकर परेशान।
संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर। हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर की दोनों सिंभावली एवं ब्रजनाथपुर चीनी मिलों के 136 क्रय केंद्र दूसरे जनपद की मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। जबकि चीनी मिलों के सात किलोमीटर के दायरे में आने वाले किसानों का गन्ना सिंभावली एवं ब्रजनाथपुर चीनी मिलों को देने का निर्णय लिया गया है।
पहली बार चीनी मिलों के पेराई सत्र शुरू होने में संशय बन रहा है। ऐसे में मिल गेट से जुड़े किसानों एवं पुराने भुगतान को लेकर किसानों के बीच बेचैनी पसर गई है।
140 करोड़ रुपये बकाया
सिंभावली एवं ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर किसानों का पिछले पेराई सत्र का भी करीब 140 करोड़ रुपये के बकाया पड़ा हुआ है। वहीं इस वर्ष दोनों चीनी मिलों के 136 क्रय केंद्र दूसरे जनपद में स्थापित चीनी मिलों काे आवंटित कर दिए गए हैं।
अब सिंभावली के पास छह क्रय केंद्र तो ब्रजनाथपुर के पास चार क्रय केंद्र रह गए है। नवंबर का प्रथम सप्ताह समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन अभी तक दोनों चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही है।
ऐसे में सिंभावली एवं ब्रजनाथपुर को आवंटित किए गए दस क्रय केंद्र से जुड़े हजारों किसानों में बेचैनी पसर गई है। वह मिल नहीं चलने की स्थिति में अपनी गन्ने की फसल बेचने अथवा पुराने भुगतान को लेकर काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं।
क्या बोले किसान?
शासन को या तो सभी क्रय केंद्रों को दूसरी चीनी मिलों से जोड़ देना चाहिए अथवा दाेनों मिलों को चलाने की क्षमता के अनुसार गन्ना आवंटित करना चाहिए। दोहरे बर्ताव के कारण मिल गेट से जुड़े किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। हमारा गन्ना खेतों में खड़ा है, गेहूं की बोआई किस समय करेंगे।
- हबीब सरवर, वैठ
शासन को दोनों चीनी मिलों का पेराई सत्र तुरंत शुरू कराना चाहिए। वहीं पुराने गन्ना भुगतान को कराया जाना चाहिए। दूसरी मिलों को क्रय केंद्र आवंटित करने के बाद हजारों किसानों का पिछले वर्ष का गन्ना भुगतान अटक गया है तो वहीं फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है। सही नीति अपनाकर किसानों के हित में प्रशासन कार्य करे।
- विजय शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू भानु
मिलों को क्षमता के अनुसार गन्ना दिलाने के लिए हम शासन के सामने अपनी बात रख रहे हैं। वहीं मिलों को चलाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों की समस्या को हल करना हमारी प्राथमिकता में हैं।
- करन सिंह, सीजीएम सिंभावली चीनी मिल
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