7.40 करोड़ की सात राज्यों में साइबर ठगी का पर्दाफाश, फर्जी खाते खुलवाकर बड़ा गोलमाल; हाथरस में चार गिरफ्तार
साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देकर देशभर में ठगी की रकम खपाने वाले म्यूल अकाउंट गैंग का पर्दाफाश किया है। हाथरस में ग ...और पढ़ें

हाथरस में पकड़े गए साइबर गैंग के बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी।
जागरण संवाददाता, हाथरस। ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देकर देशभर में साइबर ठगी की रकम खपाने वाले म्यूल अकाउंट गैंग का साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि फर्जी फर्म के नाम से खोले गए एक बैंक खाते के जरिए सात राज्यों में हुई 7.40 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को ठिकाने लगाया गया।
पुलिस ने गैंग के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सभी आरोपित जिले के ही रहने वाले हैं। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।
गिरफ्तार आरोपितों में म्यूल अकाउंट धारक हसायन क्षेत्र के गांव छीतीपुर निवासी सत्यवीर सिंह, गैंग का मास्टरमाइंड सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव पोरा निवासी मनीष गौतम, खाते में मोबाइल नंबर संचालित करने वाला पोरा गांव निवासी अर्जुन सिंह और फर्जी ई-मेल आइडी बनाने वाला सिकंदराराऊ के इटरनी गढ़ोला निवासी आकाश कुमार शामिल हैं।
बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ई-मेल आइडी, जीएसटी पंजीकरण और डिजिटल ट्रांजेक्शन की परत-दर-परत जांच के बाद साइबर क्राइम टीम को इस गैंग का पता लगा। यह गैंग इंस्टाग्राम, फेसबुक और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से आनलाइन ट्रेडिंग का प्रचार-प्रसार कर लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देता था। इसके बाद लोगों से बैंक खाते खुलवाकर उन खातों को अपने उपयोग में लेता था।
विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम इन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इसकी शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम प्रभारी निरीक्षक आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व में साइबर टीम ने पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच शुरू की। इस दौरान सामने आया कि बैंक आफ महाराष्ट्र, हाथरस शाखा में जगदंबा एंटरप्राइजेज के नाम से खोला गया खाता म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
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इस खाते में तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना समेत सात राज्यों से साइबर ठगी की रकम पहुंची थी। सात अलग-अलग शिकायतों में कुल सात करोड़ 40 लाख 61 हजार 233 रुपये की साइबर ठगी सामने आई है। इसमें से 80 लाख 88 हजार 945 रुपये इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
अलग-अलग राज्यों से लगातार रकम आने के बाद पुलिस ने खाते को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू की और गिरोह तक पहुंच गई। गिरोह ने इटरनी गढ़ोला में जगदंबा एंटरप्राइजेज नाम से फर्जी फर्म बनाई थी। इसका पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद जीएसटी नंबर लिया गया।
इसी फर्म के नाम पर बैंक आफ महाराष्ट्र, हाथरस शाखा में सत्यवीर सिंह के नाम से करंट अकाउंट खुलवाया गया। खाता खुलवाने के लिए सत्यवीर को 20 हजार रुपये दिए गए थे। बाद में खाते की ट्रांजेक्शन लिमिट भी बढ़वा ली गई।
गिरोह ऐसे करता था काम
पुलिस पूछताछ में गैंग के मास्टरमाइंड मनीष गौतम ने बताया कि वह लोगों को बैंक खाते खुलवाने के बदले मोटी रकम देने का लालच देता था। खाते खुलवाने के बाद उन्हें दीपू पुंडीर और प्रदीप पुंडीर को उपलब्ध कराया जाता था। प्रत्येक चालू खाता खुलवाने पर मनीष को दो लाख रुपये मिलते थे। खाता खुलवाने के लिए दीपू पुंडीर ने मनीष को 50 हजार रुपये दिए थे।
इसके बाद सत्यवीर के नाम से खुलवाए गए खाते में दो मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराए गए। इनमें से एक नंबर शौकीन और दूसरा मनीष के भतीजे अर्जुन सिंह द्वारा संचालित किया जा रहा था। मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने के बदले अर्जुन को 20 हजार रुपये दिए गए थे।
ठगी के लिए फर्जी ई-मेल आईडी भी बनाई गई थी, जिसे आकाश कुमार ने अपने मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड किया था। इसके बदले उसे भी पैसे दिए गए थे। गैंग में शामिल प्रत्येक मोबाइल नंबर धारक को 20 हजार रुपये दिए जाते थे।
थाना साइबर क्राइम पुलिस ने आपरेशन वज्र के तहत इंटरनेट मीडिया पर आनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक संगठित गैंग का पर्दाफाश कर चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस इस मामले में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
चिरंजीव नाथ सिन्हा, एसपी