हाथरस में 400 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कें खस्ताहाल, अब नई परियोजनाओं को मिली हरी झंडी
हाथरस जिले में पिछले तीन सालों में 400 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें बदहाल हैं, जिससे लोगों को ...और पढ़ें

हाथरस में कुछ समय पहले बनाई गई सड़क का ये हाल है।
योगेश शर्मा, हाथरस। जिले में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों का हाल अभी भी बदहाल है। बदहाल सड़कों से होकर लोगों का निकलना दूभर हो गया है। तमाम वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों को चोटें तक आ गई हैं। लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव हर बार मतदान के बहिष्कार की वजह टूटी सड़कें बनीं।
ऐसे में अब सरकार ने सड़कों पर ध्यान देना भले ही शुरू कर दिया हो मगर हाल फिर भी बदहाल है। पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कुछ और सड़कों को बनाए जाने को शासन ने हरी झंडी दे दी है।
पिछले तीन साल में जिले में पीडब्ल्यूडी, मंडी और पीएमजीएसवाई के माध्यम से करीब 400 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण कराया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों की सड़कें बनीं। सादाबाद, सिकंदराराऊ और हाथरस सदर में 100-100 करोड़ से ज्यादा की सड़कें बनाई गईं। लेकिन इसके बावजूद दर्जनों सड़कें आज भी टूटी पड़ी हैं।
लोकसभा चुनाव में मुरसान और सासनी के अलावा सिकंदराराऊ के गांवों में लोगों ने टूटी सड़कों को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। तब प्रशासन ने मौके पर जाकर आश्वासन दिया था कि सड़कें बनाई जाएंगी। लेकिन एक साल बाद भी कई सड़कें नहीं बनीं।
जागरण की टीम ने जब जिले की सड़कों की पड़ताल की कस्बा मुरसान के जवाहर रोड पर गहरे गड्ढों की बदहाल स्थिति है। इन सड़कों पर 2-2 फीट के गड्ढे हो गए हैं। बारिश में ये गड्ढे तालाब बन जाते हैं। रोजाना हादसे हो रहे हैं। इसी तरह से सहपऊ से सादाबाद जलेसर मार्ग का लिंक मार्ग बदहाल है। टूटी सड़कों से होकर निकलना मुश्किल हो गया है।
हसायन के सलेमपुर सिकतरा मार्ग का हाल किसी से छिपा नहीं है। यहां से होकर गुजरने वाले बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों को परेशानी हो रही है। कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
ऐसे में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शासन ने कुछ और सड़कों को बनाए जाने को हरी झंडी दे दी है। लगातार प्रस्ताव के बाद कुछ प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। इनमें हसायन से सलेमपुर सिकतरा मार्ग पर सलेमपुर रेलवे फाटक के पास निकलते ही एक काफी गड्ढा हो गया है।
जिसे काफी समय से ठीक नहीं किया गया उक्त रोड पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आता है ।इसमें हर वाहन चालक को बरसात के कारण इस गड्ढे में पानी भर जाने के बावजूद भी इसमें निकलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यहां से गांव सीधामई में टोड़ सिकतरा आदि गांव के बच्चे ठुलई बलवंत सिंह आदि स्कूलों में अध्ययन के लिए जाते हैं।
इन मार्गों को मिली हरी झंडी
सादाबाद में नगला नंदू से लार्ड कृष्णा मार्ग लागत 102 लाख, लढ़ौता से मोहरिया मार्ग लागत 326 लाख, सादाबाद में एदलपुर से झगरार मार्ग लागत 280 लाख रुपये, सिकंदराराऊ में नगला कलू से गोला माता मठ तक 157 लाख रुपये, झींगुरा से ककौड़ी मार्ग 151 लाख रुपये, हाथरस में शहजादपुर से पैकवाड़ा मार्ग 151 लाख से बनेगी।
सहपऊ में खोंडा से परसौरा मार्ग 193 लाख रुपये, सिकंदराराऊ में कचौरा से गिरधरपुर मार्ग 131 लाख, रतिभानपुर से भैंकरी मार्ग 105 लाख, पीबी मार्ग से गारबगढ़ी मार्ग 161 लाख, सिकंदराराऊ में खरबा से चिंता बदनपुर मार्ग 139 लाख रुपये, सिकंदराराऊ में झींगुरा से हसनपुर बारू मार्ग 184 लाख रुपये से स्वीकृति मिली है।
बरामई से ऊंचागांव गार्ग से कुरसंडा रजवाह तक 299 लाख, हाथरस जलेसर रोड इमलिया चौराहा से कुमरई मार्ग 168 लाख रुपये की लागत से बनेगा।
