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वाराणसी जेल में पहुंचा रिहाई का फर्जी आदेश, साइबर ठगी का बदमाश निकल आया बाहर; पुलिस में मचा अब हड़कंप

By Mohan Agrwal Edited By: Prateek Gupta
Published: Tue, 07 Jul 2026 10:48 PM (IST)

साइबर ठगी के आरोपी सुनील कुमार को वाराणसी जेल से फर्जी रिहाई आदेश के आधार पर छोड़ दिया गया, जिससे ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. वाराणसी जेल से सुनील कुमार की रिहाई संदिग्ध पाई गई।

  2. फर्जी दस्तावेजों की जांच के लिए FIR दर्ज होगी।

संवाद सूत्र, सादाबाद (हाथरस)। साइबर ठगी के एक आरोपी की रिहाई अब खुद पुलिस जांच का विषय बन गई है। मामला वाराणसी जिला कारागार का है, जहां हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के रहने वाले सुनील कुमार उर्फ सुनील चौधरी को मार्च 2025 में जेल से रिहा कर दिया गया।

बाद में जब कागजात खंगाले गए तो पता चला कि जिस रेडियोग्राम और रिहाई आदेश के आधार पर बंदी को छोड़ा गया था, उसकी पूरी कहानी ही संदिग्ध निकली। जेल प्रशासन के मुताबिक सुनील कुमार साइबर क्राइम थाना वाराणसी के मुकदमे में 24 फरवरी 2024 से जिला कारागार में बंद था।

इस बीच साइबर क्राइम थाना अलीगढ़ के एक अन्य मुकदमे में भी उसके खिलाफ बी-वारंट और अभिरक्षा वारंट जेल पहुंचा था। 25 फरवरी 2025 को अलीगढ़ न्यायालय के नाम से एक रिहाई कन्फर्मेशन (रेडियोग्राम) और बाद में 4 मार्च को रिहाई आदेश जेल प्रशासन को मिला। इसके आधार पर वाराणसी के मुकदमे में भी औपचारिकताएं पूरी कर 7 मार्च 2025 को आरोपी को जेल से रिहा कर दिया गया।

लेकिन यहीं से कहानी पलट गई। बाद में जब जेल प्रशासन ने पूरे मामले का सत्यापन कराया तो संयुक्त निदेशक अभियोजन, अलीगढ़ ने साफ बताया कि संबंधित न्यायालय की फाइल में न कोई जमानत आदेश मिला और न ही जमानत बंधपत्र।

उधर पुलिस लाइन वाराणसी के सहायक रेडियो अधिकारी ने भी लिखित रूप से बताया कि जिस रेडियोग्राम के आधार पर रिहाई हुई, वह न तो पुलिस रेडियो शाखा से जारी हुआ था और न ही रेडियो मेल या पोलनेट सिस्टम पर प्राप्त हुआ। यानी जिस दस्तावेज के भरोसे आरोपी जेल से बाहर आया, वही दस्तावेज फर्जी होने की आशंका में घिर गया।

अब जिला कारागार, वाराणसी के अधीक्षक ने थाना लालपुर-पांडेयपुर को तहरीर भेजकर सुनील कुमार उर्फ सुनील चौधरी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने की मांग की है। मामला इस बात की पड़ताल का है कि आखिर फर्जी रिहाई आदेश और रेडियोग्राम किसने तैयार किया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

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