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मिलावटी दूध से सेहत को खतरा: कहीं आप तो नहीं खा रहे घटिया तेल, मिल्क पाउडर से बना चमकदार खोया?

Published: Fri, 21 Aug 2026 03:54 PM (IST)

रक्षाबंधन पर्व पर जालौन में मिठाई की बढ़ती मांग के कारण मिलावटी खोवे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।

नकली खोया का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

नकली खोया का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

HighLights

  1. रक्षाबंधन पर जालौन में मिलावटी खोवे का कारोबार चरम पर।

  2. नकली खोवा घटिया तेल, मिल्क पाउडर और रसायनों से बनता है।

  3. मिलावटी खोवा पेट, लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचाता है।

जागरण संवाददाता, जालौन। रक्षा बंधन पर्व पर आम दिनों के सापेक्ष कई गुना अधिक मिठाई की बिक्री होती है। दुकानदार के अनुसार रक्षाबंधन पर जिले में पचास क्विंटल से अधिक मिष्ठान बिक्री हो जाता है। ऐसे में बिना मिलावट के इसकी पूर्ति कर पाना संभव नहीं है।

बाजार में बिकने वाला हर खोवा मिलावटी नहीं है लेकिन उत्पादन और खपत का अंतर देख कर आशंका करना सही है। इसलिए बाजार में खोवा खरीदते समय ध्यान रखें कि कहीं चमकदार दिखने वाला खोवा घटिया तेल और मिल्क पाउडर से तैयार तो नहीं किया गया है।

मिलावट का कारोबार रक्षाबंधन को लेकर तेजी के साथ हो रहा है। उरई, जोल्हूपुर, कालपी क्षेत्र में भट्ठियां धधकने लगी हैं और रातोरात मिलावटी खोवा तैयार करके जिले के अलग-अलग क्षेत्र व बाहर सप्लाई की किया जा रहा है।

उरई शहर के राजेंद्र नगर, बजरिया, कालपी स्टैंड के आसपास मिलावटी खोवा का कारोबार तेजी के साथ हो रहा है। कालपी नगर में कई जगह मिलावटी खोवा तैयार होने लगा है। जोल्हूपुर से महेवा जाने वाले मार्ग पर भट्ठियों में खोवा तैयार हो रहा है। बंधौली में भी मिलावटी खोवा रात दिन तैयार हो रहा है।

यहां से तैयार माल दुकानों के साथ मुख्यालय व क्षेत्र में सप्लाई अलग-अलग आर्डर के अनुसार भेजा जा रहा है। रक्षाबंधन पर दुकानों में मिठाई तैयार करने का काम अभी से प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में यह मिलावटी खोवा की डिमांड भी बढ़ गई है।

अंदाजा लगा सकते हैं कि अकेले उरई में छोटी-बड़ी मिठाई की डेढ़ सौ दुकानें संचालित हैं। रक्षाबंधन पर दो से तीन दिन में पचास क्विंटल से अधिक मिठाई बिक जाने का अनुमान है। जबकि जिले में दूध प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख लीटर ही उत्पादित होता है। उसमें भी आम जनता में तीन लाख लीटर से अधिक की प्रतिदिन खपत है। ऐसे में खोवा कहां से तैयार हो सकता है।

इस तरह तैयार करते नकली खोवा

मिलावटी या नकली खोया मुख्य रूप से दूध की मलाई निकालकर उसमें घटिया वनस्पति फैट, स्टार्च, डिटर्जेंट और सिंथेटिक रसायनों को मिलाकर तैयार किया जाता है। एक दुकानदार के अनुसार इसे बनाने के लिए सिंथेटिक दूध का उपयोग, यूरिया, डिटर्जेंट, शैंपू, और घटिया आयल को पानी में मिलाकर गाढ़ा कृत्रिम दूध बनाया जाता है।

खोए का वजन और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए इसमें भारी मात्रा में मैदा, उबले आलू, शकरकंद या स्टार्च पाउडर भी मिलाया जाता है। दूध का असली फैट (क्रीम) निकालकर उसकी जगह सस्ता वनस्पति घी मिलाया जाता है। इससे खोवा चमकदार हो जाता है।

इंसेट: इस तरह से मिलावट की कर सकते पहचान

थोड़ा सा खोवा लेकर अंगुलियों के बीच मसलें या हथेली पर रखकर उसकी छोटी गोली बनाएं। असली खोवा मसलने पर घी छोड़ता है और उससे प्राकृतिक घी की खुशबू आती है। हथेली पर बनाई गई गोली फटने या उसमें दरारें पड़ने लगे, तो वह नकली या मिलावटी हो सकता है।

आयोडीन टेस्ट (स्टार्च की मिलावट के लिए) थोड़े से खोवे को गर्म पानी में घोलकर ठंडा करें। इसके बाद इसमें आयोडीन साल्यूशन या टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। यदि इसका रंग नीला हो जाए, तो समझें कि उसमें स्टार्च (मैदा, अरारोट या सिंघाड़े का आटा) की मिलावट है।

असली खोवा खाने पर मुंह में नहीं चिपकता और आसानी से घुल जाता है, जबकि नकली या मिलावटी खोवा मुंह में चिपक जाता है और उसका स्वाद कसैला या कड़वा लग सकता है।चीनी के साथ गर्म करके जांच सकते हैं। थोड़े से खोवे में चीनी मिलाकर उसे गर्म करें। यदि वह गर्म होने पर घी के बजाय पानी छोड़ने लगे, तो वह नकली है।

  • खाने पीने की चीजों में मिलावट करने वालों को जब तक कड़ी सजा नहीं मिलेगी तब तक इस पर रोक नहीं लग सकती है। - जय प्रकाश सिंह जादौन, मुशमरिया।
  • जांच करने वाली टीमों के ओर से केवल खानापूर्ति की जाती है, नमूना भी इसी तरह से लेकर काम चला लिया जाता है। - अग्रिम पांडेय, पुरानी कालपी चुंगी नया पटेल नगर उरई।

सेहत पर पड़ता असर

डॉ. प्रशांत निरंजन कहते हैं कि मिलावटी खोवा या दूध के सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। पेट दर्द, अपच, गैस, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बासी या खराब खोवे से गंभीर फूड प्वाइजनिंग का खतरा रहता है।

खोवे में यूरिया, डिटर्जेंट या हानिकारक रसायन मिलने से लिवर और किडनी को भारी नुकसान पहुंचता है। इसमें मिले जहरीले रंग और केमिकल लंबे समय तक खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

त्योहार को देखते हुए टीमों का गठन कर खाद्य पदार्थों की जांच व नमूना लिया जा रहा है, हर तहसील क्षेत्र में टीमें लगी हुई हैं।

चेतराम प्रजापति जिला अभिहित अधिकारी।