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    सांप का जहर और जान बचाने को डॉक्टरों की जिद...उरई में अनोखा मामला, 19 साल के युवक को 30 एंटी स्नेक वेनम देकर बचाई जान

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 06:20 PM (GMT+05:30)

    राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई के डॉक्टरों ने 19 वर्षीय युवक सचिन को 30 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन देकर न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश से बचाया। यह बुंदेलखंड में 30 एएस ...और पढ़ें

    मरीज का इलाज करती डाक्टरों की टीम। जागरण

    मरीज का इलाज करती डाक्टरों की टीम। जागरण

    HighLights

    1. उरई मेडिकल कॉलेज ने 19 वर्षीय युवक की जान बचाई

    2. न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश के लिए 30 एएसवी इंजेक्शन दिए गए

    3. बुंदेलखंड में यह पहला सफल उपचार का मामला

    जागरण संवाददाता, उरई। यूपी में डाक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक अद्भुत सफलता हासिल की। डाक्टरों की जिद के आगे सांप का जहर भी फीका पड़ गया। डाक्टरों ने युवक को मौत के मुंह से बचा लिया। उसे एक के बाद एक 30 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन देकर नया जीवन दिया है। मामला उरई के राजकीय मेडिकल कालेज का है।

    राजकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने न्यूरोटाक्सिक सर्पदंश से गंभीर रूप से पीड़ित 19 वर्षीय युवक की जान बचाकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। चिकित्सकों ने युवक को समय रहते 30 एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन देकर उपचार किया, जिसके बाद उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। मेडिकल कालेज के अनुसार बुंदेलखंड क्षेत्र में 30 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन देकर सफल उपचार का यह पहला मामला है।

    Snake Bite

    चार जुलाई को गंभीर हालत में हुए थी भर्ती

    कालपी निवासी 19 वर्षीय सचिन को सर्पदंश के कारण चार जुलाई की सुबह लगभग पांच बजे गंभीर अवस्था में मेडिकल कालेज के आकस्मिक विभाग में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसे न्यूरोटाक्सिक सांप ने डसा था, जिससे उसे सांस लेने और आंखें खोलने में कठिनाई हो रही थी। स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर आकस्मिक विभाग की टीम ने तत्काल मरीज को इंट्यूबेट कर आइसीयू में शिफ्ट किया और चरणबद्ध तरीके से 30 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाए।

    तीन दिन से लगातार चल रहा इलाज

    उपचार के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. महेंद्र सिंह ने स्वयं आइसीयू पहुंचकर मरीज की स्थिति की जानकारी ली और चिकित्सकों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। लगातार उपचार के बाद मरीज की हालत सामान्य होने पर सात जुलाई को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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    टीम को बधाई

    मरीज के उपचार में मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. प्रेम सिंह के नेतृत्व में डा. जीतम सिंह राजपूत, डा. गौरव गुप्ता, डा. कुलदीप, डा. पायल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. महेंद्र सिंह एवं चिकित्सा अधीक्षक डा. प्रशांत निरंजन ने सफल उपचार करने वाली टीम को बधाई देते हुए उनके कार्य की सराहना की और कहा कि समय पर उपचार एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल से गंभीर सर्पदंश के मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

     

    यह होता न्यूरोटाक्सिक सर्पदंश

    न्यूरोटाक्सिक सर्पदंश वह स्थिति है, जब ऐसे विषैले सांप के काटने से शरीर में न्यूरोटाक्सिन (तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाला विष) फैल जाता है। यह विष मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच संदेश पहुंचाने वाली नसों को प्रभावित करता है, जिससे शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यहां कोबरा और करैत प्रजाति के सर्प के डसने से यह स्थिति बनती है।

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