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    जौनपुर में झोलाछापों के बोर्ड पर सजी हैं विदेशी डिग्रियां, खुद नहीं जानते डिग्री का अर्थ

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 03:03 PM (GMT+05:30)

    जौनपुर में झोलाछाप डॉक्टर अजीबोगरीब और फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल कर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं, जिनमें से कई का अर्थ उन्हें खुद नहीं पता। जिला प्रश ...और पढ़ें

    झोलाछापों के बोर्ड पर सजीं विदेशी डिग्रियां।

    झोलाछापों के बोर्ड पर सजीं विदेशी डिग्रियां।

    HighLights

    1. झोलाछाप डॉक्टर अजीबोगरीब और फर्जी डिग्रियों का उपयोग कर रहे।

    2. कई डॉक्टरों को अपनी बोर्ड पर लिखी डिग्री का अर्थ नहीं पता।

    3. जिला प्रशासन अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है।

    जागरण संवाददाता, जौनपुर। शहर से लेकर गांवों की गलियों तक में अपनी दुकान सजाए बैठे झोलाछाप की डिग्रियां भी बड़ी अजूबी हैं। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध खेल में मरीजों को गुमराह करने के लिए थोक के भाव मिलने वाली डिग्रियों का सहारा लिया जा रहा है।

    हैरान करने वाली बात यह है कि तमाम नीम-हकीमों को खुद अपनी बोर्ड पर लिखी डिग्रियों का सही अर्थ तक नहीं पता है, लेकिन वे अपने नाम के आगे फिजिशियन, सर्जन और विशेषज्ञ लिखना नहीं भूलते।

    तहकीकात में सामने आया कि जिले में आरएमपी तथा पीएमपी जैसी डिग्रियों का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है। इन डिग्रियों का अर्थ भी ये कथित डाक्टर अपनी सुविधानुसार अलग-अलग बताते हैं। कोई आरएमपी का अर्थ 'रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर' बताता है, तो कोई 'रुरल मेडिकल प्रैक्टिशनर'। कुछ तो इसे 'प्रैक्टिकल मेडिकल प्रैक्टिशनर' यानी व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर इलाज करने वाला बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

    इसके अलावा, कोलकाता के किसी संस्थान से जारी एमबीबीएस (एएम) यानी अल्टरनेटिव मेडिसिन की डिग्री लिखकर मरीजों को जाल में फंसाया जा रहा है, जबकि भारतीय चिकित्सा परिषद में ऐसी किसी डिग्री का कोई वजूद ही नहीं है।

    फर्जी बोर्ड लगाकर धड़ल्ले से हो रहे ऑपरेशन

    विडंबना यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के इर्द-गिर्द और लबे रोड स्थित कई नर्सिंग होम में डाक्टरों ने अपने नाम के आगे डीएम, एएससीएमई और एएपीएमई जैसी फर्जी डिग्रियां लगा रखी हैं। जब भी कार्रवाई की बात आती है, तो ये नीम-हकीम अपनी कमियों को छिपाने के लिए सरकारी नीतियों को ही दोषी ठहराने लगते हैं।

    जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी तहसीलों में टीम गठित कर अभियान चलाया जा रहा है। बिना डिग्री वाले लोगों को नोटिस देने के साथ ही अवैध क्लीनिक व अस्पतालों को बंद कराया जा रहा है। कई लोगों के विरुद्ध मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया है। -डॉ. प्रभात कुमार, प्रभारी सीएमओ।

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