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केराकत विधायक का र‍िपोर्ट कार्ड : छोटे-छोटे काम हुए पूरे, बड़े सपने रह गए अधूरे

By Amardeep Srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 05 Sep 2026 06:12 PM (IST)

केराकत विधायक तूफानी सरोज के कार्यकाल में सड़क, बिजली और सोलर लाइट जैसे छोटे विकास कार्य हुए, लेकिन क्षेत्र को ...और पढ़ें

केराकत विधायक का रिपोर्ट कार्ड: छोटे काम हुए, बड़े सपने अधूरे रहे।

केराकत विधायक का रिपोर्ट कार्ड: छोटे काम हुए, बड़े सपने अधूरे रहे।

जागरण संवाददाता, जौनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अंतिम दौर में है। ऐसे में विधायकों के इन पांच वर्षों के कामकाज का आकलन भी शुरू हो गया है। केराकत विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक तूफानी सरोज के कार्यकाल में सड़क, बिजली और सोलर लाइट जैसे कुछ विकास कार्य जरूर हुए, लेकिन क्षेत्र को कोई ऐसी बड़ी परियोजना नहीं मिल सकी, जो विधानसभा की पहचान बन सकती।

विधानसभा क्षेत्र के कई हिस्सों में जर्जर विद्युत खंभे और तार बदले गए, जिससे बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ। लगभग सभी बूथों पर सोलर लाइट लगाने का कार्य कराया गया। आंबेडकर प्रतिमाओं के पास सोलर लाइटें स्थापित कराई गईं। विधायक निधि व अन्य मदों से करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से कई संपर्क मार्गों का निर्माण भी कराया गया, लेकिन पांच वर्षों के इस कार्यकाल में क्षेत्र को कोई बड़ी सरकारी परियोजना नहीं मिली।

न कोई नया औद्योगिक उपक्रम आया, न बड़ा अस्पताल, न उच्च शिक्षा संस्थान और न ही ऐसा विकास कार्य जिससे लंबे समय तक क्षेत्र की पहचान बन सके। रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं अब भी अधूरी हैं। इस सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में केराकत रेलवे स्टेशन पर कुछ प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के लिए बनी संघर्ष समिति के कई बार प्रदर्शन के बावजूद कुछ खास हासिल नहीं हुआ, जबकि पक्ष-विपक्ष ने भरोसा देने में कोई कोताही नहीं की थी।

वाराणसी व जौनपुर मुख्यालय के लिए रोडवेज बस सेवा की सुविधा का ढिंढोरा तो खूब पीटा गया, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात वाला ही रहा। एक समय था जब वाराणसी से केराकत के लिए 15 बसें चलती थीं। इनकी संख्या आज महज तीन रह गई है। आइटीआई कालेज का सपना भी अब तक पूरा नहीं हो सका, जिससे युवाओं में मायूसी है।

सरोजबड़ेवर गांव में आजतक गोमती नदी को पार करने के लिए लोग पीपा पुल के सहारे हैं। बरसात के दिनों में पीपा पुल को हटा दिए जाने से तकरीबन 25 गांवों का संपर्क कट जाता है। यहां नए पुल के निर्माण को लेकर दावे तो बहुत किए गए, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। इसका भी यहां की जनता को मलाल है। कुल मिलाकर कहा जाए कि विकास के नाम पर सड़क, पुलिया, नाली, सोलर लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याओं के मकड़जाल में उलझकर यह पूरा कार्यकाल बीत गया।

बोले व‍िधायक
सीमित संसाधनों के बावजूद आवश्यक विकास कार्य कराए जाने के भरपूर प्रयास किए गए। सड़क, बिजली और शिक्षा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई। केराकत नगर में जर्जर विद्युत खंभों और तारों को बदलवाकर विद्युत व्यवस्था में सुधार कराया गया। विधायक निधि और पूर्वांचल विकास निधि का अधिकतम उपयोग कर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास किया गया। विकास कार्यों के साथ जनता के मान सम्मान की रक्षा के लिए सतत प्रयास किया।

लोगों के सुख-दुःख में भागीदारी के अपने उत्तर दायित्व का ईमानदारी से प्रयास करने के कारण आत्मसंतुष्टि भी है। विधानसभा में अब प्रश्न पूछने के लिए लाटरी प्रणाली लागू है। कई बार प्रश्न लगाने के बावजूद अवसर नहीं मिल पाता और हंगामे के कारण भी अनेक मुद्दे चर्चा तक नहीं पहुंच पाते। बावजूद इसके उपलब्ध अवसरों पर क्षेत्र की समस्याएं उठाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। विकास कार्यों को बिना भेदभाव किया गया। - तूफानी सरोज, विधायक, केराकत विधानसभा क्षेत्र, सपा।

बोले रनरअप

पिछले पांच वर्षों में केराकत विकास के मामले में पिछड़ा नजर आ रहा है। क्षेत्र में एक भी बड़ी परियोजना नहीं आई। विकास के नाम पर केवल दावे किए गए। सड़क, जलनिकासी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस हैं। लाइट लगवाए जाने में भी पक्षपात किया गया। पांच वर्षों में कुछ छोटे और स्थानीय विकास कार्य जरूर हुए, लेकिन इससे विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदल सकी। अब यह फैसला जनता को करना है कि वह इन उपलब्धियों को पर्याप्त मानती है या अधूरे विकास का हिसाब मांगती है। - दिनेश चौधरी, रनरअप-2022-भाजपा।

बोली जनता

सिंचाई और ग्रामीण विकास के लिए अभी और काम की जरूरत है। केराकत विधानसभा क्षेत्र विकास के पैरामीटर पर अभी बहुत पीछे है। आधुनिक युग में भी यहां बुनियादी समस्याएं हैं। नहरों में समय से पानी न आने से किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। - अनिल सिंह, किसान, डेडुवाना।

विधानसभा के इस कार्यकाल में शिक्षा और सड़क व्यवस्था में तो सुधार हुआ है, लेकिन कुछ कमियां भी हैं। सरकारी आइटीआइ कालेज की कमी खल रही है। इन सब मुद्दों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है, जिससे युवाओं में कौशल क्षमता का विकास हो सके। - प्रमोद यादव, औरी, आरटीआई, एक्टिविस्ट।

यहां रोडवेज बसों का अभाव है, जिससे मजबूरी में निजी वाहनों से जाना पड़ता है। अभी तक यहां बस अड्डा भी नहीं बन सका, जिसकी जरूरत है। नागरिक सुविधाओं के अभाव का असर सीधे व्यापार पर पड़ता है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। कई वादे अधूरे रह गए।-  बितेश गुप्ता, व्यापारी, गोलावार्ड।

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नहीं बढ़ने से पलायन बढ़ा है। जिस संजीदगी से इसपर काम किया जाना था उतना नहीं हो सका। पीपा पुल के स्थान पर नया पुल बनाने का वादा भी पूरा नहीं किया जा सका। यह यहां की प्रमुख जरूरतों में एक है।
- सूरज यादव, समाजसेवी, सिहौली।

केराकत व‍िधानसभा

384,174 विधानसभा में कुल मतदाता

206,161 पुरुष मतदाता

178,013 महिला मतदाता