नौ साल की उम्र में 10वीं पास, 14 वर्षों बाद यूपी बोर्ड ने सुधारी जन्मतिथि, हाईकोर्ट की पहल पर हुई कार्रवाई
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यूपी बोर्ड ने 14 साल बाद एक छात्र की अंकपत्र में दर्ज गलत जन्मतिथि को सुधारा। अब छात्र मनीष कुमार सिंह को स ...और पढ़ें

यूपी बोर्ड ने 14 साल बाद सुधारी छात्र की जन्मतिथि, हाईकोर्ट के कड़े रुख का असर!
HighLights
14 साल बाद यूपी बोर्ड ने सुधारी छात्र की जन्मतिथि।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से मिला छात्र को न्याय।
लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत दर्ज हुई थी जन्मतिथि।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की एक छोटी सी लिपिकीय चूक ने जिस संघर्ष की शुरुआत की थी, 14 वर्षों की प्रशासनिक अड़चनों को पार कर आखिरकार वह पीड़ित छात्र की जीत के साथ समाप्त हुआ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद बोर्ड प्रशासन ने छात्र की अंकपत्र में दर्ज त्रुटिपूर्ण जन्मतिथि को दुरुस्त कर उसे नई और अपडेटेड मार्कशीट सौंप दी है।
पूरा मामला जौनपुर के गद्दोपुर स्थित दुर्ग देव जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। वर्ष 2008 में संस्थागत छात्र के रूप में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले मनीष कुमार सिंह के प्रमाणपत्र-सह-अंकपत्र पर बोर्ड की लापरवाही से जन्मतिथि 21 मई 1999 दर्ज हो गई थी।
इस गणित के हिसाब से मनीष ने महज नौ साल की उम्र में हाईस्कूल पास कर लिया था, जबकि स्कूल के वास्तविक अभिलेखों के अनुसार उनकी सही जन्मतिथि 21 मई 1993 (परीक्षा के समय लगभग 15 वर्ष) थी। नियमानुसार त्रुटि सुधार के लिए तीन वर्ष के भीतर आवेदन करना था। छात्र द्वारा वर्ष 2012 में अर्जी देने पर यूपी बोर्ड ने समयसीमा बीत जाने का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया।
प्रकरण को कालातीत मान लिया गया। दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब मनीष ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सात मई 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तरदायी अधिकारी का व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया।
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अदालत ने सवाल किया कि आखिर नौ साल के बच्चे को 10वीं का प्रमाणपत्र कैसे जारी कर दिया गया और मूल अभिलेखों की जांच कर सही स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। कोर्ट के सख्त आदेश पर क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के उप सचिव ने पांच जून 2026 को जौनपुर के संबंधित विद्यालयों-दुर्ग देव जनता इंटर कालेज, बाबा फक्कड़ दास पूर्व माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय कल्याणपुर की स्थलीय जांच की।
कक्षा आठ की टीसी और अन्य साक्ष्यों के अवलोकन में छात्र की वास्तविक जन्मतिथि 21 मई 1993 ही पाई गई। अपर सचिव भास्कर मिश्र ने त्रुटि सुधार को न्यायसंगत माना और जांच आख्या के आधार पर पत्रावली परिषद मुख्यालय प्रयागराज भेजी गई। अंतिम मंजूरी मिलते ही छात्र मनीष कुमार सिंह को संशोधित जन्मतिथि (21 मई 1993) के साथ नई मार्कशीट व सह-प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इस तरह बोर्ड की एक लिपिकीय भूल को सुधारने के लिए चला 14 साल लंबा संघर्ष अब जाकर खत्म हुआ है।
प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा छात्रों की समस्याओं का समाधान
वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव भास्कर मिश्र कहते हैं कि जौनपुर के पुराने मामले में लिपकीय चूक को सुधार लिया गया है। प्रभावित छात्र को उसकी सही मार्कशीट जारी कर राहत प्रदान की है। यह प्रकरण तकनीकी रूप से कालातीत (समयसीमा बीत चुका) हो चुका था, इसके बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विशेष प्राथमिकता दी गई। बोर्ड प्रशासन ऐसे मामलों को बेहद संजीदगी से ले रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।