दीक्षा समारोह से एक दिन पहले राजभवन की सुरक्षा टीम ने संभाला मोर्चा, ट्रेन से आएंगी राज्यपाल
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिसके लिए राजभवन की सुरक्षा टीम ने परिसर का गहन निरीक्ष ...और पढ़ें

पूर्वांचल विश्वविद्यालय दीक्षा समारोह: राज्यपाल के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा।
HighLights
राजभवन सुरक्षा टीम ने विश्वविद्यालय परिसर का गहन निरीक्षण किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ट्रेन से जौनपुर पहुंचेंगी, ऊर्जा संरक्षण संदेश।
दीक्षा समारोह में मेहमानों की अधिक संख्या, बैठने की चुनौती।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 27 जुलाई को होने वाले 30वें दीक्षा समारोह को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।समारोह के रिहर्सल से एक दिन पहले ही राजभवन की सुरक्षा टीम विश्वविद्यालय परिसर पहुंच गई। टीम ने राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के प्रस्तावित कार्यक्रम और उनके पूरे आवागमन मार्ग का बारीकी से निरीक्षण किया।प्रशासनिक भवन से लेकर शैक्षणिक भवन, छात्रावास, विभिन्न स्टेडियम और आवासीय परिसर तक सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सभी स्थानों को देखा गया।
राजभवन की सुरक्षा टीम ने राज्यपाल के विश्वविद्यालय पहुंचने के संभावित स्थान से निरीक्षण की शुरुआत की। यहां से वीर बहादुर सिंह की प्रतिमा तक पहुंचने और माल्यार्पण करने के बाद गांधी वाटिका जाने के मार्ग को देखा गया। गांधी वाटिका से राज्यपाल शोभायात्रा में शामिल होंगी और इसके बाद दीक्षा समारोह स्थल पहुंचेंगी। इस पूरे रूट पर सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश और निकास के संभावित मार्ग तथा महत्वपूर्ण स्थानों का टीम ने बारीकी से जायजा लिया। राज्यपाल के कार्यक्रम में जिन-जिन स्थानों पर ठहराव या आवागमन होना है,वहां सुरक्षा की जरूरतों को भी चिह्नित किया गया।

चांसलर सूट और गेस्ट हाउस का भी लिया जायजा
राज्यपाल के ठहरने के लिए निर्धारित चांसलर सूट का भी टीम ने निरीक्षण किया। इसके अलावा कुलपति आवास और गेस्ट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था को भी परखा गया। इन स्थानों तक पहुंचने वाले रास्तों, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। राज्यपाल के आगमन से लेकर कार्यक्रम समाप्त होने तक उनके साथ रहने वाली सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन के दौरान सतर्कता बरतने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
दोनों कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था परखी
मुख्य दीक्षा समारोह महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में आयोजित होगा। वहीं, आंगनबाड़ी और विद्यार्थियों को किट वितरण का कार्यक्रम मेजर ध्यानचंद इंडोर स्टेडियम में प्रस्तावित है। सुरक्षा टीम ने दोनों कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया। इंडोर स्टेडियम के भीतर और आसपास की व्यवस्थाओं को भी देखा गया। कार्यक्रम में आने वाले लोगों के प्रवेश, निकास और राज्यपाल के आवागमन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया गया।
खबरें और भी
इसके साथ ही टीम ने विश्वविद्यालय के छात्रावास, कर्मचारियों के आवासीय परिसर और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का भी निरीक्षण किया। दीक्षा समारोह के दौरान राज्यपाल के हर पड़ाव और उनके आवागमन के प्रत्येक चरण में सुरक्षा की जरूरत वाले बिंदुओं को चिह्नित किया गया। राजभवन की टीम ने संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं पर चर्चा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

राज्यपाल के कार्यक्रम का प्रस्तावित क्रम
विश्वविद्यालय परिसर में आगमन
वीर बहादुर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण
गांधी वाटिका का भ्रमण
शोभायात्रा में सहभागिता
महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में दीक्षा समारोह
मेजर ध्यानचंद इंडोर स्टेडियम में प्रस्तावित कार्यक्रम
चांसलर सूट में जलपान एवं विश्राम
ऊर्जा संरक्षण का संदेश भी
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह में इस बार ऊर्जा संरक्षण का संदेश भी देखने को मिलेगा।27 जुलाई को आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के ट्रेन से जौनपुर पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।वह लखनऊ से बेगमपुरा एक्सप्रेस से जौनपुर सिटी स्टेशन पहुंचेंगी।इसके बाद सड़क मार्ग से विश्वविद्यालय परिसर जाएंगी।
राज्यपाल के आगमन को देखते हुए रेलवे स्टेशन से लेकर विश्वविद्यालय तक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।राज्यपाल के जौनपुर सिटी स्टेशन पहुंचने के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के साथ आरपीएफ व जीआरपी की सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। स्टेशन से विश्वविद्यालय तक जाने वाले मार्ग पर भी सुरक्षा का विशेष प्रबंध किया गया है। रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने की तैयारी की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था में कितने एडीएम,सीओ, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, इसका खाका भी तैयार कर लिया गया है।राज्यपाल के आवागमन को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। रास्ते में पड़ने वाले स्पीड ब्रेकर हटाए जा रहे हैं,जबकि सड़क के गड्ढों की पैचिंग कर उन्हें आवागमन के लिए सुगम बनाया जा रहा है। सड़क किनारे झाड़ू लगाने के साथ नालियों की सफाई और जगह-जगह जमा कूड़ा-कचरा हटाने का काम भी कराया जा रहा है।प्रशासन की कोशिश है कि स्टेशन से विश्वविद्यालय तक राज्यपाल के आवागमन के दौरान किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।
राजभवन के संपर्क में प्रशासन
राजभवन की टीम जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में है।जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. और पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह के स्तर से भी सुरक्षा तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है। जिले के खुफिया विभाग से भी कार्यक्रम को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है। राज्यपाल के स्टेशन से विश्वविद्यालय पहुंचने के दौरान मार्ग के दोनों ओर सुरक्षा व्यवस्था के साथ भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
खुफिया तंत्र भी पूरी तरह सक्रिय
दीक्षा समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। छात्र संगठनों सहित विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित विरोध या अप्रिय स्थिति की जानकारी पहले से मिल सके। प्रशासन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटा है।
स्टेशन से विश्वविद्यालय तक विशेष तैयारी
सड़क के गड्ढों की पैचिंग
स्पीड ब्रेकर हटाने की कार्रवाई
सड़क किनारे और नालियों की सफाई
कूड़ा-कचरा हटाने का अभियान
मार्ग पर पुलिस और यातायात व्यवस्था
आरपीएफ व जीआरपी की सुरक्षा
सीओ, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और पुलिसकर्मियों की तैनाती तय
खुफिया विभाग से लगातार लिया जा रहा फीडबैक
दीक्षा समारोह में 740 सीटों पर सैकड़ों मेहमान, बैठाने की चुनौती
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह में इस बार संगोष्ठी भवन में उपलब्ध सीटों के मुकाबले आमंत्रित लोगों की संख्या अधिक होने से बैठने की व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनने वाली है। करीब 740 लोगों के बैठने की क्षमता वाले सभागार में 339 उपाधिधारकों और 84 स्वर्ण पदक विजेताओं के साथ उनके अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद, विद्यापरिषद, परीक्षा समिति और अन्य समितियों के सदस्य, शिक्षक, अधिकारी तथा विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। ऐसे में सभागार के भीतर भीड़ का दबाव बढ़ने की पूरी संभावना है।
30वें दीक्षा समारोह में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे।मुख्य अतिथि को डीएससी की मानद उपाधि भी दी जानी है।समारोह में विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों के सदस्यों और शिक्षकों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को पहली बार इस स्तर पर आमंत्रित किए जाने से भी उपस्थिति बढ़ गई है।
एक विद्यार्थी के साथ यदि एक या दो अभिभावक भी पहुंचते हैं तो सभागार की क्षमता के मुकाबले संख्या काफी अधिक हो सकती है।समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्रियों के अलावा जिले के सांसद, एमएलसी, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में मंच के आसपास और सभागार के भीतर बैठने की व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतनी होगी। राज्यपाल की मौजूदगी के कारण प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित स्थानों की व्यवस्था के बाद अन्य आमंत्रित अतिथियों के लिए सीट तय करना प्रशासन के सामने अहम चुनौती होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन को सीमित क्षमता वाले संगोष्ठी भवन में उपाधिधारकों, स्वर्ण पदक विजेताओं, अभिभावकों, शिक्षकों, समिति सदस्यों और आमंत्रित अतिथियों के बीच संतुलन बनाना होगा। प्रवेश और निकास के लिए भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था करनी होगी, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। खासतौर पर राज्यपाल के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और बैठने की योजना में समन्वय जरूरी होगा।समारोह को गरिमापूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन को अंतिम समय तक अतिथियों की सूची और बैठने की क्षमता के बीच तालमेल बैठाना होगा।
पिछली खामियों से सबक, दीक्षा समारोह से पहले पूविवि ने बदली व्यवस्था
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह को लेकर इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए व्यवस्थाओं में व्यापक बदलाव किया है।समारोह के दौरान परिसर की छवि और व्यवस्था को लेकर किसी तरह की कमी न रह जाए, इसके लिए सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन पर पहले से ही विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुलपति प्रो. वंदना सिंह, कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, मुख्य प्रॉक्टर और चीफ वार्डन के स्तर से लगातार तैयारियों की निगरानी की जा रही है।
पिछले दीक्षा समारोह के दौरान कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने परिसर की कुछ व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी।इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह समाप्त होने के बाद से ही सुरक्षा और अनुशासन को लेकर सख्ती बरतनी शुरू कर दी थी। इस बार 30वें दीक्षा समारोह को देखते हुए पहले से ही सभी छात्रावासों के वार्डन और महिला छात्रावासों की वार्डन को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य प्रॉक्टर और प्रॉक्टोरियल टीम को भी परिसर में लगातार निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है।इस बार विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक भवनों के साथ छात्रावासों की भी रंगाई-पुताई कराई गई है। भवनों के आगे और पीछे के हिस्से में साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया गया है। परिसर में जहां-जहां कूड़ा-करकट या अनावश्यक सामग्री थी, उसे हटा दिया गया है।
नालियों की सफाई और आसपास के क्षेत्रों को व्यवस्थित करने के साथ पूरे परिसर को बेहतर स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले की अपेक्षा मजबूत किया गया है। विभिन्न भवनों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।छात्रावासों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी जा रही है। डिलीवरी और अन्य बाहरी सेवाओं के लिए भी निर्धारित व्यवस्था का पालन कराने के निर्देश है उन्हें गेट तक ही सीमित रखा गया है, ताकि बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति का छात्रावास परिसर में प्रवेश न हो सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि दीक्षा समारोह के दौरान परिसर का प्रत्येक हिस्सा व्यवस्थित और सुरक्षित नजर आए। सीसी कैमरों की निगरानी के साथ आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।चीफ प्रॉक्टर, चीफ वार्डन, छात्रावासों के वार्डन और सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है, ताकि समारोह के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे और विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जा सके।