गोविन्द सागर बांध की सुरक्षा होगी पुख्ता, भारी बारिश से निपटने के लिए बनेगा अतिरिक्त स्पिल-वे
ललितपुर के गोविन्द सागर बाँध की सुरक्षा और जल निकासी को आधुनिक बनाने की योजना है। सिंचाई विभाग ने मानसून के बढ़ते जलस्तर और गाद जमा होने के कारण एक अत ...और पढ़ें

फाइल तस्वीर।
HighLights
अतिरिक्त स्पिल-वे से बाँध की सुरक्षा और जल निकासी सुधरेगी।
पुराने मैनुअल गेटों को मोटराइज्ड सिस्टम से बदला जाएगा।
बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और कृषि सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।
ललितपुर ब्यूरो। शहर की जीवनरेखा और सबसे पुराने बाँधों में शुमार गोविन्द सागर बाँध की सुरक्षा और जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने कमर कस ली है।
मॉनसून के दौरान पानी के भारी आवक और वर्तमान साइफन प्रणाली की सीमित क्षमता को देखते हुए अब बाँध में एक अतिरिक्त स्पिल-वे (जल निकासी मार्ग) बनाने का निर्णय लिया गया है।
ब्लूप्रिण्ट तैयार कर फाइल सीडब्लूसी (केन्द्रीय जल आयोग) को भेजी गई है। स्वीकृति होते ही निर्माण की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
1952 में शहजाद नदी पर बना यह बाँध साइफन सिस्टम पर आधारित है। पिछले 73 वर्षों में बाँध की तली में सिल्ट (गाद) जमा होने के कारण इसकी जल भण्डारण क्षमता प्रभावित हुई है।
साथ ही, बदलते मौसम चक्र के कारण मानसून में अचानक पानी का बहाव बढ़ जाता है, जिससे पुराने सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। अभी वर्तमान में पानी की निकासी के लिए स्पिल-वे है, लेकिन मैनुअल और पुराना होने के चलते तमाम समस्याएं बनी हुई थी।
ऐसे में पानी की सुरक्षित और त्वरित निकासी सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों ने नए स्पिल-वे की सिफारिश की है। सिंचाई विभाग के अफसरों ने सर्वे कर इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है।
इसे अन्तिम स्वीकृति के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजा गया है। जल्द ही टीम यहाँ आकर निरीक्षण कर इसकी सम्भावनाओं को देखेगी। इसके बाद नए स्पिल-वे के निर्माण को मंजूरी होगी।
पुराने मैनुअल गेटों की जगह होगा मोटराइज्ड सिस्टम
ललितपुर : नए स्पिल-वे के साथ-साथ बाँध के पुराने गेटों को ऑटोमेटिक करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि आपात स्थिति में मानवीय जोखिम को कम किया जा सके। अभी बाँध के गेट को यहाँ के कर्मचारी अपने हाथों से खोलते है। उसके स्थान पर यहां सिस्टम मोटराइज्ड किए जाने की योजना है। इस सिस्टम के बाद गेट को ऑटोमेटिक तरीके से बन्द और खोला जा सकेगा।
किसानों और शहरवासियों को होगा बड़ा लाभ
अतिरिक्त स्पिल-वे बनने से न केवल बाँध की संरचना सुरक्षित होगी, बल्कि निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा भी कम होगा। बांध की क्षमता बेहतर होने से ललितपुर शहर की पेयजल आपूर्ति और करीब 20,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हो सकेगी।
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पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है बाँध
गोविन्द सागर बाँध शहर के पर्यटन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बारिश के सीजन में बाँध पर रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। इसके साथ बांध पर प्रतिदिन सुबह-शाम की सैर करने वाले लोग भी आते हैं। यही वजह है कि बाँध की सुरक्षा और सौन्दर्यीकरण की ओर विभाग का ध्यान है और इस दिशा में कार्य भी कराए जा रहे हैं।
गोविन्द सागर बाँध : एक नजर में
- निर्माण : 1952
- ढाँचा : वर्तमान में 18 गेटों के साथ साइफन प्रणाली मौजूद
- कुल जल भण्डारण क्षमता : 96.84 एमसीएम
- नहर प्रणाली की लम्बाई: 190 किलोमीटर
- कैचमेंट एरिया : 367.78 वर्ग किलोमीटर
- सिंचित भूमि क्षमता : 10,820 हेक्टेयर
- पेयजल : 15.752 एमसीएम
बाँध की भौगोलिक स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अतिरिक्त स्पिल-वे अनिवार्य है। सीडब्ल्यूसी से हरी झण्डी मिलते ही निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- जितेन्द्र कनौजिया, अधीक्षण अभियन्ता, सिंचाई कार्य मण्डल, ललितपुर।