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झांसी में 403 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का ‘मनी ट्रांसफर’ नेटवर्क, सरगना का पिता ई-रिक्शा चालक

Published: Fri, 28 Aug 2026 05:45 PM (IST)

Cyber Fraud: रकम को कई खातों और माध्यमों से घुमाकर उसे वैध लेन-देन जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी। ...और पढ़ें

पुलिस की गिरफ्त में  म्यूल खातों का संचालन करने वाला गिरोह

पुलिस की गिरफ्त में  म्यूल खातों का संचालन करने वाला गिरोह

HighLights

  1. देशभर के 60 बैंक खातों में देशभर की ठगी की रकम, झांसी के 35 खातों का संचालन करने वाले छह गिरफ्तार

  2. एक साल में 22 करोड़ रुपये कमाने वाले सरगना अरमान का चलाता है ई-रिक्शा चालक

जागरण संवाददाता, झांसी। देशभर में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाकर लूटी गई रकम को बैंक खातों के जाल में घुमाकर वैध दिखाने वाले बड़े नेटवर्क का झांसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। प्रेमनगर पुलिस ने गिरोह से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस की सघन जांच में 60 बैंक खातों में लगभग 403 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की रकम जमा होने की बात सामने आई है। इनमें 35 बैंक खाते झांसी के हैं और इनका संचालन गिरफ्तार आरोपियों के जरिए किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी और मनी ट्रांसफर में इस्तेमाल होने वाले कई डिजिटल उपकरण, एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं ताकि वित्तीय ट्रेल (Financial Trail) को पूरी तरह खंगाला जा सके।

जांच में सामने आया कि गिरोह सीधे साइबर ठगी करने के बजाय ठगों की रकम को ‘ठिकाने’ लगाने का काम करता था। देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय साइबर ठगों से रकम इन आरोपियों के नियन्त्रण वाले बैंक खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को कई खातों और माध्यमों से घुमाकर उसे वैध लेन-देन जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी। कमिशन काटने के बाद रकम को संबंधित साइबर ठगों तक वापस पहुंचाया जाता था।

ई-रिक्शा चालक का बेटा सरगना

पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य आरोपी गरिया फाटक का अरमान है। उसके पिता ई-रिक्शा चलाते थे। पुलिस का दावा है कि अरमान ने साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क के जरिए महज एक वर्ष में लगभग 22 करोड़ रुपये कमाए। उसके साथ ईसाई टोला के सत्यम वर्मा, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, अभिषेक चौधरी, जॉन पाल व अर्चित श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है।

यूएसटीडी में बदली जा रही थी ठगी की रकम

पुलिस की जांच में आरोपियों की गतिविधियां सामने आने के बाद निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस के मुताबिक आरोपियों को साइबर ठगी की रकम यूएसटीडी में बदलते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि पिछले एक सप्ताह में ही लगभग 9.75 लाख रुपये उस खाते में यूएसटीडी में बदले गए थे।

कई राज्यों तक नेटवर्क की आशंका

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि देशभर में सक्रिय साइबर ठगों में किन-किन लोगों से इनका सम्पर्क था। बैंक खातों की पूरी श्रृखंला, लेन-देन का विवरण, कमिशन के खेल और रकम को आगे भेजने वाले अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क की कड़ियां कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं।

कैसे काम करता था यह 'मनी ट्रांसफर' नेटवर्क

ठगों ने देश भर से साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए 60 संदिग्ध बैंक खाते खोल रखे थे। इनमें से 35 बैंक खाते अकेले झांसी के विभिन्न बैंकों में पाए गए, जिन्हें ये आरोपी ऑपरेट कर रहे थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में जब भी कोई साइबर ठगी होती थी, तो प्राथमिक रकम को तुरंत इन 60 खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए पैसे को कई अन्य खातों में तेजी से घुमाया (लेयरिंग) जाता था।

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