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Champat Rai Kanpur Visit: राम जन्मभूमि के नाम पर पैसा कमाने वालों पर चंपत राय का बड़ा बयान, बोले- कमाया और चले गए

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:23 PM (IST)

चंपत राय ने कानपुर में अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह में कहा कि सिंघल ने भारतीय संस्कृति और हिंदू ...और पढ़ें

कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय। साथ में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती (बाएं) । जागरण

कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय। साथ में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती (बाएं) । जागरण

HighLights

  1. अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारंभ समारोह में विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष बोले- उन्होंने संतों को जोड़ा व समाज में आत्मविश्वास जगाया

  2. स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती बोले- भारत को गृह युद्ध की आग में झोंकने का हुआ प्रयास, अमेरिका आपस में लड़वाता, संतों का चंपतराय पर पूरा विश्वास  

जागरण संवाददाता, कानपुर। श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बाद पहली बार कानपुर में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में आए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय ने कहा कि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय अशोक सिंहल का जीवन भारतीय संस्कृति के उत्थान व हिंदू समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अनेक लोगों ने अपना जीवन व समय लगाया, लेकिन कुछ लोग श्रीराम जन्मभूमि के नाम पर पैसा कमाकर चले गए।

बुधवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन बेनाझाबर में अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारंभ समारोह में मुख्य वक्ता चंपतराय ने उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाए। कहा कि उनमें आध्यात्मिक ऊर्जा, संगठन क्षमता व अद्भुत आत्मविश्वास था। वह जिस काम को हाथ में लेते थे, उसे पूरा करने को संपूर्ण ताकत लगा देते थे।

उन्होंने कहा, पंजाब में आतंकवाद के कठिन दौर में उन्होंने समाज का मनोबल बनाए रखने को हरिद्वार से अमृतसर तक संतों की यात्रा निकाली। उस समय चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां थी पर उन्होंने समाज को संगठित कर उसमें आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि संकट के समय समाज को भय से नहीं, बल्कि संगठन व आत्मविश्वास से आगे बढ़ना चाहिए। काशी की धर्म संसद में डोम राजा को मंच पर लाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। सनातन-बौद्ध परंपराओं के बीच संवाद में भूमिका निभाई।

कहा कि 1984 में धर्म संसद के शंखनाद से लेकर शिलापूजन, कारसेवा व गांव-गांव में जन-जागरण तक अशोक सिंहल का हर क्षण प्रभु श्रीराम के कार्य को समर्पित रहा। रामभक्तों पर गोली चलने के बाद उन्होंने एक सेवक को अयोध्या के श्मशान घाट भेजकर चिता की राख मटके में मंगाई और फिर उसे सिरहाने रख कर सोए थे।

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि पूरी दुनिया में अमेरिका ने युद्ध का माहौल बनाकर जीडीपी में उछाल पाया है। भारत को गृह युद्ध की आग में झोकने वाले आइएसआइ व सीआइए के एजेंट सावधान हो जाएं। वह घरों से निकले तो मार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संतों का चंपत राय पर पूरा विश्वास है। अशोक सिंहल संतों के हृदय में बसते थे। उन्होंने भारत की सुप्त संत-शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में आहुति देने को प्रेरित किया।

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