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    Health Alert: काली पड़ती त्वचा! सावधान—आपका पीने का पानी बन सकता है जान का दुश्मन

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 04:56 PM (GMT+05:30)

    कानपुर में दूषित पानी हैजा, टाइफाइड, डायरिया और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। भूजल में भारी धातुओं की मौजूदगी से कैंसर, लिवर और क ...और पढ़ें

    दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी प्रियदर्शी । जागरण

    दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी प्रियदर्शी । जागरण

    HighLights

    1. दूषित पानी से हैजा, टाइफाइड, डायरिया, हेपेटाइटिस का खतरा

    2. भूजल में भारी धातुएं कैंसर, किडनी रोग बढ़ाती हैं

    3. पानी उबालकर पिएं, नियमित जांच कराएं, विशेषज्ञ से मिलें

    जागरण संवाददाता, कानपुर। दूषित पानी पानी हैजा, टाइफाइड, डायरिया, हेपेटाइटिस, पेट के कीड़े तथा भारी तत्व यानी हैवी मेटल्स युक्त पानी पीने से कैंसर, लिवर, किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा है। पिछले कई वर्षों में शहर के रनियां, जाजमऊ, राखी मंडी और उन्नाव के बंथर क्षेत्रों से क्रोनिक समस्याओं के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। कई शोध में इस बात की पुष्टि भी हुई है। दूषित पानी में कई प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस तथा परजीवी से होते हैं। जो दस्त, उल्टी, बुखार, पेट दर्द, थकान और डिहाइड्रेशन के साथ कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

    दैनिक जागरण की ओर से शुद्ध जल की गुणवत्ता के क्या हैं आधार पर हुए हुए हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी प्रियदर्शी ने पाठकों के सवालों के उत्तर दिए। उन्होंने हर बूंद हो स्वच्छ हर घूंट हो स्वस्थ पर पाठकों के सवालों का उत्तर दिया। पेश है मुख्य अंश...

     

    • क्या भूजल दूषित हो सकता है। इसकी पहचान कैसे करें? - जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक।
    • जी हां, शहर के कई क्षेत्रों के भूजल में भारी तत्व मिले हैं। जो शरीर के लिए नुकसानदायक है। इससे त्वचा, किडनी, गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारी का खतरा हो सकता है। इसके बचाव के लिए पानी को उबालकर ही पानी पिएं। दूषित पानी की पहचान के लिए समय-समय पर अपने क्षेत्र के भूजल की जांच जलकल और सीएमओ की जांच टीम से जरूर कराएं। दूषित पानी देखने से समझ नहीं आता है। इसकी जांच कराकर ही इसकी गंभीरता को देखा जा सकता है।

     

     

    • भूजल में भारी तत्व किस प्रकार खतरनाक है। इससे क्या हो सकता है? - पुष्पा देवी, लालबंगला।
    • आर्सेनिक, लेड, क्रोमियम और कैडमियम और कापर सबसे ज्यादा नुकसानदायक है। इससे कैंसर, किडनी फेल, नेत्र और ब्रेन से जुड़ी बीमारियों का खतरा होता है। कानपुर के रनियां, राखी मंडी में जाजमऊ के कई क्षेत्रों में भूजल में भारी तत्व की पुष्टि हुई है। इसलिए ही इन क्षेत्रों से त्वचा रोग और गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारियों के मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं।

     

    खबरें और भी

     

    • कई महीनों से त्वचा काली पड़ रही है। कई दिनों से क्षेत्र में गंदा पानी आ रहा है। क्या यह दूषित पानी के लक्षण हैं? - श्याम मिश्रा, जाजमऊ
    • दूषित पानी का सबसे पहला दुष्प्रभाव त्वचा पर ही पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में कई कैंप का संचालन हो रहा है। कैंप में रक्त की जांच कराएं। सैंपलिंग रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज कराएं। भारी तत्व के कारण इस प्रकार की समस्याएं होती हैं। इसकी अनदेखी करना ठीक नहीं है। इसलिए जांच कराएं और विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज कराएं।

     

     

    • हमारे क्षेत्र में पानी पीला आ रहा है। इससे क्या नुकसान हो सकता है? - आशीष चतुर्वेदी, गुजैनी।
    • पीला पानी एक्यूट समस्याएं, पीलिया, त्वचा रोग, पेट से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए पानी को उबालकर ही पिएं। पानी की पीएच जांच कराएं। भूजल के स्थान पर सप्लाई पानी पी सकते हैं। पीला पानी भूजल के निचले स्तर पर मिलता है। जो नुकसानदायक हो सकता है।

     

     

    • किस प्रकार का पानी बेहतर और पीने योग्य है। इसकी पहचान कैसे करें? - विष्णु गुप्ता, पनकी। नरेंद्र नाथ शुक्ला, रामादेवी।
    • समय के बदलाव के साथ पीने के पानी का कल्चर बदला है। पहले प्रदूषण नहीं था तो कुएं का पानी सुरक्षित था। अब भूजल में भारी तत्व मिलने से वो भी दूषित हो रहा है। सप्लाई वाटर काफी हद तक सुरक्षित है। इसकी जांच के बाद ही इसे सप्लाई किया जाता है। इसलिए भूजल के स्थान पर सप्लाई का पानी बेहतर है। पीने के पानी का पीएच स्तर 6.5 से 8.5 के बीच बेहतर होता है। वहीं, टीडीएस का स्तर 50 से 150 के बीच संतुलित माना गया है।

     

     

    • कब्ज का मरीज हूं, क्या दूषित पानी के कारण ऐसा हो सकता है? - आरबी सैनी, पंचवटी।
    • कब्ज दूषित पानी से होने वाली बीमारी नहीं है। यह गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारी का लक्षण हैं। एक बार आप एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में दिखा लें। तब तक पानी को उबाल कर ही पिएं। इसके साथ ही खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।

     

     

    • दूषित और भारी तत्व किस प्रकार शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता है? - आकृति जैन, बर्रा आठ।
    • दूषित पानी भारी तत्व युक्त पानी शरीर के लिए अलग-अलग प्रकार का नुकसानदायक है। दूषित पानी बैक्टीरिया, वायरस के कारण टाइफाइड, पीलिया, डायरिया, गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। जबकि भारी तत्व युक्त पानी से एक्यूट समस्याएं जैसे शरीर में चकत्ते, त्वचा रोग, किडनी को नुकसान, हार्ट और ब्रेन की शिथिलता हो सकती है।

     

     

    • दूषित पानी की पहचान कैसे करें। अगर इसका सेवन कर लिया तो क्या करें? - जय प्रकाश साहू, आजाद नगर।
    • दूषित पानी की पहचान लैब में सैंपल भेजकर ही हो सकती है। नग्न आंखों से इसे देख पाना संभव नहीं है। दूषित पानी के कारण उल्टी, दस्त, डायरिया और पीलिया जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि आप पानी को उबाल कर ही पिएं।

     

     

    • दूषित पानी से बढ़ रहे मामलों को लेकर मेडिकल कालेज की क्या भूमिका रहती है? - रजत यादव, जूही।
    • मेडिकल कालेज ट्रीटमेंट के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। हमारे यहां पर उल्टी, दस्त, डायरिया, पीलिया के मरीजों का प्राथमिकता पर इलाज किया जा रहा है। क्रोनिक मरीजों के लिए आइसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा है। इसके साथ ही भारी तत्व वाले मरीजों में उपचार के लिए विशेषज्ञ हैं। ओपीडी और इमरजेंसी में विशेषज्ञ की टीम तैनात है। इसके साथ ही हमारे यहां पर कई शोध कार्य चल रहे हैं, जो मरीजों के शरीर में होने वाले नुकसान का पता करके शहर के साथ कई जिलों के मरीजों को आयुष्मान कर रहे हैं।

     

     

    • टंकी का पानी कैसे पीने लायक बनाया जा सकता है? - अफसार, अहमद, विजय नगर।
    • सप्लाई का पानी और भूजल के पानी का दूषित होना संभव है। सप्लाई का पानी सरकारी नियम से जांच के बाद ही भेजा जाता है। जबकि भूजल में ऐसा कुछ नहीं है। जिन क्षेत्रों में केमिकल फैक्ट्री हैं, वहां के क्षेत्रों में भूजल का पानी पीना नुकसानदायक है। इसलिए बिना जांच के पानी पीने से बचें। अगर संभव हो तो एक बार अपने क्षेत्र के पानी की जांच कराएं। इसके साथ ही टंकी के पानी में क्लोरीन की मात्रा की जांच करें।

     

     

    दूषित पानी से होने वाली बीमारियां

    त्वचा का काला पड़ना, बाल का झड़ना, अल्सर, शरीर में सूजन, पीलिया, लिवर, गैस्ट्रो, उल्टी, दस्त, खूनी पेचिश, टायफाइड में बुखार आना। यह दूषित पानी एकत्र होने से मलेरिया, डेंगू का भी कारण बनता है। क्रोनिक मामलों में लिवर, किडनी फेल के साथ कैंसर और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा हो सकता है।


    इन्होंने किए प्रश्न

    ललित तिवारी, श्याम नगर। संजय शुक्ला, सर्वोदय नगर। सीमा जैन, लालबंगला। संदीप गुप्ता ग्वालटोली। आर्यन गुप्ता, जाजमऊ। मो. फरहान, रामादेवी। प्रधान सिंह, रनियां।