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    25 राज्यों में फैला फर्जी मार्कशीट-डिग्री का नेटवर्क, कानपुर के बाद UP Police की रडार में दिल्ली का गिरोह

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:39 PM (IST)

    पुलिस अब दिल्ली से संचालित एक नए फर्जी मार्कशीट-डिग्री गिरोह की तलाश में है, जिसने कानपुर में पकड़े गए आरोपी को कूरियर से फर्जी दस्तावेज भेजे थे। यह ग ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. नई दिल्ली से आरोपित के कार्यालय विनायकपुर में कुरियर से भेजी गई थी छह मार्कशीट व एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट

    2. सिक्किम ग्लोबल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के नाम की हैं सभी, एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट दक्षिण भारत के युवक के नाम का मिला

    जागरण संवाददाता, कानपुर। फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां बनाने वाले अब तक पकड़े गए तीन गिरोह एक दूसरे से कनेक्ट हैं। इसी नेटवर्क को खंगालते हुए अब फीलखाना पुलिस के रडार पर चौथा गिरेाह आ गया। ये गिरोह नई दिल्ली से संचालित हो रहा है।

    इस गिरोह ने कुछ दिन पहले ही नई दिल्ली के ओखला स्थित कुरियर कंपनी से फर्जी मार्कशीट व प्रोविजनल सर्टिफिकेट कल्याणपुर के विनायकपुर में रहने वाले जेल भेजे गए आरोपित गोपालजी गुप्ता के कार्यालय में भेजा था, जिसमें मार्कशीट सिक्किम ग्लोबल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के नाम की हैं। इसमें दक्षिण भारत के एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट दक्षिण भारत के युवक के नाम पर और दो युवकों की अलग-अलग सेमेस्टर की मार्कशीट निकली। पुलिस टीम सभी मार्कशीटों को सत्यापन के लिए भेज रही है। वहीं, एक टीम नई दिल्ली जाने के लिए भी तैयारी कर रही है।

    17 फरवरी को गिरोह के चार आरोपित पकड़े गए

    फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां बनाने वाले गिरोह की जांच के लिए पुलिस आयुक्त ने फरवरी में एक टीम गठित की थी। इस टीम ने 17 फरवरी की रात साकेत नगर से फर्जी मार्कशीट बनवाने वाले गिरोह के सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालय व माध्यमिक शिक्षा परिषद की 1053 मार्कशीट-डिग्रियां व प्रोविजनल सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। बताया जा रहा है कि करीब 25 राज्यों में गिरोह का नेटवर्क है।

    फिर दूसरा गिरोह हत्थे चढ़ा

    इसके बाद एसआइटी गठित हुई और छह और आरोपित धर दबोचे गए। इसी जांच को आगे बढ़ाया गया तो पुलिस ने इसी नेटवर्क के दूसरे गिरोह के चार आरोपितों को आठ जून की रात बेकनगंज के हीरामन का पुरवा पकड़ा। दो गिरोह पकड़े जाने के बाद एसआइटी दोनों प्रकरणों की जांच कर रही थी।

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    फीलखाना थाना क्षेत्र से तीसरा गिरोह पकड़ा

    इसी कड़ी में फीलखाना थाना पुलिस के हत्थे तीसरा गिरोह लग गया, जिसमें मूलरूप से इटावा के कटरा व हाल पता बर्रा दो निवासी अमित कुमार सक्सेना और मूलरूप से कालपी जालौन के कदौरा बावनी स्टेट व हाल पता कल्याणपुर के विनायकपुर निवासी गोपालजी गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। जबकि गिरोह का सरगना उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश शुक्ला और उसके भाई निखिलेश फरार हैं। अखिलेश पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया।

    यहां से दिल्ली का मिला लिंक

    जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि गोपालजी गुप्ता को नई दिल्ली के ओखला त्रिभुवन कांप्लेक्स स्थित मधुर कुरियर एंड कारगो सर्विसेज से एक लिफाफा भेजा गया था, जिसमें छह मार्कशीट व एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट निकला। इसमें शशांक कुमार यादव के नाम पर बीए, बिसांत कुमार ओझा की मास्टर आफ बिजनेस एंड एडमिनिस्ट्रेशन (मार्केटिंग) की मार्कशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट खांडे लक्ष्मण मधुकर नाम से आपरेशन मैनेजमेंट की थी।

    25 हजार के इनामी सरगना की तलाश में दबिश, नहीं मिला

    पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपित 25 हजार के इनामी अखिलेश शुक्ला उन्नाव में डीपीएस फांउडेशन व उत्कर्ष अकादमी नाम से कोचिंग चलाता था। उसके पांच खातो में वर्ष 2015 से अब तक 50 करोड़ का लेनदेन मिला है। इसमें जब वह अप्रैल में जेल से बहार आया। उसके बाद गोपालजी के खाते से उसके खाते में 90 लाख रुपये का लेनदेन पाया। पुलिस ने उसकी तलाश में कई जगहों पर दबिश दी, लेकिन नहीं मिला।

    छह खातों में 14 करोड़ के लेनदेन मिले

    पुलिस की जांच में जेल भेजा गए अमित के तीन खातों में सात करोड़ और गोपालजी के खातों में भी सात करोड़ के लेनदेने मिले हैं। अमित ने बैंगलुरू से पासपोर्ट बनवाया था और वर्ष 2024 व 2025 में मालदीव व मलेशिया गया था।


    एक और नए गिरोह के बारे में पता चला है। एक लिफाफे में छह मार्कशीट व एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिला है, जिसे नई दिल्ली के कुरियर कंपनी से यहां आरोपित गोपालजी की संस्था के पते व उसके खुद के नाम व मोबाइल नंबर लिखकर पर भेजा गया था।- गिरोह का पता लगाने के लिए टीमें लगी हैं। जल्द उसका भी राजफाश किया जाएगा।
    - रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त