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भारतीयों के सेवाभाव के मुरीद हुए जर्मनी व जापान, भारतीय परिवार संस्कार देख यूपी से मांगे 5 हजार लोग

Published: Wed, 07 Oct 2026 02:00 AM (GMT+05:30)

जर्मनी और जापान ने उत्तर प्रदेश से 5000 श्रमिकों, इंजीनियरों और नर्सिंग कर्मियों की मांग की है, खासकर बुजुर्गों की ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

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आशुतोष मिश्र, कानपुर। जर्मनी और जापान ने श्रमिक, इंजीनियर व नर्सिंग एंड केयर की नौकरी के लिए 5000 लोगों की मांग उत्तर प्रदेश से की है। इसमें नर्सिंग एंड केयर के लिए अधिक मांग है, क्योंकि दोनों देशों के लोगों का मानना है कि उनके बुजुर्ग स्वजन की देखभाल भारतीय पारिवारिक संस्कारों से युक्त लोग ठीक ढंग से कर सकते हैं, उनमें सेवाभाव होता है। प्रशिक्षण एवं रोजगार निदेशालय ने पहले चरण में एक हजार लोगों को जर्मनी व 100 लोगों को जापान में नौकरी दिलाने का लक्ष्य तय किया है।

इसके पहले इन्हें छह माह का विदेशी भाषा का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, जिसके लिए लखनऊ के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का चयन किया गया है। पहला बैच जर्मनी भाषा के प्रशिक्षण के लिए 50 और जापान की भाषा का 30 लोगों का है, जिनका प्रशिक्षण शुरू कराया जा चुका है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएसडीसी) ने जर्मनी व जापान में नौकरियों के लिए प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय से प्रशिक्षित लोगों की मांग की है।

प्रादेशिक सेवायोजन कार्यालय के सहायक निदेशक उज्जवल कुमार सिंह ने बताया कि कानपुर से दोनों देशों में नर्सिंग एंड केयर की नौकरी के लिए प्रशिक्षण दिलाने को 40 लोग मांगे गए हैं। इसके लिए नर्सिग स्कूलों से संपर्क किया जा रहा है। एक बैच में कम से कम 40 लोग होने चाहिए। अगर संख्या पूरी हो गई तो लखनऊ स्थित विश्वविद्यालय के प्रशिक्षक यहीं आकर प्रशिक्षण देंगे। कम संख्या होने पर उन्हें लखनऊ भेजा जाएगा।

प्रशिक्षण मुफ्त में दिलाया जाएगा। इसी माह के अंत तक कानपुर के लोगों का प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाएगा। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक नेहा प्रकाश ने बताया कि दोनों देशों में जाने वाले लोगों को भाषा का प्रशिक्षण दिलाकर सफल लोगों को भेजा जाएगा। समाजशास्त्री प्रो. अनूप सिंह ने बताया कि विदेशियों को भारतीय संस्कृति व संस्कार पता हैं, वे इनसे प्रभावित भी हैं। वह जानते हैं कि भारतीयों में सेवाभाव रहता है। संयुक्त परिवार में वह अपने बुजुर्गों की सेवा करते हैं। इसलिए उन्हें बुजुर्गों की सेवा का काम देंगे तो वह केवल धनार्जन की भावना नहीं, बल्कि सेवाभाव से काम करेंगे।

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