IIT Kanpur का AI सेंसर बताएगा शहर में प्रदूषण का हाल, पता चलेगा किस गली-मोहल्ले से निकल रहा धुआं
आईआईटी कानपुर ने शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए एआई-आधारित वायु गुणवत्ता मापन प्रणाली शुरू की है। यह प्रणाली वास्तविक समय में प्रदूषण के स्रोत ...और पढ़ें
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HighLights
आईआईटी कानपुर ने एआई-आधारित वायु गुणवत्ता प्रणाली शुरू की
यह प्रणाली प्रदूषण के स्रोत की वास्तविक समय में पहचान करेगी
भविष्य में ट्रैफिक और जलभराव समस्याओं पर भी काम होगा
जागरण संवाददाता, कानपुर। बढ़ते शहरीकरण के साथ नागरिक सुविधाओं और पर्यावरण प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसकी शुरुआत वायु गुणवत्ता मापन प्रणाली से हो गई है। इस तकनीक से पता चल सकेगा कि किस गली में और किस मकान से सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण हो रहा है। भविष्य में ट्रैफिक और जलभराव जैसी प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए भी रियल टाइम माडल लागू करने की तैयारी है।
आईआईटी की गैर लाभकारी संस्था ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन ने शहर में अलग-अलग 130 स्थानों पर वायु गुणवत्ता मापने वाले अत्याधुनिक सेंसर लगाए हैं। एआइ सेंटर आफ एक्सीलेंस फार सस्टेनबल सिटीज के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि 100 सेंसर काम कर रहे हैं और इसी सप्ताह सभी काम शुरू कर देंगे। इनसे वायु गुणवत्ता की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
इसी सप्ताह से यह प्रणाली पूरी तरह काम शुरू कर देगी। इसे इंटेलिजेंट एयर क्वालिटी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (प्रदूषण नियंत्रण) का नाम दिया गया है, जो बता सकेगा कि शहर के किस मुहल्ले, गली या मकान से वायु प्रदूषण का उत्सर्जन किया जा रहा है। इस माडल से किसी भी क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य (जैसे मेट्रो या सीवर लाइन खोदाई), औद्योगिक उत्सर्जन या घरेलू गतिविधियों (जैसे चूल्हे का धुआं) की पहचान कर उनके रोकथाम का उपाय लागू किया जाएगा।
अगले चरण में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम और बाढ़ नियंत्रण या शहर में होने वाले जलभराव पर काम किया जाएगा। इस माडल का प्रयोग गांधीनगर, सूरत, राजकोट और केरल के कोझिकोड में किया जा रहा है। ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन शिक्षा मंत्रालय की फंडिंग से काम कर रही है। आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गांधीनगर जैसे शैक्षणिक संस्थान, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसी औद्योगिक कंपनियां और ई-गव फाउंडेशन जैसी डिजिटल गवर्नेंस संस्थाएं इसकी साझीदार हैं।