'करियर और जीवन में दांव लगाने से न हिचकें...' IIT Kanpur में पद्मश्री डॉ. पवन गोयनका का युवाओं के लिए बड़ी सीख
आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में इन-स्पेस के अध्यक्ष और महिंद्रा एंड महिंद्रा के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. पवन गोयनका ने छात्रों को जीवन और करियर मे ...और पढ़ें

डॉ. पवन गोयनका। जागरण
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डॉ. पवन गोयनका ने छात्रों को बड़े लक्ष्य तय कर जोखिम लेने की प्रेरणा दी।
डॉ. पवन गोयनका ने छात्रों को बड़े लक्ष्य तय कर जोखिम लेने की प्रेरणा दी।
युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।
जागरण संवाददाता, कानपुर। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की नियामक संस्था (इन-स्पेस) के अध्यक्ष और महिंद्रा एंड महिंद्रा के पूर्व प्रबंध निदेशक डा. पवन गोयनका ने आईआईटी के दीक्षा समारोह में छात्रों को जीवन और करियर में सफल होने के पांच अमूल्य मूलमंत्र दिए। उन्होंने युवाओं से सुरक्षित रास्तों के बजाय सार्थक रास्तों को चुनने और देश के विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि करियर और जीवन में बड़े दांव लगाने से कभी न हिचकें। आज इस सभागार से विकसित भारत के निर्माता बनकर बाहर जाएं।
दीक्षा समारोह के मुख्य अतिथि डा. गोयनका ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करने के दौरान पांच मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। जिसमें कभी हार न मानें का संदेश पहला है। उन्होंने बताया कि आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें प्रसिद्ध कंपनी एलएंडटी में नौकरी नहीं मिली, तो वे निराश नहीं हुए और अमेरिका चले गए, जहां से उनके करियर को एक नई दिशा मिली।

हमेशा अपने दिल की सुनें
उन्होंने दूसरा सबक बताया कि हमेशा अपने दिल की सुनें। 1993 में अमेरिका की आरामदायक जिंदगी और छह अंकों की अमेरिकी डालर की सैलरी छोड़कर भारत लौटे। तार्किक रूप से उनका इंजीनियर दिमाग इसके खिलाफ था, लेकिन उनकी पत्नी ने दिल से फैसला लिया और वे भारत आ गए। उन्होंने युवाओं से कहा कि कभी-कभी दिल को दिमाग पर हावी होने देना चाहिए।
बड़े दांव लगाने से न डरें
भारत लौटने पर आनंद महिंद्रा के साथ मिलकर उन्होंने घरेलू स्तर पर उत्पाद बनाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया। इसी का नतीजा था कि महिंद्रा ने तकनीक बाहर से खरीदने के सुरक्षित रास्ते के बजाय खुद की एसयूवी बनाने पर बड़ा दांव लगाया और 'बोलेरो' व 'स्कार्पियो' जैसी गाड़ियां देश को दीं। उन्होंने कहा कि यदि आप कभी असफल नहीं हुए हैं, तो इसका मतलब है कि आपने खुद को पूरी तरह आजमाया ही नहीं है।
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टीमवर्क और लोगों पर भरोसा
उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में अकेले कुछ भी बड़ा हासिल नहीं किया जा सकता। जब आप टीम के लोगों को एक बड़ा लक्ष्य और वास्तविक भरोसा देते हैं, तो वे अपने असाधारण काम से आपको आश्चर्यचकित कर देते हैं।
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
वर्ष 2021 में, 67 वर्ष की आयु में उन्हें पीएमओ से देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का नेतृत्व करने का अवसर मिला। उस समय उन्हें स्पेस रिफार्म्स की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने चुनौती स्वीकार की और पिछले साढ़े चार वर्षों में बहुत कुछ नया सीखा।
विकसित भारत 2047 के निर्माता हैं युवा
डा. गोयनका ने बदलते भारत का खाका खींचते हुए कहा कि आज भारत सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, डीप टेक और स्पेस जैसे क्षेत्रों में दुनिया को राह दिखा रहा है। उन्होंने 'विकसित भारत' को परिभाषित करते हुए कहा कि इसका मतलब सिर्फ जीडीपी या रैंकिंग नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को सम्मान, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का समान अवसर मिलना है।
बाहर विकसित भारत के निर्माता के रूप में कदम रखें
छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, कि आज आप इस सभागार में आईआईटी छात्र के रूप में दाखिल हुए थे, लेकिन जब आप यहां से बाहर कदम रखेंगे, तो 'विकसित भारत' के निर्माताओं के रूप में बाहर जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहा होगा, तब आज के ये युवा अपने करियर के शीर्ष पर होंगे और देश के विकास में अपनी अमिट विरासत छोड़ चुके होंगे।
आई हैव ज्वाइंड टुमारो
डा. गोयनका ने हंसते हुए अपने छात्र जीवन का एक बेहद दिलचस्प और मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे आईआईटी कानपुर आए, तो उनकी अंग्रेजी इतनी कमजोर थी कि उन्होंने किसी से बातचीत में कह दिया था—आई हैव ज्वाइंड टुमारो । इस तरह की अंग्रेजी बोलने के बावजूद वे न केवल आईआईटी में टिके रहे, बल्कि आगे चलकर अपने करियर में देश-विदेश में बड़े-बड़े मुकाम भी हासिल किए।