Kanpur Kidney Racket: फर्जी डॉक्टर, असली सरगना! सिम गंगा में फेंका, फिर भी नहीं बचा
कानपुर किडनी रैकेट का सरगना रोहित तिवारी गिरफ्तार हो गया है। 25 हजार का इनामी रोहित खुद को डॉक्टर बताता था, जबकि वह इंटर पास है। अग्रिम जमानत के लिए क ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का सरगना और 25 हजार का इनामी अपराधी रोहित तिवारी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने गंगा बैराज में अपने मोबाइल और सिम फेंक दिए थे ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके। वह कानपुर कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत के लिए वकील से मिलने पहुंचा था।
किडनी खरीदने-बेचने व अवैध ढंग से ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का सरगना 25 हजार के इनामी रोहित तिवारी सोमवार सुबह रावतपुर थाना क्षेत्र के पास जीटी रोड से गिरफ्तार किया गया। वह मूलरूप से हरदोई के बिलग्राम गंगाधाम का रहने वाला है, लेकिन 2016 से गाजियाबाद में रह रहा है। खुद को एनेस्थीसिया का डाक्टर कहने वाला रोहित इंटर पास निकला। वह कानपुर कोर्ट अग्रिम जमानत के लिए अर्जी देने के लिए वकील से मिलने शहर आया था। इससे पहले उसने पकड़े जाने के डर से बैराज पहुंचकर अपने दो मोबाइल गंगा में फेंक दिए।
ट्रांसप्लांट के लिए अस्पतालों की व्यवस्था देखना था उसका काम
उसने बताया कि वह ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन नहीं देता था बल्कि ओटी मैनेजर राजेश व इंचार्ज कुलदीप देते थे। उसका काम ट्रांसप्लांट के लिए अस्पतालों की व्यवस्था और ओटी टीम भेजना था। उसने अब तक 30 किडनी ट्रांसप्लांट करने की जानकारी दी है। हर ट्रांसप्लांट में उसका हिस्सा 20 से 30 लाख रुपये होता था। बाकी रकम दलाल रखते थे।
ये लोग सलाखों के पीछे
केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट करने का खेल 30 मार्च को खुला था। इस किडनी कांड के राजफाश में एक महिला की शिकायत, खूफिया सूचना के साथ आइपीएस अधिकारी सुमेध जाधव के एमबीबीएस होने की वजह से हुआ था। इस प्रकरण में आहूजा अस्पताल की संचालक डा. प्रीति आहूजा, उनके पति डा. सुरजीत आहूजा, ओटी मैनेजर गाजियाबाद का राजेश कुमार, हापुड़ के कुलदीप, आरोपित अस्पताल संचालक राजेश कुमार, मेड लाइफ अस्पताल के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के नरेन्द्र सिंह, दलाल शिवम अग्रवाल और मेरठ का परवेज सैफी जेल भेजा गया था।
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जीटी रोड से गिरफ्तार किया सरगना को
पिछले दिनों डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने गिरोह के सरगना और खुद को एनेस्थीसिया का डाक्टर बताने वाला रोहित, अफजाल व मुद्दसर अली खान उर्फ अली पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। डीसीपी पश्चिम ने बताया कि सोमवार सुबह मुखबिर की सूचना पर जीटी रोड से गिरोह का सरगना व 10वां आरोपित रोहित तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसने वर्ष 2008 में हरदोई के बिलग्राम स्थित एसडी स्कूल से इंटर पास किया था। परिवार में माता, चार भाई व दो शादीशुदा बहनें हैं।
कैसे खड़ा किया किडनी गैंग
रोहित ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2016 में गांव का अमित काम दिलाने के लिए उसे गाजियाबाद ले गया था, जहां उसने डिक्सन नाम की फैक्ट्री काम किया। इसके बाद डेकी नाम की कंपनी में काम किया। वर्ष 2018 में फैक्ट्री का कर्मी रिंकू मिला। उसने कहा कि वह उसे अपने जीजा के यहां काम दिला देगा। इसके बाद उसे मेरठ में डा. वैभव के मधुकर डेंटल क्लीनिक ले गया। वहां उसे रिशेप्शन का काम मिला। कुछ समय बाद उसे मेरठ के अल्फा हास्पिटल में वार्ड ब्वाय की नौकरी कर ली। ये हास्पिटल फिजियोथेरेपिस्ट अमित उर्फ अनुराग का है, जिसका पार्टनर डा. वैभव था। पहले उसी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चलता था, लेकिन 2019 में डा. वैभव और अमित के बीच किसी बात पर मतभेद हो गया और ट्रांसप्लांट बंद कर दिया गया।
फिर कानपुर से जुड़े तार
इसके बाद वैभव ने उसे अपने साथ ले लिया और ट्रांसप्लांट के खेल में मोटी कमाई को समझाते हुए उसे कानपुर भेजा, जिससे यहां आकर वह अस्पताल संचालकों से संपर्क कर किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए ओटी (आपरेशन थिएटर) की व्यवस्था कर सके। इस दौरान उसने कई अस्ताल ढूंढे। इसबीच उसकी मुलाकात प्रयागराज के नवीन पांडेय से हुई। उन दोनों से एंबुलेंस चालक व दलाल शिवम अग्रवाल से वर्ष 2022 में संपर्क हुआ। इस दौरान उन लोगों ने आरोही अस्पताल, मेडीलाइफ अस्पताल, आहूजा अस्पताल समेत अस्पतालों के संचालकों से संपर्क ट्रांसप्लांट के लिए शामिल कर लिया। तब से ये खेल शहर में भी चलने लगा था। डीसीपी ने बताया कि रोहित को जेल भेज दिया गया है। अब उसे व शिवम का जल्द कस्टडी रिमांड लेकर अन्य साक्ष्य जुटाए जाएंगे। अब 25-25 हजार के इनामी डा. अफजाल अहमद, मुद्दसर अली सिद्दकी उर्फ अली, अन्य आरोपित डा. वैभव, अमित, अफजाल अहमद, अली, नवीन पांडेय व तीन अन्य प्रकाश में आए आरोपितों की तलाश की जा रही है।
आरोही में एक, मेडीलाइफ में दो और आहूजा में हुए 10 किडनी ट्रांसप्लांट
डीसीपी ने बताया कि रोहित के अनुसार, वर्ष 2023 में एक पुरुष का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, जबकि मेडीलाइफ में दिसंबर 2025 में दो महिलाओं का और आहूजा में 10 किडनी ट्रांसप्लांट कराए थे। पारुल का ट्रांसप्लांट कुल 60 लाख में किया गया था। सभी किडनी ट्रांसप्लांट ओटी मैनेजर अली करता था। तीन मार्च 2026 को साउथ अफ्रीका का ट्रांसप्लांट आहूजा में हुआ था। उसे दलाल नवीन लेकर आया था। उसके ट्रांसप्लांट के लिए रोहित को 20 लाख मिले थे। रोहित ने बताया कि डनी खरीदने व बेचने वाले लोगों से संपर्क दलाल करते थे। वे लोग उनसे कितने रुपये वसूलते थे। इसकी जानकारी उसे जानकारी नहीं रहती थी। किडनी ट्रांसप्लांट के धंधे में उसे डा. वैभव लाया था। पारुल का ट्रांसप्लांट होने के बाद राेहित अपनी प्रेमिका व दलाल शिवम अग्रवाल के साथ नैनीताल, मनाली, गोवा गया था।शिवम से उसका संपर्क दलाल नवीन के माध्यम से हुआ था।