विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कानपुर में चालान या सिर्फ दिखावा? ट्रैफिक नियम तोड़ने पर BJP विधायक का चालान, काफिले में शामिल लोगों को छोड़ा 

By Ritesh DwivediEdited By: Anurag Shukla
Published: Wed, 07 Oct 2026 05:57 PM (IST)

कानपुर में सेवा ज्योति कलश यात्रा के दौरान भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने बिना हेलमेट बाइक चलाई, जिस पर उनका ...और पढ़ें

HighLights

  1. भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने बिना हेलमेट बाइक चलाई

  2. यातायात नियम उल्लंघन पर 1000 रुपये का चालान कटा

  3. विधायक ने स्वीकार किया, कहा नियम सभी के लिए समान

जागरण संवाददाता, कानपुर। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ जिस रफ्तार से बढ़ रहा है उसे लेकर सरकार लगातार मुस्तैदी का दावा कर रही है। वहीं, जब कानून के रखवाले और जनप्रतिनिधि ही सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाने लगें तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। मामला कानपुर का है। सत्ताधारी पार्टी के गोविंदनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी और उनके समर्थकों ने ट्रैफिक नियमों को सरेआम तोड़ा।

बुधवार को विधायक जी 40-50 गाड़ियों के दलबल के साथ 'सेवा ज्योति कलश यात्रा' पर निकले थे। बुलेट पर सवार विधायक मैथानी न सिर्फ खुद बिना हेलमेट के थे बल्कि उनके पीछे बैठा व्यक्ति भी हेलमेट नहीं लगाए थे। यही नहीं, काफिले में शामिल अधिकांश युवा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सड़कों पर फर्राटा भरते रहे। इधर, खाकी की कार्यप्रणाली भी कम सवालों के घेरे में नहीं है।

काकादेव थाने के दारोगा ने विधायक की बुलेट का 1,000 रुपये का चालान काटकर अपनी पीठ थपथपा ली और दावा किया कि इससे समाज में बड़ा संदेश जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि पुलिस का यह 'कड़ा संदेश' सिर्फ विधायक की एक बुलेट तक ही क्यों सीमित रहा? उनके पीछे चल रहे दर्जनों बिना हेलमेट चालकों को पुलिस ने क्यों छोड़ा?

चौंकाने वाली बात यह भी है कि विधायक जिस बुलेट (विवेक अवस्थी के नाम दर्ज) से फर्राटा भर रहे थे, उस पर पहले से ही 5,500 रुपये के दो चालान बकाया हैं। एक 5,000 रुपये का चालान छपेड़ा पुलिया पर हुआ था और दूसरा 500 रुपये का काकादेव में। यानी इस वाहन से नियमों को तोड़ना नई बात नहीं है।

मामला गरमाने के बाद विधायक ने कहा कि हममें और जनता में कोई अंतर नहीं है, हम भी कानून का पालन करते हैं। साथ ही भविष्य में हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाने का ध्यान रखने की बात कही। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल 1,000 रुपये का जुर्माना भर देने से उस जानलेवा लापरवाही की भरपाई हो सकती है, जो उन्होंने अपनी और दर्जनों युवाओं की जान जोखिम में डालकर की?

डीसीसी ट्रैफिक भले ही एक दिन में 1,263 चालान काटने के आंकड़े गिनाकर अपनी मुस्तैदी दिखाएं, लेकिन जब तक जनप्रतिनिधि खुद को कानून से ऊपर समझेंगे और पुलिस 'चुनिंदा' कार्रवाई कर खानापूरी करेगी, तब तक सड़कों पर सुरक्षा सिर्फ कागजी अभियानों तक ही सीमित रहेगी।