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    रूस-यूक्रेन युद्ध में मर्चेंट शिप पर ड्रोन से हमला, कानपुर के रहने वाले चीफ ऑफिसर की मौत, 10 दिन बाद भी नहीं आया शव

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 05:47 PM (IST)

    कानपुर के मर्चेंट नेवी चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन हमले से मौत हो गई। परिवार ने सरकार से जल्द शव वापस लाने की गुहार लगाई है। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. काकादेव के शास्त्री ऊंचा पार्क के पास रहते थे मर्चेंट नेवी के चीफ आफिसर सागर गुप्ता 

    2. 18 जुलाई को रूस-यूक्रेन के बीच कालासागर (ब्लैक-सी) में युद्ध के दौरान हुई मौत

    3. 10 बाद भी आफीसर का शव नहीं पहुंचा घर,स्वजन ने सरकार से लगाई मदद की गुहार 

    जागरण संवाददाता, कानपुर। रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर (ब्लैक-सी) में युद्ध के दौरान यूक्रेन द्वारा ड्रोन से किए गए हमले में 18 जुलाई को काकादेव शास्त्री नगर निवासी मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। 21 जुलाई को उन्हें मर्चेंट नेवी के चीफ और 23 जुलाई को डीजी शिपिंग कंपनी ने युद्ध में कार्गो शिप में आग लगने से सागर गुप्ता के मौत की जानकारी दी।

    स्वजन ने ज्यादा जानकारी का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। घटना के 10 दिन बाद भी मर्चेंट नेवी के ऑफिसर का शव घर न पहुंचने से स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। काफी प्रयास के बाद भी मर्चेंट नेवी या डीजी शिपिंग से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। स्वजन ने सरकार से सागर का शव घर पहुंचाने के लिए मदद की गुहार लगाई है।

    7 माह का बेटा, 5 साल की बेटी

    काकादेव शास्त्री नगर ऊंचा पार्क के पास रहने वाले 30 वर्षीय सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। स्वजन ने बताया कि वर्ष 2018 में डीजी शिपिंग के माध्यम से उनकी मुंबई की एवन नेवीगेटर्स कंपनी में भर्ती हुई थी। परिवार में पत्नी शालू सात माह का बेटा कृष्णा और पांच साल की बेटी गौरी है। उनके बड़े भाई मनीष कुमार गुप्ता काली मठिया मंदिर के पास प्रसाद की दुकान चलाते हैं। उनके पिता रूपनारायण गुप्ता का वर्ष 2005 में बीमारी के चलते निधन हो गया था। परिवार में उनकी मां रमादेवी और चार शादीशुदा बहनें रेनू,रीना,संगीता और पूजा हैं।

    14 जुलाई को घर से गए थे

    बड़े भाई मनीष गुप्ता ने बताया कि सागर की रूस में तैनाती थी। 14 जुलाई को वह घर से निकले थे और इस्तांबुल होते हुए रूस पहुंचे थे। जहां रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर (ब्लैक-सी) में युद्ध के दौरान 18 जुलाई को यूक्रेन ने ड्रोन से कार्गों शिप पर हमला कर दिया जिससे उसमें आग लग गई। इस दौरान सागर की मौत हो गई।

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    21 जुलाई को मिली मौत की सूचना

    मर्चेंट नेवी ने 21 जुलाई को देर रात सागर के साले विजय नगर निवासी शोभित को इसकी सूचना दी तो उन्होंने स्वजन को इसके बारे में बताया। जिसे सुनकर सभी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। 23 जुलाई को डीजी शिपिंग ने यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमले में शिप में आग लगने से सागर के मौत की सूचना दी। हालांकि घटना के 10 दिन बाद भी सागर का पार्थिव शरीर न पहुंचने से स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मौत के 10 दिन बाद भी अंतिम दर्शन तक नहीं हुए

    बड़े भाई मनीष और मां रमादेवी का कहना है कि सागर की परिवार सहारा था। परिवार चलाने की जिम्मेदारी मनीष पर ही थी। उसकी मौत से परिवार हर तरह से टूट गया है वहीं मौत के 10 दिन बाद भी अब तक उन्हें उसके अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके हैं।

    मम्मी तुम क्यो रो रही हो

    पति के निधन की खबर सुनकर रो रही शालू को देखकर बेटी गौरी यहीं कहती है कि मम्मी तुम पापा की फोटो देखकर क्यो रोती रहती हो। बेटी की मासूमियत देखकर शालू को गले से लगाकर रोने लगती है कि आखिरकार वह उसके कैसे समझाए कि अब उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वहीं सात माह का बेटा कृष्णा अभी इस सब से अंजान है।

    पुलिस से मांगी मदद को कहा हम कुछ नहीं कर सकते

    सागर के भतीजे सक्षम ने बताया कि वह काकादेव पुलिस से मदद मांगने गए कि अगर वह पासपोर्ट नंबर मुहैया करा दे तो वह उसके माध्यम से दिल्ली एंबेंसी में जाकर बात करें। आरोप है कि जब वह काकादेव थाने गए तो डाक मुंशी ने कहा कि वह उनकी कोई मदद नहीं कर सकते हैं।

    सांत्वना देने के लिए आ रहे स्वजन और रिश्तेदार

    बड़े भाई मनोज गुप्ता ने बताया कि जब से उनके स्वजन और रिश्तेदारों ने घटना के बारे में सुना है रोज लोग परिवार को सांत्वना देने आ रहे हैं। वहीं सागर का पार्थिव शरीर उन तक कब पहुंचेगा इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं है। उनका कहना है कि सरकार सागर का शव पहुंचाने के साथ ही परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करें जिससे परिवार का गुजारा हो सके।

    इधर केंद्र सरकार का कड़ा रुख

    बता दें कि काला सागर में मर्चेंट शिप पर हुए हमले में भारतीय नाविक सागर गुप्ता की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इस घटना पर यूक्रेन के राजदूत को तलब कर लिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज लगातार निशाने पर आ रहे हैं और वहां काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि निर्दोष नागरिक चालक दल को निशाना बनाकर व्यापारिक जहाजों पर हमला करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।

    डीएम के निर्देश पर सागर गुप्ता प्रकरण की जांच को तीन सदस्यीय समिति गठित

    रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मर्चेंट नेवी के चीफ अफसर सागर गुप्ता की हुई मौत के मामले में जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह निर्णय सागर गुप्ता के स्वजन की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद लिया गया। समिति में श्रम प्रवर्तन अधिकारी हेमंत कुमार, दीपक कुमार मौर्य और संतोष कुमार को शामिल किया गया है।

    समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह स्वजन से संपर्क कर पूरे प्रकरण की जांच करे तथा विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, श्रम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और शोकाकुल परिवार को हरसंभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने मामले की नियमित निगरानी करने और आवश्यक सहयोग देने का भरोसा दिलाया है।

     

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