Cyber Fraud: 100 लोगों को कॉल करने का टास्क, 10 लाख रोजाना की कमाई; कानपुर के 'जामताड़ा गैंग' की पूरी कहानी
कानपुर में शैलेंद्र ने तमिलनाडु से ठगी के गुर सीखकर अपने गांव रेउना में 'ठगी की पाठशाला' खोली। उसने 15 से 55 साल के लोगों को साइबर धोखाधड़ी सिखाई।

गांव की घेराबंदी कर पकड़े गए 20 साइबर अपराधी।
HighLights
तमिलनाडु से सीखकर आए ठगी के गुर और गांव आकर किशोर से लेकर बुजुर्गों तक को सिखाया
यूपी, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, ओडिशा, बिहार समेत राज्यों के लोगों से कर चुके ठगी
जागरण संवाददाता, कानपुर। तमिलनाडु से ठगी के गुर सीखकर शैलेंद्र और उसके साथी अपने गांव रेउना के रठिगांव लौट आए और ठगी की पाठशाला खोल दी। 15 साल से 55 साल तक के लोगों को ठगी करने का तरीका सिखाया, फिर उनके जरिए कमाई करने लगा। गिरोह में करीब 100 लोग शामिल हैं। शैलेंद्र हर ठग को प्रतिदिन 100 लोगों को कॉल करने का टास्क देता था। कम से कम आठ से 10 लोग उनके जाल में फंस जाते थे। ऐसे में प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये कमाई होती थी।
साइबर अपराधी चार सालों में उप्र, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, ओडिशा समेत कई राज्यों के 500 से ज्यादा लोगों से सवा करोड़ रुपये ठग चुके हैं। हालांकि, खातों का पता चलने पर अभी ये रकम और बढ़ सकती है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि पकड़े गए रेउना के रठिगांव निवासी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि तमिलनाडु के एन्नौर में वह साथियों के साथ एक मिल में मजदूरी करने गया था। वहां कुछ ऐसे लोग मिले, जहां सिर्फ दिखावे के लिए मजदूरी कर रहे थे।
वास्तविक में वह साइबर ठगों के गिरोह से जुड़े थे। बातचीत के दौरान उन लोगों ने उसे बताया कि दिनभर में दो चार लोग फंस जाएं तो महीनों की कमाई एक दिन में हो जाएगी। इस लालच में वह और उसके साथियों ने ठगी का तरीका सीखा। महीने भर सफलता नहीं मिली लेकिन फिर एक व्यक्ति फंस गया और उससे सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 हजार रुपये खाते में ट्रांसफर करा लिए।
इसके बाद दिन-रात वह लोगों को कॉल कर ठगी के जाल में फंसाने लगा। जब वह पूरी तरीके से ठगी करना सीख गया तो 15-16 साथियों के साथ वापस गांव आ गया और गांव के अन्य साथियों को इसके बारे में बताया। इसके बाद 100 से ज्यादा लोगों को तरीका सिखाया और फिर सभी सुबह 10 बजे घर से निकल जाते और शाम पांच बजे घर लौटते थे।
रठिगांव में अलग-अलग लोगों को खेत पर, पेड़ के नीचे, ट्यूबवेल के पास ऐसे कई स्थानों पर बैठकर ठगी करते थे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि एक पीड़ित से पुलिस अधिकारी ने ठगी के बारे में जानकारी करने का प्रयास किया तो उसने गालीगलौज कर फोन काट दिया।
ऐसे करते साइबर ठगी
पुलिस आयुक्त ने एक ठग से कहा कि ठगी किस तरह करते थे। इस पर ठग ने एक पुलिसकर्मी के नंबर पर कॉल की और उससे कहा कि मैं आवास विकास कार्यालय से बोल रहा हूं। आपने प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था। आप अपने आधार कार्ड की संख्या बताओ देखता हूं कि आपका आवास पास हुआ कि नहीं। कुछ ही सेकंड बाद ठग कहता है कि पास हो गया। आप पूरी जानकारी के लिए सीनियर से बात कर सकते हैं।
इसके बाद ठग का साथी फोन लेता है और बात करता है। वह बोलता है कि आवास लेने की प्रक्रिया के लिए 1100 रुपये फीस सरकारी खाते में भेजनी है। ठग कहता है कि इसके बाद जो रुपये ट्रांसफर कर देता है तो वह ठगी का शिकार हो जाता है।
इसी तरह से पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को अश्लील वीडियो देखने का झांसा देकर उसे घुड़की में लेते हैं। कार्रवाई करने की धमकी देते हुए मोबाइल फोन की रिकार्डिंग से पुलिस का सायरन सुनाते हैं और डराकर रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।
जामताड़ा के लोगों को भी बनाया शिकार
पुलिस आयुक्त ने बताया कि झारखंड के जामताड़ा के साइबर ठग देशभर में ठगी कर चुके हैं लेकिन रेउना के साइबर अपराधी उनसे भी एक कदम आगे निकले। जामताड़ा के पीड़ित से ठगी करने वाले भी रेउना के ही निकले। उनमें से 16 पीड़ितों के बारे में जानकारी मिली है।
इनमें से मध्य प्रदेश के बालाघाट निवासी अमन से अश्लील वीडियो देखने का डर दिखा 43500 रुपये, छत्तीसगढ़ के मनीष से 11,000 रुपये, बांदा की नम्रता से 6000 रुपये, झारखंड के बड़गांव निवासी गगन वाल्मीकि से 99,000 रुपये, गाजीपुर की पूनम से 12,500 रुपये, कर्नाटक की बोनिका यूके से 71,100 रुपये, राजस्थान सीकर के चिराग दीवान से 71,500 रुपये, छत्तीसगढ़ के अमलेश्वर निवासी कुमार साहू से 37500 रुपये, उन्नाव की रिजर्व पुलिस लाइन के सिपाही विशाल यादव से आनलाइन गेम खेलने पर कार्रवाई का झांसा देकर दो लाख रुपये ठग लिए।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।