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Kanpur DM का बड़ा एक्शन! 1 मिनट में 25 शब्द भी नहीं टाइप कर पाए 3 बाबू, बना दिया चपरासी

Published: Wed, 08 Apr 2026 06:04 PM (IST)

कानपुर कलेक्ट्रेट में तीन कनिष्ठ लिपिकों को टाइपिंग टेस्ट में दो बार फेल होने के बाद चपरासी बना दिया गया ...और पढ़ें

ये फोटो एआई से जनरेट की गई है।

ये फोटो एआई से जनरेट की गई है।

HighLights

  1. तीन कनिष्ठ लिपिक टाइपिंग टेस्ट में दो बार फेल हुए।

  2. न्यूनतम 25 शब्द प्रति मिनट की गति हासिल नहीं कर पाए।

  3. जिलाधिकारी के निर्देश पर उन्हें चपरासी पद पर पदावनत किया गया।

जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर कलेक्ट्रेट से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने सरकारी दफ्तरों में कामकाज और योग्यता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां टाइपिंग टेस्ट में लगातार दो बार फेल होने पर तीन जूनियर क्लर्कों को डिमोट कर चपरासी बना दिया गया। जिलाधिकारी के इस सख्त फैसले की पूरे जिले में चर्चा हो रही है।

मृतक आश्रित कोटे से कनिष्ठ लिपिक पद पर हुई थी भर्ती

मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त किए गए प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव की करीब दो वर्ष पहले कनिष्ठ लिपिक पद पर भर्ती हुई थी। सरकारी नियमों के मुताबिक, जूनियर क्लर्क के पद पर बने रहने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर टाइपिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। इसमें अभ्यर्थी को कम से कम एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने होते हैं।

पहली बार भी तीनों असफल रहे थे

वर्ष 2024 में आयोजित पहली परीक्षा में तीनों कर्मचारी असफल रहे। प्रशासन ने तत्काल सख्त कार्रवाई करने के बजाय उनकी वेतन वृद्धि रोक दी और सुधार का मौका देते हुए दूसरी बार परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया। लेकिन वर्ष 2025 में हुई दोबारा परीक्षा में भी वे न्यूनतम टाइपिंग गति हासिल नहीं कर सके।

नहीं पूरी कर पाए बुनियादी योग्यता

इसके बाद जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देश पर विभागीय समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि तीनों कर्मचारी लिपिकीय कार्यों के लिए जरूरी बुनियादी योग्यता पूरी नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों को कनिष्ठ लिपिक पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यानी चपरासी पद पर पदावनत कर दिया।

जानें एडीएम सिटी ने क्या कहा

एडीएम सिटी डा. राजेश कुमार के अनुसार, सरकारी कार्यालयों में फाइलों की नोटिंग, पत्राचार और दस्तावेज तैयार करने के लिए टाइपिंग एक अनिवार्य कौशल है। यदि कर्मचारी यह मूल दक्षता पूरी नहीं कर पाते, तो कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।

डीएम के एक्शन की सराहना

डीएम के इस फैसले ने लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे सरकारी व्यवस्था में अनुशासन और गुणवत्ता बनाए रखने वाला जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण और अधिक समय दिया जाना चाहिए था।

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