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सिर्फ एक पुकार और बदल गया रिंकी का जीवन... Kanpur DM से 18 किमी पैदल पहुंचकर लगाई फरियाद, मिला योजनाओं का लाभ

Published: Sat, 19 Sep 2026 08:00 PM (IST)

कानपुर के घाटमपुर में जिलाधिकारी की एक पहल ने रिंकी मिश्रा के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। दो ...और पढ़ें

बिरसिंहपुर में रिंकी के घर पहुंचे जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह। जागरण

बिरसिंहपुर में रिंकी के घर पहुंचे जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह। जागरण

HighLights

  1. 18 किमी पैदल चलकर जिलाधिकारी से की थी मुलाकात

  2. जिलाधिकारी ने सुनी व्यथा तो बदल गई रिंकी की जिंदगी

संवाद सहयोगी, घाटमपुर (कानपुर)। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह शनिवार को नर्वल तहसील क्षेत्र के बिरसिंहपुर गांव रिंकी मिश्रा के घर पहुंचे। अभावों से जूझ रहीं रिंकी दो माह पहले करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील पर आयोजित समाधान दिवस में पहुंची थी। वह पहुंची तो समाधान दिवस खत्म हो चुका था और जिलाधिकारी अपने वाहन में बैठ रहे थे।

रिंकी की पुकार सुनकर जिलाधिकारी ने उसकी व्यथा सुनी। उनके निर्देश पर आनन-फानन में रिंकी को सरकारी योजनाओं को लाभ मिला। शनिवार को जब जिलाधिकारी रिंकी के घर पहुंचे तो उसका घर बन रहा था। दो समाधान दिवसों के बीच रिंकी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया। शनिवार को उसके चेहरे पर चिंता की जगह मुस्कान थी।

बीती 18 जुलाई को जिलाधिकारी समाधान दिवस पर घाटमपुर आए थे। रिंकी 18 किलोमीटर तक पैदल चलकर इस भरोसे के साथ जिलाधिकारी तक पहुंची थीं कि उनकी बात सुनी जाएगी। रिंकी ने बताया था कि उनकी सास के नाम पर बना राशन कार्ड का हस्तांतरण न होने के कारण उन्हें सरकारी राशन तक नहीं मिल रहा। पति राजीव मिश्रा का निधन हो चुका है और दो बेटियां है। बड़ी बेटी दिव्यांग है और छोटी की पढ़ाई छूट गई है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी अबिचल प्रताप सिंह जब उनके घर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि रिंकी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। तुरंत ही राशन कार्ड हस्तांतरित कराने के बाद दिव्यांग बेटी का प्रमाण पत्र, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

वर्तमान स्थिति यह है कि सरकार व जनसहयोग से रिंकी का पक्का मकान बन रहा है। जिलाधिकारी ने शनिवार को निर्माण की प्रगति देखी और परिवार से बातचीत कर उनका हाल जाना। रिंकी को रसोई गैस कनेक्शन भी मिल चुका है। आयुष्मान कार्ड से परिवार को इलाज के खर्च की आर्थिक सुरक्षा मिली है।

दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड बन गया है, जिससे उसके लिए दिव्यांगजन कल्याण की योजनाओं का रास्ता खुला है। बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से भी आच्छादित किया जा रहा है। वहीं, छोटी बेटी अदिति की पढ़ाई जारी है। जिलाधिकारी ने पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में उसका प्रवेश कराया और फीस भी जमा कराई थी। कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल कर मां की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।

अपने पैरों पर खड़ी हुई रिंकी

रिंकी के लिए एक बड़ा बदलाव यह है कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो गई है। घर के निकट प्राथमिक विद्यालय में उन्हें रसोइया के रूप में काम मिल गया है। अब उसके पास नियमित आय का जरिया है। कभी परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और बेटियों के भविष्य को लेकर परेशान रहने वाली रिंकी के लिए सरकारी योजनाएं केवल कागजी लाभ नहीं रहीं, बल्कि उसके जीवन को आगे बढ़ाने का माध्यम बनी हैं।

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