यूपी में खाद वितरण के लिए बदले नियम...बफर स्टाॅक व्यवस्था खत्म, अब नहीं केंद्रों पर नहीं लगेगी किसानों की कतार
कानपुर में खाद वितरण की पुरानी बफर स्टॉक व्यवस्था खत्म कर दी गई है, अब रैक पहुंचते ही किसानों को ...और पढ़ें

HighLights
सहकारी और निजी केंद्रो में बफर स्टाक रखने की व्यवस्था समाप्त
किसानों की मांग और मौके की जरूरत के हिसाब से करना होगा सौ फीसदी वितरण
जिला कृषि अधिकारी ने खाद वितरण में किया अभिनव प्रयोग
जागरण संवाददाता, कानपुर। खरीफ में खाद के लिए किसानों की लंबी कतार और किल्लत की तस्वीर बदलने की तैयारी है। कृषि विभाग ने उर्वरक आपूर्ति की वर्षों पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए बफर स्टॉक और प्री-पोशनिंग यानी पूर्व संधारण की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब जिले में डीएपी, यूरिया, एनपीके समेत अन्य उर्वरकों की रैक पहुंचते ही आवंटन के अनुसार तत्काल वितरण शुरू होगा। अगली खेप का अग्रिम आदेश भी साथ ही जारी किया जाएगा, ताकि आपूर्ति की कड़ी टूटने न पाए।
अब तक कुल उपलब्ध खाद का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बफर स्टाक के नाम पर गोदामों में रोक दिया जाता था। इससे किसानों के लिए तत्काल 80 प्रतिशत खाद ही उपलब्ध रहती थी। खरीफ में मांग बढ़ते ही यही व्यवस्था वितरण केंद्रों पर भीड़, लंबी कतार और खाद की कमी की वजह बनती थी। कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आती थीं।
नई व्यवस्था में सहकारी और निजी क्षेत्र के सभी वितरकों के लिए समान नियम लागू किए गए हैं। विभाग का दावा है कि रैक से सीधे वितरण केंद्रों तक खाद पहुंचने से उपलब्ध स्टाक का अधिकतम उपयोग होगा और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सकेगा। इससे वितरण केंद्रों पर भीड़ और विवाद की स्थिति भी कम होने की उम्मीद है।
सोमवार को व्यवस्था की शुरुआत के बाद जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह ने सहायक कृषि अधिकारी शिवम कटियार के साथ कोपरगंज में पहुंची उर्वरक रैक का निरीक्षण किया। रैक प्वाइंट से आवंटन के अनुसार सहकारी समितियों और निजी गोदामों के लिए खाद की खेप रवाना कराई गई। अरुणेश प्रताप ने साफ किया है कि खरीफ सीजन में आपूर्ति को मांग के अनुरूप बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
| जनपद में 01 अप्रैल से अब तक खाद वितरण एक नजर में | |
|---|---|
| उर्वरक | सहकारिता / निजी क्षेत्र / कुल वितरण (मीट्रिक टन) |
| यूरिया | 13763 / 13345 / 27108 |
| डीएपी | 4470 / 6872 / 11342 |
| एनपीके | 1007 / 2834 / 3841 |
| एमओपी | 60 / 241 / 301 |
| सुपर फास्फेट | 0 / 1063 / 1063 |
| मौजूदा समय में जनपद में खाद की कुल उपलब्धता एक नजर में | |
| उर्वरक | वेयर हाउस / सहकारिता व निजी क्षेत्र / कुल अवशेष (मीट्रिक टन) |
| यूरिया | 7079 / 19080 / 26177 |
| डीएपी | 1801 / 7873 / 9674 |
| एनपीके | 2273 / 17753 / 20026 |
| एमओपी | 0 / 2001 / 2001 |
| सुपर फास्फेट | 3 / 3049 / 3052 |
| इस वर्ष खरीफ में जिलेभर में हुआ फसलों का आच्छादन एक नजर में | |
| फसल | क्षेत्रफल (हेक्टेयर) |
| धान | 44113 |
| मक्का | 15925 |
| ज्वार | 22505 |
| बाजरा | 3972 |
| उर्द | 18016 |
| अरहर | 9020 |
| मूंग | 437 |
| मोटा अनाज | 210 |
| मूंगफली | 81 |
| तिल | 4398 |
| कुल क्षेत्रफल | 118677 हेक्टेयर |
नोट : खाद की मात्रा मीट्रिक टन में है। फसल का क्षेत्रफल हेक्टेयर में है।
जनपद में सहकारिता के 96 और 550 प्राइवेट सेंटरों से खाद वितरण होता है। अभी तक अगले सीजन या आपात स्थित के लिए इन सेंटरो में खाद का बफर स्टाक रख लिया जाता था। जबकि रैक न आने या विलंब से आने की दशा में किसानों को भटकना पड़ता था। अब इस व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया गया है। पहले किसानों को खाद वितरण किया जाएगा और जनपद में कोई भी बफर स्टाक की व्यवस्था अब प्रभावी नहीं रहेगी।
- अरुणेश प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
