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कानपुर के GGICमें वित्तीय गड़बड़ी, बिना काम के बिल लगाने पर प्रिंसिपल होंगी निलंबित, वित्त एवं लेखाधिकारी भी दोषी 

Published: Fri, 28 Aug 2026 09:10 PM (IST)

कानपुर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआइसी) में 10.50 लाख रुपये के बजट में वित्तीय गड़बड़ी की जांच पूरी हो ...और पढ़ें

ये तस्वीर प्रतीकात्मक है।

ये तस्वीर प्रतीकात्मक है।

HighLights

  1. जीजीआइसी कानपुर में 10.50 लाख के बजट में गड़बड़ी, कार्यालय सज्जा, फर्श का टाइलीकरण कराने के लगाए गए थे बिल

  2. वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में बिल सत्यापित कराने पर लेखाधिकारी ने जताई थी आपत्ति,  दैनिक जागरण ने उठाया था मुद्दा

  3. डीआइओएस बोले : जांच रिपोर्ट में प्रिंसिपल और लेखाधिकारी को माना दोषी, डीएम को भेजी रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, कानपुर। राजकीय बालिका इंटर कालेज (जीजीआइसी), विजय नगर में 10.50 लाख के बजट से कार्यालय सज्जा, फर्श पर टाइल्स लगवाने व कंप्यूटर क्लास बनवाने सहित अन्य कार्य कराने में खेल होने की बात सामने आई है। प्रिंसिपल की ओर से बजट में खेल किए जाने के आरोप की जांच पूरी हो चुकी है। एडीएम, मुख्य कोषाधिकारी व डीआइओएस की कमेटी ने जांच रिपोर्ट में प्रिंसिपल के साथ वित्त एवं लेखाधिकारी को भी दोषी माना है।

डीआइओएस ने बताया कि प्रिंसिपल दीपिका सिंह की ओर से कार्य कराने के किए गए दावे सही नहीं मिले। बिलों का भी समय रहते सत्यापन नहीं कराया गया। वहीं, वित्त एवं लेखाधिकारी खुशबू सोनी की भी पूरे प्रकरण में ढिलाई पाई गई है। तीन सदस्यीय कमेटी ने प्रिंसिपल और लेखाधिकारी को दोषी मानते हुए निलंबन करने की संस्तुति की रिपोर्ट डीएम को दे दी है।

डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। वहीं, विभाग में डीएम की ओर से जल्द दोनों के निलंबन आदेश जारी किए जाने की अटकलें तेज हो गईं हैं।

ये है प्रकरण

दैनिक जागरण ने अप्रैल माह में स्पेलिंग गलत, रोका 10 लाख का भुगतान और 10.50 लाख के बिलों पर सवाल, शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। जीजीआइसी में माध्यमिक शिक्षा विभाग से विद्यालय की कार्यालय सज्जा, परिसर में टाइलीकरण, कंप्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य मद में 10.50 लाख रुपये बजट स्वीकृत हुआ था। जेम पोर्टल से विभिन्न कार्यों के लिए सेवा प्रदाता एजेंसियां चयनित हुईं।

प्रिंसिपल ने स्कूल में पूरे बजट से कार्य कराए जाने का दावा करते हुए बिलों की फाइल बनाकर 27 मार्च को लेखाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की। लेखाधिकारी ने समय पर बिलों का सत्यापन न कराने का तर्क देकर फाइल रोक दी। 30 मार्च की रात 11:10 बजे लेखाधिकारी ने स्कूल में जाकर स्थलीय निरीक्षण भी किया।

लेखाधिकारी का आरोप था कि प्रिंसिपल ने आधे अधूरे कार्यों का बिल लगाकर बजट भुगतान कराने का दबाव बनाया। बिल फर्जी होने के अंदेशे पर आपत्तियां लगाई। लेकिन प्रिंसिपल ने जवाब नहीं दिया। प्रिंसिपल और लेखाधिकारी के बीच पनपा विवाद डीएम के समक्ष पहुंचा। जिस पर डीएम ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई।