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    Kanpur GST Fraud: 68 बैंक खाते, 13 फर्जी फर्म और करोड़ों का खेल... पुलिस के हत्थे चढ़ा 3200 करोड़ का राजदार

    Updated: Sat, 13 Jun 2026 02:56 AM (IST)

    कानपुर में 3200 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी मामले में मुख्य 'राजदार' संजीव दीक्षित को गिरफ्तार किया गया है। वह लोगों के दस्तावेजों का उपयोग कर फर्ज ...और पढ़ें

    संजीव दीक्षित।

    संजीव दीक्षित।

    HighLights

    1. 3200 करोड़ जीएसटी धोखाधड़ी में मुख्य 'राजदार' गिरफ्तार।

    2. संजीव दीक्षित ने 13 फर्जी फर्मों से की टैक्स चोरी।

    3. लोगों के दस्तावेज लेकर खोले थे बोगस खाते।

    संवाददाता, कानपुर। 68 खातों में 3200 करोड़ से अधिक के अवैध साम्राज्य के मुख्य राजदार को साइबर और चकेरी थाना पुलिस ने श्याम नगर से गिरफ्तार किया। वह मास्टर माइंड का बेहद करीबी और उसके साम्राज्य के साथ अपना भी नया साम्राज्य तैयार कर रहा था। पुलिस ने ये 10वीं गिरफ्तारी की है।

    आरोपित स्क्रैब कारोबारी यशोदा नगर का संजीव दीक्षित है, जिसने लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज लिए और 13 बोगस फर्म बना उनके नाम से खाते खुलवा डाले और सालभर में जीएसटी की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) चोरी कर फर्में बंद भी कर दी। जांच में उन खातों में 323 करोड़ रुपये लेनदेन पाया गया।

    इन लेनदेन का कनेक्शन गिरोह के मास्टर माइंड महफूज आलम और उसके दो साथी नूर आलम व फिरोज खान के साथ भी मिला है। वहीं, आरोपित से पूछताछ व जांच के दौरान गिरोह के दो नए नाम सामने आए हैं। इसके साथ ही चार्टड अकाउंटेंट व अकाउंटेंट समेत कई बड़े कारोबारियों के गिरोह से जुड़े होने की संलिप्पता की भी जांच चल रही है।

    श्याम नगर ने 16 फरवरी को यशोदा नगर के वासिद व साथी अरशद को तमंचा लगा आठ लाख रुपये लूटने की सूचना मिली थी। पुलिस पहुंची तो दोनों ने बाद में लूट से इन्कार कर दिया था। बार-बार उनके बयान बदलने पर शक हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि दोनों युवक जाजमऊ के टेनरी व स्क्रैप कारोबारी जाजमऊ के जेके कालोनी निवासी महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी वाला के लिए काम करते थे।

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    उस दिन वासिद और उसका साथी महफूज के बताने पर शिवांश टेनरी के नाम पर फूलबाग के आइडीबीआइ बैंक में खुले खाते से 3.20 करोड़ निकाले थे, जिसमें से महफूज के बेटे फैज, साले महताब और रिश्तेदारों को 2.95 करोड़ देकर शेष रकम 25 लाख लेकर महफूज को देने उसके घर जा रहे थे। मामले में पुलिस ने मुठभेड़ में दो और उनकी निशानदेही पर दो और लुटेरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

    पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि प्रकरण की जांच आगे बढ़ी तो महफूज का एक बड़ा गिरोह का पता चला। पुलिस और आयकर विभाग की जांच में महफूज, उसकी पत्नी शायदा, बेटे फैज, बेटी एनम, भाई मिशब, साले मेहताब, उसका बेटा मासूम समेत लोगों के की फर्म के नाम से 12 बैंकों में खुले 68 खातों में सवा दो साल में लगभग 3200 करोड़ का लेनदेन पाया गया।

    मामले में पुलिस व साइबर-सर्विलांस की संयुक्त टीम ने महफूज के साले जाजमऊ निवासी महताब आलम व उसके बेटे मासूम को रामादेवी रैंप से कट के पास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद मास्टरमाइंड महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी वाले को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसके बाद महफूज का खास साथी और इस अवैध साम्राज्य का वजीर बासमंडी निवासी अधिवक्ता फिरोज खान को जेल भेजा था। फिरोज महफूज का कानूनी सलाहकार भी था। इसके बाद नौवें आरोपित नूर आलम ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।

    अब पुलिस ने यशोदा नगर के राजीव नगर निवासी संजीव दीक्षित को गिरफ्तार किया। वह बीएससी पास है और उसने अपनी मां पीतांबरा इंटरप्राइजेज नाम से स्क्रैब कारोबार के लिए फर्म बना रखी है। उसमें पांच करोड़ का लेनदेन मिला है।इसके साथ ही 12 अन्य बोगस फर्म के नाम पर भी उसके खाते खुल हैं।

    पुलिस आयुक्त ने बताया कि संजीव दीक्षित वर्ष 2024 में गिरोह के साथी स्क्रैब कारोबारी संजय अग्रवाल के साथ चकेरी थाने में दर्ज मुकदमे में जेल भी जा चुका है, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद वे लोग फिर से यही काला कारोबार करने लगे। संजीव पर तीन चकेरी में और एक अनवरगंज थाने में मुकदमा दर्ज है। आरोपितों का गिरोह गरीब, बेरोजगार व मजदूरी करने वालों को बीमा, लोन, पेंशन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज लेते और बोगस फर्म बनाकर अरबों रुपये जीएसटी की आइटीसी चोरी कर चुके हैं।

    गिरोह के बंटे थे काम, एक स्क्रैब कारोबार तो दूसरा स्लाटर कारोबार के नाम पर बनाते थे बोगस फर्म

    पुलिस आयुक्त ने बताया कि ये गिरोह दो हिस्सों में काम करता था। इसमें महफूज का साथी फिरोज खान व उसके सदस्य स्लाटर हाउस के नाम पर बोगस फर्में बनाकर खाते खुलवा लेनदेन करते थे, जबकि राजदार बना संजीव दीक्षित स्क्रैब कारोबार में डील करता था। उसने शहर के विभिन्न बड़े स्क्रैब कारोबारियों से डील करता और उनका माल लेकर आइटीसी चोरी का खेल करता था। उसने खुद की मां पीतांबरा इंटरप्राइजेज नाम से फर्म बना रखी थी।

    जीएसटी की जांच और दबाव पड़ने पर आइटीसी कर देते थे वापस

    पुलिस आयुक्त ने बताया कि आरोपितों का गिरोह टैक्स चोरी पकड़े जाने से बचने के लिए छह माह बाद ही फर्म बंद कर देते थे। इसके लिए वह पोर्टल पर कैंसिलेशन रंजिस्ट्रेशन व कैंसिलेशन बाई टैक्स लिखकर जीएसटी विभाग को भेजते हैं। इसके बाद विभाग उसे स्वीकारक कर लेते हैं। फिर उसे अपडेट कर दिया जाता है। ऐसे में उस फर्म को तो बंद मान लिया जाता है, लेकिन बंद फर्म के पीछे वाली फर्म आइटीसी क्लेम करती रहती हैं। इसके अलावा जब कभी जीएसटी विभाग को मामला संदिग्ध लगता है और जांच होती है तो फर्म का मालिक ली गई आइटीसी वापस कर देता है।