जीएसवीएसएस पीजीआई कानपुर में किडनी प्रत्यारोपण को मिली मंजूरी, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
जीएसवीएसएस पीजीआई कानपुर को किडनी प्रत्यारोपण के लिए शासन से हरी झंडी मिल गई है और पांच साल का लाइसेंस जारी हुआ है। यह प्रदेश का दूसरा ट्रांसप्लांट के ...और पढ़ें

HighLights
ट्रांसप्लांट यूनिट में ओटी, आइसीयू, डोनर रूम, डायलिसिस यूनिट तैयार, ट्रांसप्लांट ओपीडी की होगी शुरुआत
लखनऊ के एसजीपीजीआइ में यूरोलाजी और नेफ्रोलाजी का नर्सिंग स्टाफ हासिल कर रहा ट्रांसप्लांट का प्रशिक्षण
जागरण संवाददाता, कानपुर। सुपर स्पेशलिस्ट ब्लाक गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट इंस्टीट्यूट (जीएसवीएसएस पीजीआइ) में किडनी प्रत्यारोपण को शासन की हरी झंडी मिल गई है। जीएसवीएम को डीजीएमई की ओर से पांच साल के लिए लाइसेंस जारी किया गया है। जहां पर अगले सप्ताह से ट्रांसप्लांट ओपीडी की शुरुआत कर किडनी प्रत्यारोपण वाले मरीजों का पंजीकरण शुरू किया जाएगा। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के बाद यह प्रदेश का दूसरा ट्रांसप्लांट केंद्र होगा। जहां पर गंभीर किडनी रोगियों में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। लखनऊ के एसजीपीजीआइ में यूरोलाजी और नेफ्रोलाजी का नर्सिंग स्टाफ ट्रांसप्लांट का प्रशिक्षण हासिल कर रहा है।
जनवरी माह में जीएसवीएसएस पीजीआइ में केजीएमयू के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डा. अभिनव अरुण सोनकर, डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के यूरोलाजी विभाग के प्रो. डा. ईश्वर राम दयाल तथा एसजीपीजीआइ के नेफ्रोलाजी विभाग के प्रो. डा. नारायण प्रसाद ने सुपर स्पेशलिस्ट ब्लाक की नेफ्रोलाजी और यूरोलाजी ओपीडी ब्लाक का निरीक्षण किया था। तब टीम ने यहां के आपरेशन थियेटर, डायलिसिस रूम, डोनर रूम, आइसीयू और छह बेड की किडनी प्रत्यारोपण यूनिट में जाकर प्रत्यर्पण के लिए जरूरी संक्रमण युक्त वातावरण, आइसोलेशन कारीडोर को देखकर खुशी जाहिर की थी।
नोडल अफसर प्रो. मनीष सिंह ने बताया कि अंगदान दिवस पर ट्रांसप्लांट की अनुमति शासन से मिली है। हमारी स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवा अब ट्रांसप्लांट में भी साबित होगी और गंभीर मरीजों का जीवन बचाएगी। देश में ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों की लंबी कतार है। प्रदेश की दूसरी यूनिट गंभीर मरीजों की जीवन रक्षा में उपयोगी साबित होगी।
संपूर्ण इलाज की मिलेगी सुविधा, नहीं भटकेंगे गंभीर रोगी
नेफ्रोलाजिस्ट डा. युवराज गुलाटी ने कहा ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत हो जाने से किडनी रोग से ग्रसित गंभीर मरीजों के जीवन को बचाया जा सकेगा। वर्तमान में हर माह ओपीडी में 20 से 25 ऐसे मामले आते हैं। जिन्हें किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत है। केंद्र नहीं होने के चलते उन्हें भटकना पड़ता है और दिल्ली, मुंबई का चक्कर लगाना पड़ता है। जीएसवीएम में यूनिट की शुरुआत से 18 जिलों से आने वाले किडनी रोगी का संपूर्ण इलाज आसान हो जाएगा।
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ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए लाइसेंस मिलना जीएसवीएम की बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का प्रमाण है। प्रदेश में जीएसवीएम चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। लाइसेंस मिल जाने के बाद अब हम ट्रांसप्लांट की शुरुआत की ओर बढ़ेंगे। - प्रो. संजय काला, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कालेज।