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'मेरी जान को खतरा है...': प्रधानाध्यापिका ने खुद को स्कूल के कमरे में किया बंद, साढ़ के महोलिया स्कूल में हाईवोल्टेज ड्रामा

Published: Tue, 11 Aug 2026 10:31 PM (IST)

साढ़ क्षेत्र के महोलिया गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने जान को खतरा बताकर खुद को कमरे में बंद ...और पढ़ें

विद्यालय में मौजूद प्रधानाध्यपिका सत्यवती (दाएं)। वीडियो ग्रैब।

विद्यालय में मौजूद प्रधानाध्यपिका सत्यवती (दाएं)। वीडियो ग्रैब।

HighLights

  1. प्रधानाध्यापिका ने जान का खतरा बताकर खुद को बंद किया

  2. रसोइयों से विवाद के कारण एक माह से मिड-डे-मील बंद

  3. स्टाफ ने प्रधानाध्यापिका की कार्यशैली पर सवाल उठाए

संवाद सहयोगी, घाटमपुर(कानपुर)। साढ़ थाना क्षेत्र के महोलिया गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने मंगलवार सुबह खुद को विद्यालय के कमरे में बंद कर लिया। उन्होंने पुलिस को सूचना देकर जान का खतरा बताया। पुलिस के पहुंचने और काफी समझाने पर दरवाजा खोला। पता चला कि उनका रसोइयों से विवाद था।

वहीं, विद्यालय स्टाफ ने प्रधानाध्यापिका की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ जिलाधिकारी व थाना पुलिस से शिकायत की है। बताया कि उनके विवाद के चलते बीते एक माह से विद्यालय में मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील नहीं बना है।

कानपुर निवासी सत्यवती कंपोजिट विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। तीन सहायक शिवकुमार, सुयश कटियार, अरविंद और दो शिक्षामित्र सोनी देवी, रुद्रपाल तैनात हैं। मंगलवार को सत्यवती ने विद्यालय पहुंचकर पुलिस को फोन करके जान का खतरा बताया। पुलिस के पहुंचने के बाद उन्होंने खुद को विद्यालय के कमरे में बंद कर लिया।

खंड शिक्षा अधिकारी पूनम वर्मा भी मौके पर पहुंची। काफी समझाने के बाद भी उन्होंने दरवाजा नहीं खोला तो उनकी बहन को बुलाया गया। बहन के पहुंचने पर वह बाहर आईं। सहायक अध्यापकों ने बताया कि प्रधानाध्यापिका ने 16 जुलाई को मुख्य दरवाजे में ताला डालकर रसोइयों को बंदी बना लिया था। काम होने के बाद भी उन्हें नहीं जाने देतीं। कुछ कहने पर वीडियो बनाती हैं और मुकदमे में फंसाने की धमकी देती हैं। पिछले तीन सालों में पूरे स्टाफ पर मुकदमे लगवाए हैं। स्टाफ ने कई बार बीईओ और बीएसए से विवाद का हल करने को कहा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, सिर्फ आश्वासन मिला।

रसोइयों से विवाद एक माह से नहीं बना मिड-डे-मील

प्रधानाध्यापिका सत्यवती का रसोइया निर्मला और अनीता से बीती 16 जुलाई को विवाद हो गया था। उनका कहना है कि जितनी देर वह विद्यालय में रुकती हैं उतनी ही देर रसोइये भी रुकें। विवाद के बाद सत्यवती 15 दिन के चिकित्सीय अवकाश पर चली गईं और रसोइयों ने भी स्कूल आना बंद कर दिया। अवकाश से आने के बाद उनकी छुट्टी से आने के बाद रसोइयां मंगलवार को फिर से विद्यालय आईं। यह देखते ही सत्यवती ने उन पर चाकू लाने का आरोप लगाकर पुलिस को फोन कर दिया और खुद को बंद कर लिया।

विद्यालय स्टाफ पर करा चुकी रिपोर्ट दर्ज

सत्यवती ने वर्ष 2024 में विद्यालय स्टाफ पर मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में दो लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी लग चुकी है। मंगलवार को हुई घटना के बाद डरे हुए विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। वहां पर उन्होंने पत्र देकर पूरा घटनाक्रम बताया। इसके साथ साढ़ थाना में भी पत्र सौंपा।

एसीपी ने जताई नाराजगी, बीएसए से निस्तारण कराने को कहा

प्रधानाध्यापिका ने जिस तरह खुद को बंद किया और समझाने पर भी दरवाजा नहीं खोला, उससे पुलिस परेशान हुई। ग्रामीण भी परेशान हुए कि अगर प्रधानाध्यापिका बच्चों के साथ खुद को बंद कर लेती तो समस्या हो जाती। इस पर एसीपी कृष्णकांत यादव नाराज हुए। उन्होंने बीएसए को इस पूरे प्रकरण और समस्या का जल्द निस्तारण कराने को कहा है। बीएसए हरिओम सिंह ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से प्रधानाध्यापिका को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।