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    कानपुर में 21 मई से थम जाएंगे ट्रकों के पहिये: पर्यावरण सेस और दिल्ली-एनसीआर बैन के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का 3 दिन का चक्का जाम

    Updated: Tue, 19 May 2026 07:49 PM (IST)

    ट्रांसपोर्टरों ने भारी वाहनों पर बढ़े पर्यावरण सेस और दिल्ली-एनसीआर में यूरो-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय 'चक्का जाम' क ...और पढ़ें

    ट्रकों की हड़ताल।

    ट्रकों की हड़ताल।

    HighLights

    1. भारी वाहनों पर पर्यावरण सेस वृद्धि का विरोध

    2. दिल्ली-एनसीआर में यूरो-4 वाहनों पर प्रतिबंध

    3. 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय चक्का जाम

    जागरण संवाददाता, कानपुर। भारी वाहनों पर अप्रत्याशित रूप से पर्यावरण सेस बढ़ाए जाने और दिल्ली एनसीआर में यूरो-4 वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने 21 से 23 मई तक तीन दिन के चक्का जाम का एलान किया है। आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआइएमटीसी) नई दिल्ली के आह्वान पर 'द यू. पी. मोटर ट्रान्सपोर्टर्स एसोसिएशन' ने मंगलवार को कानपुर में आयोजित बैठक में देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का एलान किया गया।

    'द यू. पी. मोटर ट्रान्सपोर्टर्स एसोसिएशन' के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कटारिया ने बताया कि यूरो-6 वाहनों से पर्यावरण सेस की वसूली का आदेश जारी किया गया है। दिल्ली एनसीआर में वाहनों के प्रवेश को भी रोका जा रहा है। इसके विरोध में आगामी 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय देशव्यापी सांकेतिक चक्का जाम किया जा रहा है।

    बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने सर्वसम्मति से सरकार की इन परिवहन विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। एसोसिएशन ने सभी परिवहन व्यवसायियों, ट्रांसपोर्टर्स और गाड़ी मालिकों से अपील की है कि वे चक्का जाम की इस तीन दिवसीय अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली- एनसीआर) के लिए किसी भी प्रकार के माल का परिवहन न करें। बैठक में संगठन के प्रदेश महामंत्री राघवेन्द्र वर्मा के साथ गुलशन छाबड़ा, आशू गांधी, राजेन्द्र सिंह सेठी, सुभाष अग्रवाल और राजकुमार गोयल उपस्थित रहे।

    ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कमर्शियल वाहनों पर पहले से ही कई तरह के टैक्स लागू हैं, ऐसे में अचानक पर्यावरण सेस में बेतहाशा बढ़ोतरी करना उनके व्यवसाय को बर्बाद कर देगा। दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर यूरो-4 मानक वाले ट्रकों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है। एसोसिएशन के मुताबिक, देश में अभी भी लाखों ट्रक इसी श्रेणी के हैं और अचानक इस प्रतिबंध से करोड़ों का व्यापार ठप हो जाएगा।

    आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ट्रकों के माध्यम से ही होती है, 3 दिन के जाम से मंडियों में फल और सब्जियों की किल्लत हो सकती है, जिससे दाम बढ़ेंगे। कानपुर की चमड़ा, होजरी और प्लास्टिक फैक्ट्रियों का तैयार माल दूसरे राज्यों में नहीं जा सकेगा, जिससे करोड़ों रुपये का व्यापार प्रभावित होगा।

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