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    कानपुर चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी की सेप्टीसीमिया से मौत, पूंछ काटने की थी आदत

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 11:21 PM (GMT+05:30)

    कानपुर चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी की सेप्टीसीमिया से मौत हो गई, जो अपनी पूंछ काटने की आदत से पीड़ित थी। उसे 2019 में बिजनौर से रेस्क्यू किया गया थ ...और पढ़ें

    चिड़ियाघर में बाघिन का पोस्टमार्टम करते वन्यजीव चिकित्सक। चिड़ियाघर

    चिड़ियाघर में बाघिन का पोस्टमार्टम करते वन्यजीव चिकित्सक। चिड़ियाघर

    HighLights

    1. मादा तेंदुआ जेरी की कानपुर चिड़ियाघर में सेप्टीसीमिया से मौत।

    2. स्टीरियोटाइपिक बिहेवियर के कारण पूंछ काटने की थी आदत।

    3. 2019 में बिजनौर से रेस्क्यू कर लाई गई थी जेरी।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। चिड़ियाघर मेें मादा तेंदुए जेरी की मौत हो गई। वह साढ़े सात वर्ष की थी। उसे अपनी पूछ काटने की आदत थी। वह कई बार अपनी पूछ को काट चुकी थी। उसके शरीर पर भी काटने के निशान मिले है। उसका लंबे समय से इलाज चल रहा था। पूछ काटने से उसके शरीर में संक्रमण फैल गया था। शनिवार को उसकी मौत हो गई। वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया तो मौत का कारण सेप्टीसीमिया निकला उसके ऊतकों को जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजा जा रहा है।


    चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी साढ़े सात वर्ष की थी। उसे वर्ष 2019 में शावक के रूप मेें बिजनौर से रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया था। वन्यजीव चिकित्सकों ने जेरी को बोतल से दूध पिलाकर पाला था। जेरी को अपनी पूछ काटने की आदत हो गई थी। बार-बार अपनी पूछ काट लेती थी। उसका इलाज वन्यजीव चिकित्सक उसका इलाज कर रहे थे।

    डा. नासिर ने बताया कि जेरी को स्टीरियोटाइपिक बिहेवियर नाम की बीमारी हो गई थी। इस बीमारी में कोई व्यक्ति अथवा जानवर एक ही प्रक्रिया को बार-बार दोहराता है। स्टीरियोटाइपिक बिहेवियर के कारण जेरी बार-बार अपनी पूछ काट लेती थी। उसे बाड़े से अस्पताल में स्थानांतरित कर लगातार इलाज किया जा रहा था।

    चिड़ियाघर के निदेशक डा.कन्हैया पटेल ने बताया कि मादा तेंदुए ने अप्रैल में अपनी पूछ काटी थी। उसका लगातार इलाज चल रहा था। बार पूछ काटने से उसको सेप्टीसीमिया हो गया था। उसका पोस्टमार्टम तीन वन्यजीव चिकित्सकों ने किया। उसका शवदाह कर दिया गया।

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    अमानगढ़ से आ रही बाघिन ने रास्ते में दम तोड़ा

    बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व शहर के चिड़ियाघर इलाज के लिए आ रही बाघिन की रास्ते में ही मौत हो गई। चिड़ियाघर पहुंचने से 40 किलोमीटर पहले वह मर चुकी थी बाघिन 15 वर्ष की थी, उसकी मौत का कारण वृद्ध होना बताया जा रहा है। तीन वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। उसके ऊतकों को जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजा जा रहा है। वन विभाग ने बाघिन को बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के पास नदी के किनारे से रेस्क्यू कर पकड़ा था। वन कर्मी उसे एंबुलेंस से यहां चिड़ियाघर इलाज के लिए लेकर आ रहे थे।

    चिड़ियाघर निदेशक डा.कन्हैया पटेल ने बताया कि बाघिन वृद्ध हो चुकी थी। चिड़ियाघर इलाज के लिए पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। उसका पोस्टमार्टम किया गया है। उसके ऊतक जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजे जा रहे हैं।