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    ITBP जवान की मां का हाथ काटने का मामला; डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, नसों में थक्का जमने पर नहीं ली गई थी सर्जन की सलाह

    Updated: Sun, 24 May 2026 11:37 PM (GMT+05:30)

    कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने के मामले में डॉक्टरों की टीम ने दोबारा जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नसों में थक्का जम ...और पढ़ें

    आइस बाक्स में मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय से निकलता आईटीबीपी जवान विकास। जागरण अर्काइव

    आइस बाक्स में मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय से निकलता आईटीबीपी जवान विकास। जागरण अर्काइव

    HighLights

    1. कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटा गया

    2. नसों में थक्का जमने पर सर्जन की सलाह नहीं ली गई

    3. सीएमओ की पहली रिपोर्ट पर दोबारा जांच शुरू हुई

    जागरण संवाददाता, कानपुर। आईटीबीपी के जवान की मां का हाथ इलाज के दौरान काटे जाने के मामले में सीएमओ की गठित डाक्टरों की टीम ने रविवार को दोबारा जांच शुरू की। टीम ने कृष्णा हास्पिटल में जवान की मां का इलाज कर रहे डाक्टरों के बयान दर्ज किए।

    इस दौरान सामने आया कि मरीज की नसों में थक्के जमने से खून का प्रेशर बढ़ रहा था, जिससे समस्या हुई। अगर सही समय पर वैस्कुलर सर्जन से सलाह लेकर हाथ में कट लगा दिया जाता तो हाथ काटने की स्थिति न बनती। फिलहाल टीम अभी जांच कर रही है।

    टीम की जांच के बाद डाक्टरी पए़ चुके दो आइपीएस रिपोर्ट के आधार पर अपनी जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे। जबकि सीएमओ की पहली जांच रिपोर्ट स्पष्ट नहीं थी। वहीं, शनिवार को पुलिस आफिस घेरने के मामले में पुलिस आयुक्त ने डीजी आईटीबीपी को पत्र भेजा है। केंद्र सरकार को भी जानकारी दी गई।

    ये था पूरा मामला

    मूलरूप से फतेहपुर के खागा हथगाम पोस्ट बंदीपुर निवासी विकास सिंह आईटीबीपी की 32वीं बटालियन में तैनात हैं। इसका मुख्यालय महाराजपुर में है। विकास की मां निर्मला देवी को सांस लेने में परेशानी होने पर उन्हें 13 मई को टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विकास के भाई आकाश सिंह ने बताया कि 14 मई को मां का हाथ काला पड़ने लगा और काफी सूजन आ गई थी।

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    डाक्टर ने कहा था, एक दो दिन में ठीक हो जाएगा

    डाक्टरों से पूछने पर उनका कहना था कि एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा, लेकिन उसमें फफोले पड़ने लगा। मामले में विकास के अफसरों ने पारस अस्पताल ले जाने को कहा। 14 की रात में मां को पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन समस्या बढ़ती गई और 17 मई को वहां उनका हाथ काटना पड़ा। विकास ने मामले में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से गुहार लगाई, जिस पर सीएमओ से जांच कराई गई।

    संक्रमण के कारणों का साफ उल्लेख नहीं

    शुक्रवार को सीएमओ डा. हरिदत्त नेमी ने जांच रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को सौंपी। आरोप है कि जांच रिपोर्ट में संक्रमण के कारणों का साफ उल्लेख नहीं किया गया। बल्कि हाथ खराब होने की वजह थ्राम्बो एंबोलिज्म यानी खून का थक्का जमना बताया। इससे नाराज होकर शनिवार को कमांडेंट गौरव प्रसाद शनिवार को जवान पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे। इस पर पुलिस आयुक्त ने इतने जवानों के पहुंचने पर आपत्ति जताई।

    सीएमओ से सख्त सवाल

    सीएमओ को बुलवाकर सख्त सवाल किए और पुन: जांच के निर्देश दिए। साथ ही जांच टीम में एमबीबीएस करने के बाद आइपीएस बने डा. विपिन ताडा और प्रशिक्षु आइपीएस सुमेध मिलिंद जाधव को भी शामिल किया है। जिन्होंने जांच के लिए 50 से अधिक सवाल तैयार किए। प्रशिक्षु आइपीएस डा. सुमेध मिलिंद जाधव ने बताया कि मामले में सीएमओ की जो पहली रिपोर्ट थी। उसमें आईटीबीपी के अफसरों ने आपत्ति की थी।

    सांस लेने में दिक्कत थी

    उसके प्रमुख बिंदु ये थे कि जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने पर भर्ती किया गया था तो हाथ में सूजन आने के बाद काला कैसे पड़ा, जिसके बारे में रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं लिखा गया था। अगर ऐसी स्थिति क्यों आई, क्या किसी सर्जन से सलाह ली गई, इसमें लापरवाही किसकी थी। प्रशिक्षु आइपीएस ने बताया कि मामले में रविवार को डाक्टरों के पैनल ने पुन: जांच शुरू की। वह भी संपर्क में थे।

    पहले दिन जांच में ये आया सामने

    पहले दिन की जांच में सामने आया कि महिला को सांस के साथ हृदय रोड की भी समस्या थी। इलाज के दौरान उनकी नसों में थक्के जमने लगे थे, जो हाथ की नसों तक पहुंच गए होंगे। ऐसे में खून का संचार बंद होने से समस्या बढ़ जाती है। सही समय पर कट लगाकर इसे दूर किया जा सकता था, लेकिन डाक्टरों ने इसके लिए सर्जन की सलाह नहीं ली, जिसमें लापरवाही सामने आई है। फिलहाल अभी जांच चल रही है। डाक्टरों की जांच रिपोर्ट के बाद उनकी टीम उसी आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की जांच कर कार्रवाई करेगी।

    अगर न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री से मिलने जनता दरबार जाएंगे

    आईटीबीपी के जवान विकास सिंह के भाई आकाश ने सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि सीएमओ और उनकी टीम ने अस्पताल के डाक्टरों को बचाने का पूरा प्रयास किया है। इसीलिए रिपोर्ट में गोलमोल जवाब दिए हैं, जिससे कोई कार्रवाई न हो सके। अगर न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाने जाएंगे।

     

    आईटीबीपी जवान की मां के साथ अस्पताल में जो घटना हुई है, उसका शासन ने संज्ञान लिया है और गंभीरता पूर्वक इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। हर स्थिति में न्याय मिलेगा। डीजी हेल्थ को इस मामले में पुन: तथ्यों के साथ रिपोर्ट देने के आदेश गए दिए हैं। किसी स्थिति में समझौता नहीं होगा। हम सब पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।
    बृजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री