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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    दवा का दान और गरीबों को अन्न पहुंचा रही है वासुदेव साईं विश्व सेवा संस्थान

    By Krishan KumarEdited By:
    Updated: Mon, 24 Sep 2018 06:00 AM (IST)

    संस्था के नाम में जिस तरह सेवा संस्थान जुड़ा हुआ है, उसे साकार भी किया जा रहा है। ...और पढ़ें

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    कानपुर। समाज की सेवा में तन, मन, धन समर्पित करने वालों की इस शहर में कमी नहीं है। सभी औद्योगिक समूह कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड से विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे हैं। विभिन्न संगठन इस कार्य में जुटे हुए हैं। इसी तरह धार्मिक संस्थाएं भी मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर गरीबों की मदद कर रही हैं। भूखे और मरीजों की मदद के लिए ऐसे ही प्रयासों में तल्लीनता से लगा है वासुदेव साईं विश्व सेवा संस्थान। संस्था के नाम में जिस तरह सेवा संस्थान जुड़ा हुआ है, उसे साकार भी किया जा रहा है। संस्थान द्वारा सेवा प्रकल्प के तहत लंबे समय से औषधिदानम और अन्नदानम का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

    जहां कथा, वहीं औषधि दान
    वासुदेव साईं विश्व सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं कथावाचक शुभ्रम बहल यह सेवा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बहुत से मामले हैं जिनमें गंभीर बीमारी होने पर गरीबों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। दवाएं इतनी महंगी होती हैं, जिन्हें वह खरीद नहीं सकते। इसी परेशानी को देखते हुए औषधि दानम कार्यक्रम 2015 में शुरू किया। आर्य नगर स्थित साईं मंदिर से दवाओं का वितरण किया जाता है। वर्तमान में 30 कैंसर रोगियों और 55 किडनी रोगियों को महंगी दवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा जहां भी कथा करने जाते हैं, वहां के आसपास के अस्पतालों में गरीबों को निशुल्क दवा वितरण करते हैं। गुरुवार को दवा वितरण शिविर भी लगाते हैं।

    अन्नदानम से गरीबों को भोजन
    संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि औषधिदानम के बाद 2017 से अन्नदानम कार्यक्रम भी शुरू किया गया। संस्थान द्वारा भोजन बनवा कर गरीब बस्तियों में बंटवाया जाता है। शुभ्रम बहल के मन में धर्म-अध्यात्म के साथ ही सेवा के इस भाव पर वह कहते हैं कि मन की शुद्धि के लिए ध्यान, तन की शुद्धि के लिए स्नान और धन की शुद्धि के लिए दान जरूरी है। ऐसा शास्त्रों में लिखा है, इसलिए जो भी संपन्न व्यक्ति हैं, उन्हें यह करना ही चाहिए।