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US Israel Iran तनाव का असर Kanpur तक: उद्योगों पर महंगाई की मार, कच्चा माल हुआ महंगा

Published: Sat, 21 Mar 2026 03:40 PM (IST)

अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के कारण कानपुर के उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। होर्मुज जलमार्ग बाधित होने से मालवाहक जहाज अफ्रीकी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कच्चे माल की कीमतें 30-90% तक बढ़ीं।

  2. होर्मुज जलमार्ग बाधित, जहाज ले रहे लंबा रास्ता।

  3. कानपुर के उद्योगों का उत्पादन 40% तक घटा।

  4. 1500 डालर प्रतिटन प्लास्टिक दाने की हुई कीमत

  5. 10000 किमी अतिरिक्त सफर कर रहे मालवाहक जहाज

निर्मल पांडेय, कानपुर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष की धमक कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र तक भी महसूस होने लगी है। कच्चे माल की कमी और महंगे होने से प्लास्टिक, टेक्सटाइल के साथ ही केमिकल फैक्ट्रियों की सेहत बिगड़ती जा रही है। बरसाती, तिरपाल, फसल सिंचाई वाले पाइप समेत अन्य प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें 30 से 90 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

धागे के बाद डाइज (रंग) और केमिकल्स की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होजरी और गारमेंट इंडस्ट्री को झटका लगा है। इससे उद्यमियों के पास नए आर्डर नहीं आ रहे हैं। वहीं, पुराने दाम पर आर्डर पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कई फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हो रहा है।

उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों के पास कच्चे माल के अभाव में नए उत्पादों की कमी आने पर उसका बाजार पर क्या असर है, इससे जुड़ा आंकड़ा हमारे पास नहीं है लेकिन, सुनने में आ रहा है कि औद्योगिक इकाइयों में करीब 40 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है।

कच्चे माल की सप्लाई चेन टूटी

उपायुक्त उद्योग के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते कच्चे माल की सप्लाई चेन टूट गई है। प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में जरूरी रेजिन, वैक्स, कैल्शियम कार्बोनेट पाउडर और डिटर्जेंट में प्रयोग किए जाने वाले लीनियर अल्काइन बेंजीन खाड़ी देशों से सीधे भारत पहुंच नहीं पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरे समुद्री जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों का आवागमन बाधित है।

10 हजार किमी लंबा सफर

अब इन जहाजों को अफ्रीकी महाद्वीप पारकर करीब करीब 10 हजार किमी अतिरिक्त लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। इसमें 10 से 20 दिन अतिरिक्त लग रहे हैं। ऐसे में कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है तो दूसरी तरफ इनका माल भाड़ा भी महंगा पड़ रहा है। इससे उपलब्ध कच्चा माल काफी महंगा हो गया है। प्रति टन जो कच्चा माल पहले 400-500 डालर का था, अब तीन गुणा कीमत पर 1500 डालर में मिल रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर उन उद्यमियों पर पड़ा, जिन्होंने पहले आर्डर ले रखे थे लेकिन अब कच्चा माल महंगा होने से पुरानी कीमत पर आर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं। अब सप्ताह में अधिकतम पांच दिन ही इकाइयां चल पा रही हैं।

नए उत्पाद की दोगुणी हुई कीमतें, पुराने मूल्य पर मांग रहे खरीदार

उद्यमी फैक्ट्री में निर्मित होने वाले उत्पादों पर महंगाई की मार जल्द ही बाजार में दिखने की बात कह रहे हैं। पनकी साइट-5 में स्थित एमके टेक्सटाइल के संजय जैन के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों 70 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। इसके चलते प्लास्टिक का जो पाइप पहले 105 रुपये प्रति किग्रा था, अब फैक्ट्री से उसकी निकासी 180 रुपये में हो रही है। चार बाई छह वाली प्लास्टिक चटाई का भाव 70 से बढ़कर 90-95 रुपये हो गया है।

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