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    चेहरे पर बाल, डिप्रेशन और मोटापा? कहीं आप भी तो नहीं हैं हार्मोनल इम्बैलेंस की शिकार? GSVM की डॉ. रेनू गुप्ता की जरूरी सलाह

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 08:12 PM (IST)

    जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्रो. रेनू गुप्ता ने बताया कि मोटापा और अधूरी नींद से हार्मोनल असंतुलन का खतरा बढ़ता है, जिससे कई बीमारियां घेर लेती हैं। उन् ...और पढ़ें

    प्रो. रेनू गुप्ता।

    प्रो. रेनू गुप्ता।

    HighLights

    1. मोटापा, अधूरी नींद से हार्मोनल असंतुलन का खतरा।

    2. अनियमित मासिक धर्म, चेहरे पर बाल, डिप्रेशन मुख्य लक्षण।

    3. संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, कम स्क्रीन टाइम आवश्यक।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। गर्भवती और किशोरियों में हार्मोनल असंतुलन के कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। हार्मोनल असंतुलन, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, समय पूर्व प्रसव (प्री-टर्म) और मानसिक तनाव का मुख्य कारण बन रहा है। जो चेहरे पर अधिक बाल, बाल झड़ना, एक्ने होना, तनाव, मोटापा की समस्या को बढ़ा रहा है।

    यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज की गायनी विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू गुप्ता ने कही। उन्होंने बीमारियों से बचाव के लिए सात से आठ घंटे की नींद, कम स्क्रीन टाइम और बाजार के खान-पान से दूर रहने की सलाह दी। पेश है पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश...

     

    • 44 वर्ष की हूं, मासिक धर्म में अनियमितता आ रही है। दर्द अधिक हो रहा है। ऐसी स्थिति में बचाव के लिए क्या करें?
    • आप एक बार एलएलआर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। जहां पर आपकी मासिक धर्म में अनियमितता की जांच के बाद समस्या के कारण का पता चल सकता है। बढ़ती उम्र में मीनोपाज के कारण इस प्रकार की समस्या हो सकती है। एक बार आप थायराइड और बीपी की जांच के साथ हमारे यहां दिखा लें। जहां पर अल्ट्रासाउंड की जांच के बाद फायब्राइड की गंभीरता का अध्ययन किया जा सकता है। तब तक आप संतुलित दिनचर्या और खान-पान को बेहतर करें।



    • मेरी बेटी 18 वर्ष की हो गई है। पिछले कुछ महीनों से उसके व्यवहार में बदलाव दिखने को मिल रहा है। क्या यह हार्मोनल समस्या के कारण हो रहा है?
    • जी हां, हार्मोनल समस्याओं में नींद नहीं आना, मोटापा, तनाव हार्मोंस के कारण होने वाली समस्याएं हैं। इससे बचाव के लिए संतुलित आहार और दिनचर्या को सुधारे। सात से आठ घंटे की नींद लें। स्क्रीन टाइम को कम करें। युवा वर्ग में मोबाइल और लैपटाप से दोस्ती के कारण हार्मोनल समस्याएं बढ़ रही है। इसलिए सतर्क रहें।

     

    खबरें और भी

    • मासिक धर्म कभी-कभी निर्धारित समय पर नहीं आते हैं, यह चिंता की बात तो नही है। बचाव के लिए क्या करें?
    • मासिक धर्म का अनियंत्रित होना हार्मोनल समस्या के कारण होता है। मासिक धर्म की शुरुआत और खत्म होने के समय का ध्यान रखें। मासिक धर्म कभी-कभी तनाव, मोटापे के कारण अनियंत्रित हो सकते हैं। 21 से 35 दिन के बीच में अगर मासिक धर्म आ रहे हैं तो यह संतुलित है। ऐसी स्थिति में परेशान न हो। अधिक वजन और अधिक खाना तथा अधिक जिम के कारण भी हार्मोनल समस्या हो सकती है। आधी-अधूरी नींद के कारण भी मासिक धर्म का क्रम बदल सकता है। मोटापे के कारण मासिक धर्म अनियंत्रित हो जाते हैं। अगर आप वजन को नियंत्रित करते हैं तो मासिक धर्म नियंत्रित हो जाएंगे। आप फास्ट और जंक फूड खाने से बचें। देर रात खाने से बचें। एक बार में पेट भरकर नहीं खाएं। घरेलू काम-काज करें। जूम्बा डांस कर घर पर ही वजन को नियंत्रित किया जा सकता है।

     

    • डा. गूगल की सलाह पर समस्याओं की दवा लेना सही रहेगा क्या?
    • नहीं, बिल्कुल गलत है यह। बिना चिकित्सीय सलाह के किसी भी प्रकार की दवा लेने बचें। इससे ओवर ट्रीटमेंट की समस्या हो सकती है। चैट जीटीपी की सलाह पर दवा लेने वाले कई मामले ओपीडी में सामने आ रहे हैं। जो उनके दवा के दुष्प्रभाव के साथ गंभीरता को बढ़ा रहे हैं।

     

    • आफिस कल्चर के कारण देर रात तक मोबाइल और लैपटाप पर काम करना पड़ता है। इसका असर मेरे वैवाहिक जीवन पर तो नहीं पड़ेगा?
    • अधिक स्क्रीन टाइम से पाश्चर पर असर पड़ता है। जो गर्दन, स्पाइन की समस्या का कारण बनता है। लंबे समय तक स्क्रीन टाइम में समय बिताने से युवतियों की शारीरिक बनावट पर भी असर पड़ रहा है। जो आगे चलकर वैवाहिक जीवन को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए स्क्रीन टाइम को निर्धारित करें। लंबे समय तक स्क्रीन टाइम वालाें में बीपी और मोटापे की समस्या भी बढ़ जाती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर ही स्क्रीन का उपयोग करें। बेड पर लेटकर मोबाइल और लैपटाप चलाने से बचें।

     

    • खून की कमी के कारण अक्सर कमजोरी जैसी प्रतीत होती है। क्या मैं एनीमिया से ग्रसित हूं। इसकी जांच और इलाज कैसे होगा?
    • अधिक थकान, चिड़चिड़ापन, शरीर में पीलापन दिखना, थोड़ा चलने पर सांस फूलना, घबराहट होना, धड़कन अधिक तेज होना एनीमिया का लक्षण है। इसको हीमोग्लोबिन जांच से पता करते हैं। पांच से कम हीमोग्लोबिन होने पर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। संतुलित आहार और दवा से इसकी समस्या से बचा जा सकता है। युवतियों और महिलाओं में एनीमिया सबसे आम समस्या है। जो हर दूसरी महिला और हर तीसरी युवती में मिलती है।

     

    • सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग किस उम्र में करानी चाहिए और इससे बचाव के लिए क्या करें?
    • सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में बढ़ने वाला सबसे बड़ा कैंसर रोग है। इसकी स्क्रीनिंग 21 वर्ष से शुरू करनी चाहिए। हर तीन वर्ष में इसकी जांच करानी चाहिए। बच्चेदानी की मुहाने की जांच होती है। 29 से 65 वर्ष की उम्र में पैप स्मीयर की जांच करानी चाहिए। बचाव के लिए नौ से 14 वर्ष की उम्र में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन कराना चाहिए। वैक्सीनेशन शेड्यूल में यह शामिल है।

     

    • अधिक वजन और मोटापे से क्या नुकसान हो सकता है, इससे कैसे बचाव करें?
    • अधिक वजन और मोटापा गर्भावस्था में हाई स्किल का खतरा बढ़ जाता है। युवा वर्ग में बढ़ता हुआ मोटापा हार्मोनल समस्या का कारण बनता है। कई लोग वजन कम करने के लिए बाजार में बिक रही दवाओं का सेवन कर रहे हैं। मोटापे को कम करने वाली दवा का सेवन बिना चिकित्सीय सलाह के नहीं करना चाहिए। यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। गर्भावस्था और मासिक धर्म में महिलाओं में होने वाले दर्द से बचाव के लिए दर्दनाशक दवा के दुष्प्रभाव दिख रहे हैं। इसलिए ओवर द काउंटर दवा लेने से बचें।

     

    • गर्भावस्था में तनाव और बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें?
    • गर्भावस्था में अपने साथ गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा के लिए तनाव मुक्त रहें। पारिवारिक माहौल ऐसा रखें कि किसी भी प्रकार का तनाव न रहें। शारीरिक बदलाव से परेशान न हो। हल्का शारीरिक वर्क करें। जंक फूड से दूरी बनाए। देर रात तक जगने से बचें। सात से आठ घंटे की नींद लेते हैं। पहले शिशु से जुड़ी जानकारी के लिए गूगल की सलाह न लें। फैमिली डाक्टर की सलाह पर ही शिशु केयर की जानकारी हासिल लें।

     

    • मेरी उम्र 74 वर्ष है, बच्चेदानी बाहर निकलने की समस्या है क्या करें?
    • एक बार आप जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। बच्चेदानी का बाहर निकलना बढ़ती उम्र में परेशानी का कारण बन सकता है। मीनोपाज के बाद हार्मोनल समस्याओं के कारण ऐसा हो सकता है। इसलिए घबराएं नहीं, जांच और समय पर इलाज से आप ऐसी बीमारियों से बच सकते हैं। मीनोपाज में कुछ लोगों को घबराहट, नींद नहीं आना, चेहरे पर पसीना अधिक आना, पेट के आस-पास चर्बी बढ़ना।


    इन्होंने किए प्रश्न

    पूजा अग्रवाल, गुजैनी। राधा जैन श्याम नगर। आरती विश्वकर्मा, बिठूर। श्वेता शुक्ला लालबंगला। शालिनी मिश्रा, दामोदर नगर। सीता तात्याटोपे नगर। रितु वर्मा, सर्वोदय नगर। रिया गुलाटी, गोविंद नगर। फरीदा, चमनगंज। स्मिता, बिल्हौर।


    इन बातों का रखें ध्यान

    • अचानक वजन बढ़ने पर थायराइड की जांच कराएं।
    • चेहरे पर दाने और लालपन का कारण हार्मोनल बदलाव हो सकता है।
    • 30 मिनट का शारीरिक वर्क हर दिन के शेड्यूल में होना चाहिए।
    • सात से आठ घंटे की नींद जरूर लें।
    • कम से कम बाहर का खाएं और घर में बना भोजन लें।
    • किसी भी प्रकार की दवा बिना सलाह के नहीं लें।
    • बाडी-मास इंडेक्स 18 से 30 तक ही रखें।
    • 80 सेमी से अधिक कमर का साइज महिलाओं में हृदय रोग की ओर ले जाता है।